फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   CBSE finished PSA, would have to give Farmetiv Assessment.

सीबीएसई ने खत्म किया पीएसए, देना होगा फॉर्मेटिव असेसमेंट

Fri, 20 Nov 2015 05:30 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो / अमर उजाला, गुड़गांव Updated Fri, 20 Nov 2015 05:30 PM IST
विज्ञापन
CBSE finished PSA, would have to give Farmetiv Assessment.

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने पीएसए (प्रॉब्लम सॉल्विंग असेसमेंट) इस बार से नहीं लेगी। अब 9वीं और 10वीं के छात्रों को पीएसए के बदले फॉर्मेटिव असेसमेंट देना होगा।

विज्ञापन


इस बाबत सीबीएसई की ओर से स्कूलों को सर्कुलर भेजा गया है। बता दें कि सीबीएसई ने 2013 में पीएसए लेना शुरू किया था। यह फार्मेटिव असेसमेंट-4 के बदले लिया जाता था।
विज्ञापन


छात्रों की काबिलियत और उसकी सोच जानने के लिए बोर्ड ने यह परीक्षा शुरू की थी। विषय की जानकारी से अलग हट कर अन्य जानकारी के लिए पीएसए की शुरुआत 9वीं और 10वीं क्लास के लिए शुरू किया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


पीएसए 9वीं और 10वीं में फाइनल परीक्षा के पहले पीएसए लिया जाता था। सोशल साइंस, साइंस, मैथ, इंगलिश में पीएसए लिया जाता था। 60 अंक के पीएसए में 90 प्रश्न पूछे जाते थे।

पीएसए में जो अंक छात्रों को प्राप्त होते थे, उसका औसत मार्किंग निकाल कर फाइनल रिजल्ट तैयार किया जाता था। सीबीएसई ने कुछ महीने पहले पीएसए को लेकर छात्रों और अभिभावक से फीडबैक मांगा था।

फीडबैक में की गई थी बंद करने की अपील

CBSE finished PSA, would have to give Farmetiv Assessment.

फीडबैक में इसे बंद करने की अपील की थी। इसके अलावा कई स्कूल प्रशासन ने भी पीएसए को बंद करने को कहा था। बता दें कि इस परीक्षा के लिए कोई निश्चित समय नहीं होता था।

परीक्षा फार्म भरवाने के बाद कभी भी इसे ले लिया जाता था। पीसीए के लिए कोई सिलेबस निर्धारित नहीं था। जिसकी वजह से छात्र पीएसए को लेकर पूरी तरह से तैयार भी नहीं होते थे।

सीडी इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल रेखा यादव का कहना है कि पीएसए को दो साल पहले शुरू किया गया था, लेकिन इससे छात्र खुश नहीं थे। कुल अंक में भी पिछड़ जा रहे थे। अब इसे बंद करके फॉर्मेटिव असेसमेंट लेने का निर्देश दिया गया है।

वहीं, हरियाणा स्कूल संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष यशपाल यादव का कहना है कि यह बदलाव ठीक नहीं क्योंकि इस टेस्ट के खत्म होने से स्टूडेंट्स को पता नहीं चल सकेगा कि उनका कंसेप्ट वाकई स्पष्ट हुआ है या नहीं।

यह टेस्ट रटकर पास नहीं किया जा सकता था और न ही इसकी कोई अलग से तैयारी होती थी। यह छात्रों को प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी का माहौल देता था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed