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विवादित बयान देकर बुरे फंसे शंकराचार्य!

Tue, 01 Jul 2014 05:01 PM IST
Updated Tue, 01 Jul 2014 05:01 PM IST
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case on shankracharya swaroopanand in lucknow court

साईं बाबा की पूजा और मान्यता को लेकर चल रही बयानबाजी में शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।

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लखनऊ के कपूरथला इलाके में स्थित शिव शक्ति साईं मंदिर समिति के अध्यक्ष कमल किशोर श्रीवास्तव ने उनके खिलाफ लखनऊ कोर्ट में अर्जी देकर रिपोर्ट दर्ज किए जाने की मांग की है।
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कोर्ट ने अलीगंज थाने से रिपोर्ट मांगते हुए अर्जी पर सुनवाई के लिए 4 जुलाई की तारीख निर्धारित की है।

शंकराचार्य के बयान पर बवाल

case on shankracharya swaroopanand in lucknow court

लखनऊ हाईकोर्ट बेंच के अधिवक्ता डा. कृष्णा सिंह ने बताया कि उनके मुवक्किल की ओर से सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत लखनऊ कोर्ट में पेश की गई थी।

वादी ने अपनी अर्जी में कहा है कि शंकराचार्य के इस बयान से साईं भक्तों को ठेस पहुंची है। शंकराचार्य का यह कहना कि ‘जो हिंदू साईं को मानते हैं उन्हें हिंदू धर्म छोड़ देना चाहिए’ सीधे तौर पर हिंदुओं की भावना को आहत करता है।

डा. कृष्णा सिंह ने बताया कि इस मामले में 24 जून को अलीगंज थाने में अर्जी दी गई थी, मगर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। उन्होंने बताया कि जेएम-द्वितीय अपूर्वा सिंह की कोर्ट ने इस मामले में अलीगंज थाने से रिपोर्ट मांगते हुए सुनवाई के लिए 4 जुलाई नियत की है।

उमा भारती पर किया प्रहार

case on shankracharya swaroopanand in lucknow court

द्वारकापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि वेदों के विरुद्ध बोलने पर हमने विष्णु के अवतार रूप में आए भगवान बुद्ध को भी स्वीकार नहीं किया था। फिर उमा भारती तो राजनीतिक बयानबाजी कर रही हैं।

गाजियाबाद के सिहानी गांव में एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे शंकराचार्य ने कहा कि किसी को भी धर्म और शास्त्रों का मखौल बनाने की छूट नहीं दी जा सकती। संतों का जीवन शास्त्रों की रक्षा के लिए होता है, इसके लिए शस्त्र तक भी जा सकते हैं।

बता दें कि पहली बार हर-हर मोदी, घर-घर मोदी नारे का विरोध करने और संघ से बातचीत कर इस पर रोक लगवाने को लेकर चर्चाओं में आए द्वारका और शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती आजकल साईं पूजा के विरोध को लेकर चर्चाओं में हैं।

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