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सुनपेड़ अग्निकांड पर पीड़ित जितेंद्र ने खुलकर बयां किया दर्द

Wed, 28 Oct 2015 07:34 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो / अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Wed, 28 Oct 2015 07:34 PM IST
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Can a father burnt alive to his children?
सुनपेड़ गांव में दलित परिवार को जिंदा जला देने की घटना से लोग जहां अचंभित है। वहीं, अग्निकांड की घटना को लेकर तरह-तरह की अफवाहें भी फैली हुई हैं। बुधवार को जितेंद्र ने ‘अमर उजाला’ संवाददाता मुकेश शर्मा के साथ इस मामले पर खुलकर बात की और कई सवालों का जवाब दिया।
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प्रश्न : 5 अक्तूबर 2014 में हुई तीन लोगों की मौत में दर्ज मामले में आप आरोपी नहीं हैं। आपको क्यों नामजद नहीं किया गया?
जितेंद्र : उस घटना के वक्त मैं एक निजी अस्पताल में ग्लुकोज चढ़ावा रहा था। इसलिए मेरा नाम मामले में नहीं था। चाचा जगमाल के साथ कई लोग बेकसूर हैं, क्योंकि जगमाल घर में भाग-दौड़ करने वाले व्यक्ति है। इसलिए उन्हें नामजद किया गया।

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प्रश्न : दूसरा पक्ष आरोप लगा रहा है कि इस घटना को आपने अंजाम दिया। आपकी पत्नी से अनबन रहती थी?
जितेंद्र : मैं अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता हूं। मैंने आज तक रेखा से ऊंची आवाज में भी बात नहीं की। यह बात आप मेरे ससुराल वालों से भी पूछ सकते हैं। क्या कोई बाप अपने बच्चों को जिंदा जला सकता है?

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'गंदी गाली देकर वंश खत्म करने की बात कही'

Can a father burnt alive to his children?

प्रश्न: घटना की रात जब ज्वलनशील पदार्थ डाला गया तो आपने क्या किया?
जितेंद्र: हम दोपहर बाद मेट्रो से कालकाजी मंदिर गए थे। वहां से रात करीब नौ बजे लौटे। थक गए थे। इसलिए जागरण में गए बिना ही घर में सा गए। रात को पेट्रोल की छींटे मुझ पर पड़ीं तो मैंने चिल्लाकर कहा, क्या कर रहे हो? इतना कहते ही आरोपियों ने तिल्ली डालकर आग लगा दी।

प्रश्न: क्या आप आरोपियों को पहचानते हो?
जितेंद्र: मैंने सभी आरोपियों को नहीं देखा, लेकिन वे 8-10 थे। मैंने एदल और आकाश को ही देखा था। हालांकि, कुछ महिलाओं के भी होने की बात चल रही है, लेकिन मैं पक्का नहीं कह सकता।

प्रश्न: पुरानी घटना के बाद आपको अंदेशा था ऐसा हो जाएगा?
जितेंद्र: मुझे सिर्फ लड़ाई-झगड़े का अंदेशा था। ऐसा होगा, यह नहीं सोचा था। रेखा को आकाश ने गंदी गाली देकर वंश खत्म करने की धमकी दी थी। कुछ दिन पहले दूध काढ़ती हुई मम्मी पर किसी ने पत्थर भी मारा था। भय के कारण मैंने घर से बाहर निकलना बंद कर दिया था।

'सरकार से उम्मीद लेकिन गरीब को न्याय नहीं मिलता'

Can a father burnt alive to his children?

प्रश्न: बच्चों की याद आती है?
जितेंद्र: (रूआसे होते हुए): मेरा तो घर ही तबाह हो गया। सोता हूं तो वैभव और दिव्या का चेहरा सामने आ जाता है। मोबाइल में उनकी वीडियो क्लीपिंग है। अब उन्हें देखने की हिम्मत नहीं है।

प्रश्न: हरियाणा सरकार से क्या उम्मीद है?
जितेंद्र: मुख्यमंत्री जी से मैंने दोनों घटनाओं की सीबीआई जांच और पत्नी की प्लास्टिक सर्जरी की मांग की थी। उनसे उम्मीद तो बहुत है। लेकिन गरीब को न्याय मिल नहीं पाता। हमारे साथ पहले भी यही हुआ है।

प्रश्न: न्याय के लिए क्या करोगे?
जितेंद्र: मासूमों बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के लिए फांसी की मांग करूंगा। साथ मिला तो भी, नहीं मिला तो भी। अब जिंदगी भर लड़ाई लडूंगा। एक नवंबर को जंतर-मंतर पर होने वाले आंदोलन में भाग लूंगा। इजाजत मिली तो पैदल मार्च भी करूंगा।

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