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आरएमएल में आज से सीलिएक जांच की सुविधा, विशेषज्ञों ने बताए इस गंभीर बीमारी के लक्षण और उपाय

Sun, 15 Sep 2019 03:08 AM IST
Trainee Trainee न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Trainee Trainee Updated Sun, 15 Sep 2019 03:08 AM IST
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Celiac inspection facilities will  be avilable in rml hospital from today
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल - फोटो : फाइल फोटो
राम मनोहर लोहिया अस्पताल (आरएमएल) में शनिवार को सीलिएक दिवस मनाया गया। कार्यक्रम में इस बीमारी से पीड़ित करीब 150 मरीज और उनके परिजन शामिल हुए। अस्पताल के पीडियाट्रिक विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर शिवानी देशवाल के मुताबिक, सीलिएक रोग से पीड़ित मरीजों की जांच के लिए ज्यादातर सरकारी अस्पतालों में टीजीए-आईजीए टेस्ट नहीं होते हैं।
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 रविवार से आरएमएल में इसकी जांच शुरू हो जाएगी। फिलहाल दिल्ली के तीन सरकारी अस्पतालों में यह जांच उपलब्ध है। एम्स, नेहरू बाल चिकित्सालय और कलावती अस्पताल के बाद आरएमएल चौथा अस्पताल होगा। अस्पताल से बाहर यह जांच करीब 1200 से 1500 रुपये में होती है, लेकिन सुविधा शुरू होने से मरीजों को राहत मिलेगी।
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बना सकती है कुपोषण का शिकार

गेंहू की एलर्जी से होने वाली सीलिएक एक ऐसी बीमारी है जो पीड़ित को हमेशा पेट की समस्या से परेशान रखती है। इसके लिए गेहूं, राई में पाया जाने वाला ग्लूटोन प्रोटीन जिम्मेदार होता है। सीलिएक रोग में ग्लूटन खाने से छोटी आंतों को नुकसान होता है। शरीर को पौष्टिक तत्व नहीं मिल पाते हैं। इस बीमारी के लक्षण दस्त, पेट दर्द, पेट फूलना, उल्टी, शरीर का विकास न होना, वजन कम होना, लीवर व हड्डियों की बीमारी के अलावा दांत में एनोमिल की दिक्कत, खून की कमी, बार-बार गर्भपात, शरीर में दाने होना और कमजोरी आदि शामिल हैं।
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तो करा लें जांच

यह एक आनुवंशिक रोग है और करीब एक तिहाई जनसंख्या में इसका कारक जीन पाया जाता है। यदि परिवार के किसी एक सदस्य को यह रोग है तो अन्य सदस्यों में इसके पाए जाने का खतरा 10 फीसदी तक होता है। इससे ग्रसित बच्चे कमजोर हो जाते हैं और उनके शरीर का पर्याप्त विकास नहीं हो पाता। लगभग 100 लोगों में एक व्यक्ति को यह बीमारी होती है। डॉक्टरों का कहना है कि इसके रोगियों को गेहूं, राई की जगह अरारोट का आटा, मक्का का आटा आदि दिया जाना चाहिए।
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