दिल्ली: 50 कॉलोनियों में घर बैठे मिलेगी कैंसर की जांच, राजीव गांधी कैंसर अस्पताल की पहल
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एक ओर जहां देश में गैर संक्रमणकारी रोग (एनसीडी) का अत्यधिक भार निरंतर बढ़ रहा है। वहीं, राजधानी में आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्ल्यूएस) वर्ग के तमाम परिवार कैंसर की जद में हैं। हालात यह हैं कि दिल्ली में हर साल 25 हजार से ज्यादा कैंसर मरीज सामने आ रहे हैं। रोहिणी के राजीव गांधी कैंसर अस्पताल ने बेहतर पहल शुरू करते हुए 50 कॉलोनियां गोद ली हैं, जहां घर बैठे इन परिवारों को न सिर्फ कैंसर की जांच, बल्कि निशुल्क उपचार भी दिया जा रहा है।
अभी तक 50 में से 18 कॉलोनियों में अस्पताल की ओर से करीब 1 दर्जन से ज्यादा पॉजिटिव कैंसर मरीज मिल चुके हैं। मुंह और गर्भाश्य का कैंसर सर्वाधिक मिला है। अस्पताल से करीब 12 किलोमीटर क्षेत्र में मौजूद इन कॉलोनियों के आसपास शिविर लगाकर मरीजों की पहचान की जा रही है। इसी क्रम में अब रोटरी क्लब दक्षिणी पूर्वी की ओर से एक अत्याधुनिक बस भी सहयोग के लिए मिल चुकी है, जिसमें महिला और पुरुष के लिए अलग-अलग चैंबर की व्यवस्था है। जांच के लिए बस में एक-एक डॉक्टर, नर्स और काउंसलर तैनात किया गया है।
कैंसर की हैं कई वजह
दिल्ली कैंसर रजिस्ट्री के अनुसार, राजधानी में सालाना करीब 25 हजार नए मरीज सामने आ रहे हैं। इनमें पुरुष मरीज प्रोस्टेट और महिलाओं में स्तन व गर्भाश्य कैंसर के मामले सर्वाधिक सामने आ रहे हैं। एम्स के विशेषज्ञों की मानें तो निम्र आय वर्ग परिवारों में मुंह के कैंसर की संभावना ज्यादा है। इसके पीछे मुख्य वजह गुटखा, पान मसाला और धूम्रपान का सेवन है।
मोबाइल क्लीनिक में ऐसे कर रहे जांच
अस्पताल के रेडियोलॉजी प्रमुख डॉ. अरविंद चतुर्वेदी ने बताया कि रोहिणी इलाके में मौजूद कॉलोनियों के आसपास झुग्गी इलाके भी काफी हैं। अभी तक इन क्षेत्रों में जाकर शिविर के माध्यम से मरीजों की जांच की जा रही थी, लेकिन अब अत्याधुनिक बस कैंसर के मोबाइल क्लीनिक वहां तक पहुंचेगी और मरीजों की निजता का ख्याल रखते हुए जांच की जाएगी। मुंह के कैंसर के लिए ईएनटी (नाक, कान, गला) विशेषज्ञ जांच कर रहे हैं। गर्भाश्य कैंसर की जांच के लिए पैप स्मियर टेस्ट कराया जा रहा है। इसमें स्लाइड बनाकर टेस्टिंग की जाती है।
इन कॉलोनियों में पहुंच रही टीम
बाहरी दिल्ली के शाहबाद डेयरी, जैन नगर, अगर नगर भाग-1 और 2, प्रवेश नगर, मिर विहार, भाग्य विहार, राजीव नगर, रमेश एंक्लेव, रामा विहार, बवाना गांव, पूठखुर्द, सुल्तानपुर, मुबारकपुर डबास, मुकुंदपुर, सोनिया विहार, फौजी कॉलोनी, मुकुंदपुर भाग-1, लालबाग आजादपुर, केवल पार्क में डॉक्टरों की टीमें पहुंच रही हैं। इन इलाकों को गोद लिया जा चुका है।
समय पर होगी जांच, तभी देंगे मात
डॉ. बीआर आंबेडकर संस्थान रोटरी कैंसर अस्पताल एम्स के निदेशक डॉ. जीके रथ का कहना है कि सामाजिक स्तर पर इस तरह की पहल होना बेहद जरूरी है। यदि कैंसर की समय पर जांच हो तो इसे मात दी जा सकती है। समाज में कैंसर को लेकर काफी भय है, जबकि लोगों को भय खत्म कर समय पर जांच कराते रहने से जानलेवा बीमारी को रोका जा सकता है।
क्या कहते हैं आंकड़े
. साल 2016 में 14 लाख कैंसर के मरीज देश में मिले, इनमें वृद्घि जारी है।
. पिछले 26 साल में कैंसर मरीजों का देश में भार हुआ दोगुना।
. दुनिया में अभी तक कैंसर के करीब 100 तरह के प्रकार आ चुके हैं सामने।
. भारत में 100 में से स्तन, गर्भाश्य, मुंह और फेफड़ों में कैंसर की हिस्सेदारी 41 फीसदी।
. दिल के बाद कैंसर भारत में दूसरा सबसे ज्यादा जान लेने वाला रोग।
. तंबाकू से जुड़ी परेशानी के कारण हर दिन देश में 2500 लोगों की मौत।
. भारत में गर्भाश्य कैंसर से सबसे ज्यादा महिलाओं की हो रही मौत, हर 8 मिनट में एक मौत।
. (आंकड़े भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के अध्ययनों के अनुसार)