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Delhi NCR News: रेवेन्यू सेक्रेटरी और सीबीआईसी चेयरमैन के खिलाफ सीएटी की अवमानना कार्रवाई रद्द
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-यह मामला 2004 बैच के आईआरएस अधिकारी हरि नारायण मीणा से जुड़ा
-अनुशासनात्मक कार्यवाही खत्म होने के बाद उन्होंने पदोन्नति और उससे जुड़े लाभों की मांग की थी
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) की तरफ से रेवेन्यू सेक्रेटरी और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर व सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन के खिलाफ शुरू की गई अवमानना कार्रवाई को रद्द किया है। कोर्ट ने कहा कि अवमानना अधिकार का इस्तेमाल पुराने आदेशों पर दोबारा विवाद खड़ा करने के लिए नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने कहा कि जब किसी न्यायिक आदेश का पालन करते हुए सरकार कोई फैसला ले चुकी हो, तो उस फैसले की सही-गलत या उससे जुड़े पैसों के दावों पर अवमानना के जरिए सुनवाई नहीं हो सकती।
पीठ ने स्पष्ट किया कि अवमानना का मकसद आदेश लागू कराना है, न कि उसके बाद उठे नए विवादों को सुलझाना। अगर कोई पक्ष सरकार के फैसले से संतुष्ट नहीं है, तो उसके लिए अलग कानूनी रास्ता अपनाना होगा। मामला 2004 बैच के आईआरएस अधिकारी हरि नारायण मीणा से जुड़ा है। अनुशासनात्मक कार्यवाही खत्म होने के बाद उन्होंने पदोन्नति और उससे जुड़े लाभों की मांग की थी। जनवरी 2025 में सीएटी ने सरकार को उनके मामले पर विचार करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद सरकार ने उन्हें सितंबर 2022 से कमिश्नर पद पर काल्पनिक (नोटशनल) पदोन्नति दे दी। हालांकि सरकार ने कोई काम नहीं, कोई वेतन नहीं के सिद्धांत के तहत पिछला वेतन देने से इनकार कर दिया। इससे नाराज होकर मीणा ने सीएटी में अवमानना याचिका दाखिल की। सीएटी ने इसे आदेश का उल्लंघन मानते हुए अधिकारियों के खिलाफ अवमानना के आदेश जारी कर दिए थे और सीबीआईसी चेयरमैन को व्यक्तिगत रूप से पेश होने को भी कहा था। हाई कोर्ट ने इन आदेशों को रद्द करते हुए कहा कि सरकार ने सीएटी के निर्देशों का पालन किया है और जानबूझकर अवहेलना नहीं की गई। इसलिए अवमानना की कार्रवाई सही नहीं है।
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-अनुशासनात्मक कार्यवाही खत्म होने के बाद उन्होंने पदोन्नति और उससे जुड़े लाभों की मांग की थी
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली।
हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) की तरफ से रेवेन्यू सेक्रेटरी और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर व सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के चेयरमैन के खिलाफ शुरू की गई अवमानना कार्रवाई को रद्द किया है। कोर्ट ने कहा कि अवमानना अधिकार का इस्तेमाल पुराने आदेशों पर दोबारा विवाद खड़ा करने के लिए नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने कहा कि जब किसी न्यायिक आदेश का पालन करते हुए सरकार कोई फैसला ले चुकी हो, तो उस फैसले की सही-गलत या उससे जुड़े पैसों के दावों पर अवमानना के जरिए सुनवाई नहीं हो सकती।
पीठ ने स्पष्ट किया कि अवमानना का मकसद आदेश लागू कराना है, न कि उसके बाद उठे नए विवादों को सुलझाना। अगर कोई पक्ष सरकार के फैसले से संतुष्ट नहीं है, तो उसके लिए अलग कानूनी रास्ता अपनाना होगा। मामला 2004 बैच के आईआरएस अधिकारी हरि नारायण मीणा से जुड़ा है। अनुशासनात्मक कार्यवाही खत्म होने के बाद उन्होंने पदोन्नति और उससे जुड़े लाभों की मांग की थी। जनवरी 2025 में सीएटी ने सरकार को उनके मामले पर विचार करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद सरकार ने उन्हें सितंबर 2022 से कमिश्नर पद पर काल्पनिक (नोटशनल) पदोन्नति दे दी। हालांकि सरकार ने कोई काम नहीं, कोई वेतन नहीं के सिद्धांत के तहत पिछला वेतन देने से इनकार कर दिया। इससे नाराज होकर मीणा ने सीएटी में अवमानना याचिका दाखिल की। सीएटी ने इसे आदेश का उल्लंघन मानते हुए अधिकारियों के खिलाफ अवमानना के आदेश जारी कर दिए थे और सीबीआईसी चेयरमैन को व्यक्तिगत रूप से पेश होने को भी कहा था। हाई कोर्ट ने इन आदेशों को रद्द करते हुए कहा कि सरकार ने सीएटी के निर्देशों का पालन किया है और जानबूझकर अवहेलना नहीं की गई। इसलिए अवमानना की कार्रवाई सही नहीं है।
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