कैंसर के मरीजों को बार-बार नहीं करानी होगी कीमोथेरेपी
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खतरनाक बीमारी कैंसर के इलाज के लिए अब एम्स में नई तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। इस नई तकनीक से सर्जरी करके शरीर से कैंसर का ट्यूमर निकालने के बाद एक बार में ही मरीज को दी जाने वाली कीमोथेरेपी की डोज पूरी कर ली जाती है।
इसके बाद उसे बार-बार कीमोथेरेपी की जरूरत नहीं पड़ती। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) देश का पहला सरकारी चिकित्सीय संस्थान है जहां इस तकनीक से मरीजों के इलाज की सुविधा शुरू की हुई है।
हालांकि सभी तरह के कैंसर में इस तकनीक का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। इस तकनीक में मरीज के शरीर से कैंसर का ट्यूमर निकालने के बाद उसी समय हाइपरथेमिक इंटरपेरिटोनियल कीमोथेरेपी दी जाती है।
एचआईपीईसी तकनीक से कैंसर का इलाज
इससे कैंसर ट्यूमर के आसपास बचे माइक्रोस्कोपिक कैंसर सेल्स को खत्म किया जाता है। यह प्रक्रिया करीब डेढ़-दो घंटे तक चलती है। सर्जरी से लेकर कीमोथेरेपी देने की पूरी प्रक्रिया में मरीज और उसके ट्यमूर के आकार के अनुसार छह से 10 घंटे तक का समय लग जाता है।
हाइपरथेमिक इंटरपेरिटोनियल कीमोथेरेपी की किट की कीमत करीब डेढ़ लाख रुपये है, जो फिलहाल एम्स में मरीजों के लिए मुफ्त में उपलब्ध कराई जा रही है।
साइड इफेक्ट भी नहीं एम्स कैंसर विभाग के कंसलटेंट सर्जिकल ऑनकोलॉजिस्ट डॉ.एमडी रे ने बताया कि फिलहाल बच्चेदानी के मुंह का कैंसर, पेट, अपेंडिक्स, पेरिटोनियल और कोलोन कैंसर मामले में ही इस तकनीक का सहारा लिया जा रहा है।