दिल्ली: एक बार में रेडिएशन के तीन वार, कैंसर की होगी हार; मरीजों को बार-बार आने से मिलेगा छुटकारा
सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित महिलाओं को रेडिएशन थेरेपी के लिए बार-बार अस्पताल आने से जल्द छुट्टी मिल सकती है। ऐसी महिलाओं के कैंसर को एक बार में रेडिएशन के तीन वार से हराया जा सकता है।
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सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित महिलाओं को रेडिएशन थेरेपी के लिए बार-बार अस्पताल आने से जल्द छुट्टी मिल सकती है। ऐसी महिलाओं के कैंसर को एक बार में रेडिएशन के तीन वार से हराया जा सकता है। अब तक रेडिएशन थेरेपी देने के बाद दूसरी बार रेडिएशन देने के लिए एक सप्ताह का इंतजार किया जाता है ताकि मरीज को कम से कम साइड इफेक्ट्स हो। इसे देखते हुए एम्स के रेडिएशन ऑफ ऑन्कोलॉजी विभाग ने कोरोना महामारी के दौरान 40 मरीजों पर एक अध्ययन किया। इसमें 20 महिलाओं को पुराने नीति के तहत एक-एक सप्ताह के गैप पर रेडिएशन थेरेपी दी गई।
वहीं, 20 अन्य महिलाओं को एक दिन में ही छह-छह घंटे के अंतराल पर तीन रेडिएशन थेरेपी दी गई। सभी 40 महिलाओं को रेडिएशन थेरेपी देने के बाद परिणाम का अध्ययन किया गया। अध्ययन के बाद पाया गया कि परिणाम लगभग एक जैसे हैं। इसमें एक ग्रुप में 13 महिला को और दूसरे ग्रुप में 12 महिला को हल्के साइड इफेक्ट्स देखने को मिले जो सामान्य है। इस परिणाम को अब दो-तीन अक्तूबर को अमेरिकन सोसाइटी ऑफ क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी (एएससीओ) के सम्मेलन में रखा जाएगा।
इस अध्ययन के संबंध में रेडिएशन ऑफ ऑन्कोलॉजी विभाग के वरिष्ठ डॉक्टर सुशांत ने बताया कि ब्रैकीथेरेपी की मदद से पहले महिला के बच्चेदानी के मुंह के बाहरी हिस्से में रेडिएशन दिया गया। उसके बाद औजार लगाकर छह-छह घंटे के अंतराल पर अंदर कैंसर पर इंट्रा कैविटी रेडिएशन थेरेपी (आईसीआरटी) दी गई। जबकि सामान्य तरीके में अंदर रेडिशन देने के लिए कम से कम एक सप्ताह का अंतराल रखा जाता है, ताकि रेडिएशन से शरीर के अन्य भाग में साइड इफेक्ट्स न हो।
महिलाओं को मिली बड़ी राहत
बिहार, झारखंड, ओडिशा सहित देश के अन्य राज्यों से एम्स में रेडिएशन थेरेपी लेने के लिए महिलाओं को कई दिनों के लिए घरों से बाहर रहना पड़ता है। इनमें से कई महिलाएं काफी गरीब परिवार से होती है जो थेरेपी के लिए दो से तीन माह तक सड़कों पर जीवन यापन करती है। ऐसी महिलाओं को रेडिएशन थेरेपी के नई तरीके से एक दिन में ही सुविधा मिल गई और परिणाम भी पहले की तरह ही रहे।
बड़े स्तर पर किया जाएगा अध्ययन
रेडिएशन थेरेपी के असर को व्यापक स्तर पर जांचने के लिए एम्स दुनियाभर के संस्थानों के साथ व्यापक स्तर पर अध्ययन करेगा। इस अध्ययन में एक हजार से अधिक महिलाओं को शामिल किया जा सकता है। डॉक्टरों का कहना है कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत किए गए अध्ययन के परिणाम काफी बेहतर है और पूरी दुनिया को इस दिशा में सोचने को तैयार कर रही है।
यहां होते हैं साइड इफेक्ट्स
बच्चेदानी के मुंह के कैंसर में रेडिएशन थेरेपी देने के बाद कई बार महिलाओं को पेशाब व शौच के रास्ते में साइड इफेक्ट्स दिखने लगते हैं। लेकिन अध्ययन के दौरान महिलाओं में ऐसे कोई लक्षण देखने को नहीं मिले।
एम्स में रोजाना होते हैं 5-6 मरीजों का उपचार
एम्स में रोजाना ब्रैकीथेरेपी की मदद से पांच-छह मरीजों को रेडिएशन थेरेपी दी जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि इसकी मदद से कैंसर का उपचार रेडिएशन देकर ही किया जा सकता है। ब्रैकीथेरेपी की की मदद से ओरल कैंसर सहित अन्य का उपचार एम्स में हो रहा है। इस विधि में मरीज को बेहोस करके उक्त जगह पर सीधे हैवी रेडिएशन दिया जाता है। वहीं दूसरी लिनाक के माध्यम से रोजाना करीब 300 मरीजों का उपचार हो रहा है।