सीबीएसई ने खत्म किया पीएसए, देना होगा फॉर्मेटिव असेसमेंट
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने पीएसए (प्रॉब्लम सॉल्विंग असेसमेंट) इस बार से नहीं लेगी। अब 9वीं और 10वीं के छात्रों को पीएसए के बदले फॉर्मेटिव असेसमेंट देना होगा।
इस बाबत सीबीएसई की ओर से स्कूलों को सर्कुलर भेजा गया है। बता दें कि सीबीएसई ने 2013 में पीएसए लेना शुरू किया था। यह फार्मेटिव असेसमेंट-4 के बदले लिया जाता था।
छात्रों की काबिलियत और उसकी सोच जानने के लिए बोर्ड ने यह परीक्षा शुरू की थी। विषय की जानकारी से अलग हट कर अन्य जानकारी के लिए पीएसए की शुरुआत 9वीं और 10वीं क्लास के लिए शुरू किया था।
पीएसए 9वीं और 10वीं में फाइनल परीक्षा के पहले पीएसए लिया जाता था। सोशल साइंस, साइंस, मैथ, इंगलिश में पीएसए लिया जाता था। 60 अंक के पीएसए में 90 प्रश्न पूछे जाते थे।
पीएसए में जो अंक छात्रों को प्राप्त होते थे, उसका औसत मार्किंग निकाल कर फाइनल रिजल्ट तैयार किया जाता था। सीबीएसई ने कुछ महीने पहले पीएसए को लेकर छात्रों और अभिभावक से फीडबैक मांगा था।
फीडबैक में की गई थी बंद करने की अपील
फीडबैक में इसे बंद करने की अपील की थी। इसके अलावा कई स्कूल प्रशासन ने भी पीएसए को बंद करने को कहा था। बता दें कि इस परीक्षा के लिए कोई निश्चित समय नहीं होता था।
परीक्षा फार्म भरवाने के बाद कभी भी इसे ले लिया जाता था। पीसीए के लिए कोई सिलेबस निर्धारित नहीं था। जिसकी वजह से छात्र पीएसए को लेकर पूरी तरह से तैयार भी नहीं होते थे।
सीडी इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल रेखा यादव का कहना है कि पीएसए को दो साल पहले शुरू किया गया था, लेकिन इससे छात्र खुश नहीं थे। कुल अंक में भी पिछड़ जा रहे थे। अब इसे बंद करके फॉर्मेटिव असेसमेंट लेने का निर्देश दिया गया है।
वहीं, हरियाणा स्कूल संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष यशपाल यादव का कहना है कि यह बदलाव ठीक नहीं क्योंकि इस टेस्ट के खत्म होने से स्टूडेंट्स को पता नहीं चल सकेगा कि उनका कंसेप्ट वाकई स्पष्ट हुआ है या नहीं।
यह टेस्ट रटकर पास नहीं किया जा सकता था और न ही इसकी कोई अलग से तैयारी होती थी। यह छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी का माहौल देता था।