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सावधान! गांवों की ओर आ रहे जंगली जानवर

Tue, 03 Feb 2015 01:10 PM IST
डीपी आर्य/अमर उजाला, गाजियाबाद
डीपी आर्य/अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Tue, 03 Feb 2015 01:10 PM IST
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Caution! Villages are the wild animals

आबादी में जंगली जानवरों के आने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। अपने व्यवहार से अलग ये जानवर भीड़ के बीच घुस जाते हैं और लोगों पर हमला तक करने से गुरेज नहीं करते।

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साल दर साल जानवरों के आने और हमलावर होने के मामले बढ़े हैं। विशेषज्ञों ने इसका कारण जीवों में हारमोन संतुलन का गड़बड़ाना माना है।

चेतावनी जारी की है कि अभी तेंदुए, चीते और भालू आबादी में आ रहे हैं, यदि वन क्षेत्रों में बढ़ते प्रदूषण को नहीं रोका गया तो हाथी और शेर भी पागलों की तरह आबादी की ओर रुख कर सकते हैं।
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पिछले दो-तीन साल में वेस्ट यूपी के ज्यादातर जनपदों में जंगली जानवरों का आना जारी है। ये जंगली जानवर पालतू पशुओं, कुत्तों और मनुष्यों पर भी हमला कर रहे हैं।
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कई जानवर हादसे में तो कई लोगों के हमले में मारे जा चुके हैं। लोनी क्षेत्र में दो और हापुड़ क्षेत्र में तीन तेंदुओं की मौत हो चुकी है। लोगों में इनका खौफ है।

वेस्ट यूपी में तेंदुआ, चीते, भालू, भेडिया और लकड़बग्गा देखे गए हैं। वन्य जीव स्वभाव के विशेषज्ञ डा. डीपी सिंह के अनुसार सामान्य जंगली जीव बस्तियों में नहीं आते हैं।

वन्य क्षेत्रों के हालात से इनका स्वभाव बदल दिया है। वन्य क्षेत्र कटने से हुए पर्यावरण असंतुलन से इनका हारमोन सिस्टम गड़बड़ा रहा है। वन्य जीवों के संरक्षित क्षेत्रों में भी हालात सामान्य नहीं हैं।

जीवों को सबसे ज्यादा नुकसान सल्फरडाई आक्साइड और कार्बनडाई आक्साइड की मात्रा बढ़ने से हो रहा है। ऐसे में इनके शरीर में पेप्टीज और लाइसिन की कमी होने लगती है।

शरीर में यूरिक एसिड बढ़ जाता है। ये उग्र-आक्रामक हो जाते हैं। मिलन के सीजन में भी यह स्थिति ज्यादा गंभीर हो जाती है। ऐसे में इनकेशरीर में एमिबियल इंफेक्शन भी हो जाता है, जिससे ये बेचैन हो उठते हैं।

वन विभाग के रेंजर शहजाद आलम के अनुसार बदलते पर्यावरण का प्रभाव सभी जीवों पर पड़ता है। छोटे जीवों पर इसका असर जल्दी होने लगता है, जबकि बड़े जीवों की सहन शक्ति ज्यादा होती है।


वन क्षेत्रों के कटान को रोकने, लोगों के हस्तक्षेप को कम करने, वाहनों की आवाजाही रोकने, जल क्षेत्र बढ़ाने (इससे गैस नियंत्रित होती हैं।

संरक्षित क्षेत्रों में बिजली आदि की आपूर्ति रोकने के तत्काल प्रयास नहीं किए गए तो आने वाले सालों में शेर और हाथी भी जंगलों को छोड़कर भागने लगेंगे। इस पर तत्काल जागरूकता की जरूरत है।

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