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Delhi NCR News: सशस्त्र बल संबंधी विवरण उजागर करने पर धुरंधर 2 फिल्म पर केंद्र को जांच के निर्देश
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) को रणवीर सिंह अभिनीत फिल्म धुरंधर 2 (धुरंधर: द रिवेंज) में सशस्त्र बलों के परिचालन संबंधी संवेदनशील विवरण उजागर होने के आरोप की जांच करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने कहा कि फिल्म भले ही काल्पनिक हो, लेकिन सुरक्षा बलों के एक जवान द्वारा उठाई गई चिंताओं को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने टिप्पणी की, फिल्म मनोरंजन के लिए काल्पनिक हो सकती है, लेकिन इसका प्रभाव नकारा नहीं जा सकता। सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के हेड कांस्टेबल दीपक कुमार ने जनहित याचिका (पीआईएल) दायर कर आरोप लगाया कि फिल्म में सशस्त्र बलों के परिचालन संबंधी विवरण, रणनीतिक स्थानों, उच्च अधिकारियों और शहीद जवानों पर आधारित पात्रों को इस कदर दिखाया गया है कि इससे देश की सुरक्षा और अखंडता को खतरा हो सकता है। याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि फिल्म में डीआरडीओ द्वारा विकसित की जा रही दवाओं के बारे में भी संवेदनशील जानकारी दी गई है, जो आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम का उल्लंघन हो सकता है। कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और सीबीएफसी को याचिका को एक प्रतिनिधि के रूप में मानकर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा, सेंसर बोर्ड को कुछ दिशानिर्देश होने चाहिए। हम केवल यह निर्देश दे रहे हैं कि याचिकाकर्ता की चिंताओं पर विचार किया जाए और सूचित निर्णय लिया जाए।
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नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) को रणवीर सिंह अभिनीत फिल्म धुरंधर 2 (धुरंधर: द रिवेंज) में सशस्त्र बलों के परिचालन संबंधी संवेदनशील विवरण उजागर होने के आरोप की जांच करने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने कहा कि फिल्म भले ही काल्पनिक हो, लेकिन सुरक्षा बलों के एक जवान द्वारा उठाई गई चिंताओं को पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने टिप्पणी की, फिल्म मनोरंजन के लिए काल्पनिक हो सकती है, लेकिन इसका प्रभाव नकारा नहीं जा सकता। सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के हेड कांस्टेबल दीपक कुमार ने जनहित याचिका (पीआईएल) दायर कर आरोप लगाया कि फिल्म में सशस्त्र बलों के परिचालन संबंधी विवरण, रणनीतिक स्थानों, उच्च अधिकारियों और शहीद जवानों पर आधारित पात्रों को इस कदर दिखाया गया है कि इससे देश की सुरक्षा और अखंडता को खतरा हो सकता है। याचिकाकर्ता ने यह भी दावा किया कि फिल्म में डीआरडीओ द्वारा विकसित की जा रही दवाओं के बारे में भी संवेदनशील जानकारी दी गई है, जो आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम का उल्लंघन हो सकता है। कोर्ट ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और सीबीएफसी को याचिका को एक प्रतिनिधि के रूप में मानकर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा, सेंसर बोर्ड को कुछ दिशानिर्देश होने चाहिए। हम केवल यह निर्देश दे रहे हैं कि याचिकाकर्ता की चिंताओं पर विचार किया जाए और सूचित निर्णय लिया जाए।
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