Delhi: मुस्लिम युवक को राष्ट्रगान गाने के लिए मजबूर करने का मामला, प्राथमिकी की प्रतियां पेश करने के निर्देश
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल व न्यायमूर्ति अनीश दयाल की पीठ ने कहा कि एक बार ऐसी प्राथमिकियां रिकॉर्ड में आने के बाद दिल्ली पुलिस को मामलों की जांच के संबंध में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया जा सकता है।
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने सीपीआई (एम) नेता बृंदा करात से उन एफआईआर की प्रतियां पेश करने को कहा है, जिनमें वर्ष 2020 के दंगों के दौरान पुलिस कर्मियों द्वारा कथित अत्यधिक बल के उपयोग की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल व न्यायमूर्ति अनीश दयाल की पीठ ने कहा कि एक बार ऐसी प्राथमिकियां रिकॉर्ड में आने के बाद दिल्ली पुलिस को मामलों की जांच के संबंध में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया जा सकता है। अदालत ने मामले की सुनवाई सात अगस्त तय की है।
करात के वकील ने अदालत को बताया कि फरवरी 2020 में उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान पुलिस द्वारा सत्ता के कथित दुरुपयोग के संबंध में कई प्राथमिकियां है। उन्होंने कहा, ऐसी ही एक घटना एक वायरल वीडियो में सामने आई थी, जिसमें कुछ पुलिसकर्मियों को कथित तौर पर एक मुस्लिम युवक को पीटते हुए और उन्हें राष्ट्रगान गाने के लिए मजबूर करते हुए दिखाया गया था।
पीठ ने कहा आप उन एफआईआर की प्रति दाखिल करें जिनमें आप चाहते हैं कि हम स्वतंत्र जांच का निर्देश दें। अदालत उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है जो 2020 के दंगों के बाद दायर की गई थीं। नागरिकता कानून समर्थकों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा नियंत्रण से बाहर होने के बाद 24 फरवरी, 2020 को उत्तर पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक झड़पें हुई थीं, जिसमें कम से कम 53 लोग मारे गए और लगभग 700 घायल हो गए।