सुनपेड़ मामला: CBI के रडार पर पीड़ित और आरोपी पक्ष
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दलित जितेंद्र के घर हुई आगजनी की जांच आरोप-प्रत्यारोप में उलझती जा रही है। पीड़ित पक्ष के विरोधाभासी बयान और आरोपी पक्ष के दावे घटना की संदिग्धता को बढ़ा रहे हैं।
दोनों ही पक्ष घटना के लिए एक दूसरे को दोषी ठहरा रहे हैं। सच्चाई जानने के लिए सीबीआई आरोपियों के बाद अब पीड़ित पक्ष से जानकारी जुटाने में लगी है।
जितेंद्र के मुताबिक 19-20 अक्तूबर की रात ढाई बजे गांव के दस-ग्यारह सवर्णों ने उसके घर में घुस कर आग लगाई थी। जितेंद्र ने मीडिया और पुलिस अधिकारियों को जो बयान दिए थे वह हालात से मेल नहीं खा रहे थे।
हालांकि पुलिस ने आरोपी पक्ष के छह लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मामले की जांच कर रही सीबीआई ने इन सबको चार दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। आशंका के आधार पर सीबीआई ने आरोपी आकाश और अमन को एक दिन की अतिरिक्त रिमांड पर लिया था।
जितेंद्र के आरोप फोरेंसिक रिपोर्ट से अलग
सबको अलग कर कई अधिकारियों ने चार दिन तक इन लोगों से घटना के दिन और समय उनकी मौजूदगी आदि की जानकारी ली थी। आरोपियों से पूछताछ के बाद अब सीबीआई की जांच की दिशा पीड़ित जितेंद्र और उसकी पत्नी रेखा की ओर मुड़ गई है।
मंगलवार को सीबीआई टीम के कई अधिकारियों ने सुनपेड़ पहुंच कर जितेंद्र से भी घटना के बारे में सवाल जवाब किए। मालूम हो कि घटना में झुलसी हुई रेखा ने इलाज के लिए बल्लभगढ़ ले जाए जाने के दौरान एसआई वली मोहम्मद से बताया था कि तीन हमलावरों ने आग लगाई थी।
हालांकि जितेंद्र ने ग्यारह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। दोनों के बयान में कितनी सच्चाई है सीबीआई इसे खंगालने का प्रयास कर रही है। खास बात यह है कि जितेंद्र के आरोप और फोरेंसिक रिपोर्ट एक दूसरे से भिन्न हैं।
इधर, सवर्णों ने भी पीड़ित पक्ष पर ही कई गंभीर आरोप लगाते हुए मामले की जांच करने की मांग की। इनमें दंपत्ति के बीच आपसी विवाद प्रमुख था। सीबीआई हर बिंदु पर जांच कर रही है।
जांच में ये बिंदु होंगे अहम साबित
घटना की हकीकत जानने के लिए सीबीआई के लिए यह बिंदु अहम साबित होंगे।
-उस रात हमलावरों की संख्या (जितेंद्र के मुताबिक) ग्यारह थी या (एसआई वली मोहम्मद को दिए रेखा के बयान के मुताबिक) तीन। घटना के समय किसी आरोपी के मोबाइल फोन की लोकेशन जितेंद्र के घर के पास थी या नहीं थी।
-हमलावर किस रास्ते से आए, क्योंकि दीवार फांदकर अंदर घुसने के चिन्ह नहीं मिले थे। क्या वह मुख्य दरवाजा खोल कर अंदर घुसे थे। परिवार के अन्य लोगों के जागरण में जाने की वजह से जितेंद्र ने मुख्य दरवाजा अंदर से बंद नहीं किया था।
-हमलावरों ने कमरे के अंदर घुस कर ज्वलनशील पदार्थ छिड़का था या खिड़की से। यदि अंदर से छिड़क कर आग लगाई तो जितेंद्र और उसकी पत्नी ने आग लगाने से पहले विरोध क्यों नहीं किया। खिड़की से ज्वलनशील पदार्थ छिड़के जाने के चिन्ह फोरेंसिक टीम को नहीं मिले थे।
-फोरेंसिक रिपोर्ट के मुताबिक जितेंद्र के कमरे का दरवाजा बाहर से बंद नहीं था। ऐसे में जितेंद्र बच्चों को लेकर बाहर क्यों नहीं निकला। क्या हमलावरों ने बाहर से कमरा खींच कर बंद कर रखा था। यदि ऐसा होता तो घटना के चंद मिनट बाद ही उधर से गुजर रही बच्ची काजल ने हमलावरों को देखा होगा।