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CAG Report : बैलेंस शीट बेहतर बनाने के लिए एयर इंडिया ने दिखाया कम घाटा

Sat, 11 Mar 2017 04:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली।
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली। Updated Sat, 11 Mar 2017 04:26 PM IST
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CAG Report: Air India showed low losses to improve balance sheet
दिल्ली सरकार पर सीएजी की लेखा ‌परीक्षा रिपोर्ट पर जानकारी देते अकाउंट जनरल सुनील के जयसवाल। - फोटो : अमर उजाला

सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया की बैलेंस शीट बेहतर दिखे, इसके लिए प्रबंधन ने लगातार तीन साल तक घाटे को कम करके दिखाया। इस दौरान 6,415 करोड़ रुपये का कम घाटा दिखाया गया।

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इसका खुलासा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षण (सीएजी) की नवीनतम रिपोर्ट में हुआ, जो शुक्रवार को संसद में पेश की गई। संसद में रिपोर्ट पेश होने के बाद डिप्टी सीएजी प्रदीप राव ने संवाददाताओं को बताया कि एयर इंडिया का जो फाइनेंशियल रिस्ट्रक्चरिंग प्लान बना था, उसके मुताबिक कंपनी को वर्ष 2012-13 तक पॉजिटिव ईबीआईटीडीए दिखाना था।
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अप्रैल से दिसंबर 2013 के दौरान कंपनी का 191 करोड़ रुपये का निगेटिव ईबीआईटीडीए था, जो अप्रैल से दिसंबर 2014 के दौरान 166 करोड़ रुपये का पॉजिटिव ईबीआईटीडीए हो गया।

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​लक्ष्य तक नहीं पहुंचा यूटिलाइजेशन ऑफ एयरक्राफ्ट

CAG Report: Air India showed low losses to improve balance sheet
cag - फोटो : अमर उजाला
​सीएजी की जांच में पाया गया कि बैलेंस शीट बेहतर करने के लिए कंपनी ने घाटे को घटा कर (अंडरस्टेटमेंट ऑफ लॉसेज) दिखाया। वर्ष 2012-13 में कंपनी ने 1,455.80 करोड़ रुपये कम घाटा दिखाया, जबकि 2013-14 में 2,966.66 करोड़ रुपये और 2014-15 में 1,992.77 करोड़ रुपये कम घाटा दिखाया।

इसे मिला दें तो तीन वर्ष में अंडरस्टेटमेंट ऑफ लॉसेज 6,415 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का बनता है। ऐसा इसलिए किया गया ताकि एयर इंडिया की बैलेंस शीट बेहतर दिखे।

सीएजी ने कहा है कि एयर इंडिया के टर्न अराउंड प्लान (टीएपी) में कहा गया था कि वह नैरो बॉडी एयरक्राफ्ट को हर रोज कम से कम 12.25 घंटे तक उड़ाए। तकनीकी भाषा में इसे यूटिलाइजेशन ऑफ एयरक्राफ्ट कहते हैं।

असल में कंपनी का 2014-15 में यूटिलाइजेशन 9.75-10.57 घंटे रहा, जबकि 2015-16 में 9.22-11.16 घंटे रहा। इसी तरह वाइड बॉडी वाले एयरक्राफ्ट के लिए लक्ष्य 13-15 घंटे था, लेकिन इसका यूटिलाइजेशन वर्ष 2014-15 में 2.04-12.94 घंटे और 2015-16 में 6.89-12.07 घंटे रहा। जांच में पाया गया कि कंपनी के अधिकतर विमान इसलिए नहीं उड़ पाए, क्योंकि इसके स्पेयर ही उपलब्ध नहीं थे।

 

सीसीईए के फैसले पर नहीं किया अमल

CAG Report: Air India showed low losses to improve balance sheet
दिल्ली सरकार पर सीएजी की लेखा ‌परीक्षा रिपोर्ट पर जानकारी देते अकाउंट जनरल सुनील के जयसवाल। - फोटो : अमर उजाला
सीएजी ने सरकार के फैसले को सही तरह से लागू नहीं करने के लिए भी एयर इंडिया प्रबंधन की खिंचाई की है। रिपोर्ट के मुताबिक, सीसीईए (आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति) में फैसला हुआ था कि एयर इंडिया में प्रोडक्टिविटी लिंक्ड इंसेंटिव के भुगतान तब तक नहीं हों, जब तक कि कंपनी मुनाफे में नहीं आ जाती।

प्रबंधन ने इस निर्णय को धता बताते हुए एडहॉक पे के नाम पर कर्मचारियों को 734 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया, जो इंसेटिव के रूप में दी जाने वाली रकम का 75 फीसदी बनता है। यही नहीं, कंपनी को कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक अवकाश योजना लागू करने को कहा गया था, जिसे लागू ही नहीं किया गया।

बोइंग ने विमान में डाल दिया 10 टन ज्यादा वजन
एयर इंडिया के बी 787-800 विमान में बोइंग ने तय वजन से 10 टन ज्यादा वजन का साजो-सामान लगा दिया। इस वजह से विमान उड़ाने में ईंधन की खपत बढ़ गई। इससे हुए नुकसान की भरपाई के लिए कांट्रेक्ट में कोई प्रावधान नहीं था। सीएजी के मुताबिक, सिर्फ इसी वजह से एयर इंडिया को 40 करोड़ डॉलर का नुकसान हो रहा है। 
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