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उपलब्धि: 94,299 छात्रों को 90 फीसदी से अधिक अंक, डीयू की कट ऑफ में बढ़ोतरी की संभावना
Fri, 03 May 2019 05:24 AM IST
देव कश्यप
रश्मि शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
रश्मि शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 03 May 2019 05:24 AM IST
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मयूर विहार फेज-3 स्थित विद्या बाल भवन में खुशी मनाते छात्र-छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 12वीं कक्षा के नतीजों मेें 90 फीसदी व 95 फीसदी से अधिक अंक लाने वाले छात्रों की संख्या बढ़ी है। ऐसे छात्रों की संख्या बढ़ने के कारण डीयू की कट ऑफ की स्थिति लगभग साफ हो गई है। माना जा रहा है कि कट ऑफ में औसत 0.25 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। खासकर 90 फीसदी से अधिक अंक लाने वालों की संख्या बढ़ने के कारण 80 फीसदी से नीचे अंक प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए डीयू में दाखिला कठिन हो सकता है। दरअसल सीबीएसई के नतीजों का पूरा असर कट ऑफ पर पड़ता है। डीयू में सबसे अधिक सीबीएसई के छात्र ही दाखिला लेते हैं। ऐसे में यदि 90 फीसदी से अधिक अंक लाने वालों की संख्या में बढ़ोतरी होती है, तो इसका असर कट ऑफ पर जाता है।
इस साल देशभर में 94,299 छात्रों ने 90 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त किए हैं, जबकि 95 फीसदी से अधिक अंक लाने वालों की संख्या 17,693 पहुंच गई है। बीते साल 95 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त करने वालों की संख्या 12,737 थी और 90 फीसदी से अधिक अंक लाने वालों की संख्या 72, 599 रही थी। वर्ष 2017 में 90 फीसदी से अधिक लाने वालों की संख्या 63,247, और 95 फीसदी से अधिक अंक पाने वालों की संख्या 10,091 थी।
डीयू से जुड़े जानकारों के अनुसार, 90-95 फीसदी अंक वाले छात्रों के हिसाब से डीयू की कट ऑफ तय होती है। इस बार 90 फीसदी से अधिक अंक लाने वालों की संख्या में 21,700 छात्र बढ़ गए हैं, जबकि 95 फीसदी व उससे अधिक अंक वालों की संख्या में 4,956 छात्रों की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में यदि अब 90 व 95 फीसदी वाले छात्रों में से दो तिहाई छात्र भी दाखिला लेना चाहेंगे, तो कट ऑफ में उछाल आ जाएगा।
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डीयू की 56 हजार सीटों पर यदि 90 फीसदी से अधिक अंक लाने वाले दाखिला लेने की सोचेंगे, तो पहली कट ऑफ में ही अधिकतर सीटें भरने का अनुमान है। इससे कॉलेजों पर भी कट ऑफ को बढ़ाने का दबाव बनेगा। दो कट ऑफ के बाद ही कट ऑफ नीचे आने की संभावना जताई जा रही है।
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इस साल देशभर में 94,299 छात्रों ने 90 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त किए हैं, जबकि 95 फीसदी से अधिक अंक लाने वालों की संख्या 17,693 पहुंच गई है। बीते साल 95 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त करने वालों की संख्या 12,737 थी और 90 फीसदी से अधिक अंक लाने वालों की संख्या 72, 599 रही थी। वर्ष 2017 में 90 फीसदी से अधिक लाने वालों की संख्या 63,247, और 95 फीसदी से अधिक अंक पाने वालों की संख्या 10,091 थी।
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डीयू से जुड़े जानकारों के अनुसार, 90-95 फीसदी अंक वाले छात्रों के हिसाब से डीयू की कट ऑफ तय होती है। इस बार 90 फीसदी से अधिक अंक लाने वालों की संख्या में 21,700 छात्र बढ़ गए हैं, जबकि 95 फीसदी व उससे अधिक अंक वालों की संख्या में 4,956 छात्रों की बढ़ोतरी हुई है। ऐसे में यदि अब 90 व 95 फीसदी वाले छात्रों में से दो तिहाई छात्र भी दाखिला लेना चाहेंगे, तो कट ऑफ में उछाल आ जाएगा।
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डीयू की 56 हजार सीटों पर यदि 90 फीसदी से अधिक अंक लाने वाले दाखिला लेने की सोचेंगे, तो पहली कट ऑफ में ही अधिकतर सीटें भरने का अनुमान है। इससे कॉलेजों पर भी कट ऑफ को बढ़ाने का दबाव बनेगा। दो कट ऑफ के बाद ही कट ऑफ नीचे आने की संभावना जताई जा रही है।
क्षेत्रवार रिजल्ट
| त्रिवेंद्रम | 98.20 फीसदी |
| चैन्नई | 92.93 फीसदी |
| दिल्ली | 91.87 फीसदी |
| पंचकूला | 87.41 फीसदी |
| अजमेर | 85.36 फीसदी |
| भुवनेश्वर | 82.62 फीसदी |
| देहरादून | 76.98 फीसदी |
| प्रयागराज | 73.95 फीसदी |
| गुवाहाटी | 68.69 फीसदी |
| पटना | 66.73 |