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Delhi NCR News: सोने के गहने खरीदना अब और भी महंगा, हॉलमार्किंग शुल्क 67% बढ़ा
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45 से बढ़कर 75 रुपये हुआ शुल्क, जीएसटी मिलाकर 88.50 रुपये प्रति आभूषण, हल्के गहनों पर ज्यादा असर
सनी सिंह
नई दिल्ली। सोना खरीदने वाले ग्राहकों के लिए कीमत बढ़ने के साथ अब हॉलमार्किंग का खर्च भी बढ़ गया है। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने सोने के आभूषण के हॉलमार्किंग शुल्क को 45 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये प्रति आभूषण कर दिया है। यानी बेस शुल्क में 30 रुपये और करीब 66.7 फीसदी की बढ़ोतरी। नई दर 14 सितंबर से लागू भी हो गई है। वहीं चांदी की हॉलमार्किंग फीस 35 रुपये प्रति आभूषण पर बरकरार है।
खास बात यह है कि 75 रुपये ही अंतिम शुल्क नहीं है। बीआईएस के नियमों के मुताबिक हॉलमार्किंग फीस के ऊपर लागू टैक्स अलग से लिया जाता है। बीआईएस की उपभोक्ता जागरूकता सामग्री में हॉलमार्किंग शुल्क पर 18 फीसदी जीएसटी का उल्लेख किया गया है। ऐसे में 75 रुपये की फीस पर 18 फीसदी जीएसटी जोड़ने पर रकम 88.50 रुपये प्रति आभूषण बैठती है।
सरकार कितने टैक्स और चार्ज लगाएगी
कूचा महाजनी, चांदनी चौक स्थित ऑल बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश सिंघल बताते हैं कि हॉलमार्क चार्ज या अन्य किसी भी प्रकार का चार्ज और टैक्स आखिरकार ग्राहक से ही वसूला जाता है और संबंधित सरकारी विभाग को जमा कराया जाता है। वह कहते हैं, सरकार एक तरफ पहले से कई तरह के टैक्स और शुल्क लगा रही है, दूसरी तरफ हॉलमार्किंग का खर्च भी बढ़ रहा है। हर बढ़ता खर्च किसी न किसी रूप में ग्राहक की जेब तक पहुंचता है।
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100 आर्टिकल पर 3,000 रुपये ज्यादा बेस खर्च
योगेश सिंघल के मुताबिक किसी ज्वेलर को 100 सोने के आर्टिकल (गहने) हॉलमार्क कराने हों तो पहले 45 रुपये के हिसाब से 4,500 रुपये शुल्क लगता था। अब यही शुल्क 7,500 रुपये होगा। यानी 100 आर्टिकल पर 3,000 रुपये अतिरिक्त बेस शुल्क। उसके बाद 18 फीसदी जीएसटी को जोड़ें तो पुरानी फीस 5,310 रुपये और नई फीस 8,850 रुपये बैठती है। अंतर 3,540 रुपये है।
हल्के गहनों पर ज्यादा असर
बीआईएस के अनुसार हॉलमार्किंग फीस वजन के आधार पर नहीं, बल्कि प्रति आर्टिकल ली जाती है। यानी आभूषण एक ग्राम का हो या ज्यादा वजन का, हॉलमार्किंग शुल्क का आधार आर्टिकल है। इसका मतलब है कि कम वजन के आभूषण में हॉलमार्किंग शुल्क प्रति ग्राम के हिसाब से अपेक्षाकृत ज्यादा पड़ सकता है। त्योहारी सीजन में कम वजन की अंगूठी, नोज पिन, चेन या अन्य हल्के आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों के लिए यह लागत ज्यादा पड़ेगी।
हॉलमार्क अनिवार्य होने के बाद दायरा भी बढ़ा
अनिवार्य हॉलमार्किंग की शुरुआत जून 2021 में 256 जिलों से हुई थी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इसका दायरा बढ़ता गया। मार्च 2026 में छठे चरण के तहत सात और जिले जोड़े गए और अनिवार्य हॉलमार्किंग के दायरे वाले जिलों की संख्या 380 हो गई। यानी हॉलमार्किंग व्यवस्था का दायरा लगातार बढ़ा है और अब इसके प्रति आर्टिकल शुल्क में भी बड़ा इजाफा हुआ है।
2022 में 45 रुपये, अब 75 रुपये
बीआईएस के 2022 के संशोधन में सोने की हॉलमार्किंग फीस 45 रुपये प्रति आर्टिकल तय की गई थी। न्यूनतम कंसाइनमेंट फीस 200 रुपये थी और इसके ऊपर लागू टैक्स अलग से लेने का प्रावधान था। अब 2026 के संशोधन में यही फीस बढ़ाकर 75 रुपये कर दी गई है। चार साल में प्रति आभूषण 30 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
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सनी सिंह
नई दिल्ली। सोना खरीदने वाले ग्राहकों के लिए कीमत बढ़ने के साथ अब हॉलमार्किंग का खर्च भी बढ़ गया है। भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने सोने के आभूषण के हॉलमार्किंग शुल्क को 45 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये प्रति आभूषण कर दिया है। यानी बेस शुल्क में 30 रुपये और करीब 66.7 फीसदी की बढ़ोतरी। नई दर 14 सितंबर से लागू भी हो गई है। वहीं चांदी की हॉलमार्किंग फीस 35 रुपये प्रति आभूषण पर बरकरार है।
खास बात यह है कि 75 रुपये ही अंतिम शुल्क नहीं है। बीआईएस के नियमों के मुताबिक हॉलमार्किंग फीस के ऊपर लागू टैक्स अलग से लिया जाता है। बीआईएस की उपभोक्ता जागरूकता सामग्री में हॉलमार्किंग शुल्क पर 18 फीसदी जीएसटी का उल्लेख किया गया है। ऐसे में 75 रुपये की फीस पर 18 फीसदी जीएसटी जोड़ने पर रकम 88.50 रुपये प्रति आभूषण बैठती है।
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सरकार कितने टैक्स और चार्ज लगाएगी
कूचा महाजनी, चांदनी चौक स्थित ऑल बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश सिंघल बताते हैं कि हॉलमार्क चार्ज या अन्य किसी भी प्रकार का चार्ज और टैक्स आखिरकार ग्राहक से ही वसूला जाता है और संबंधित सरकारी विभाग को जमा कराया जाता है। वह कहते हैं, सरकार एक तरफ पहले से कई तरह के टैक्स और शुल्क लगा रही है, दूसरी तरफ हॉलमार्किंग का खर्च भी बढ़ रहा है। हर बढ़ता खर्च किसी न किसी रूप में ग्राहक की जेब तक पहुंचता है।
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100 आर्टिकल पर 3,000 रुपये ज्यादा बेस खर्च
योगेश सिंघल के मुताबिक किसी ज्वेलर को 100 सोने के आर्टिकल (गहने) हॉलमार्क कराने हों तो पहले 45 रुपये के हिसाब से 4,500 रुपये शुल्क लगता था। अब यही शुल्क 7,500 रुपये होगा। यानी 100 आर्टिकल पर 3,000 रुपये अतिरिक्त बेस शुल्क। उसके बाद 18 फीसदी जीएसटी को जोड़ें तो पुरानी फीस 5,310 रुपये और नई फीस 8,850 रुपये बैठती है। अंतर 3,540 रुपये है।
हल्के गहनों पर ज्यादा असर
बीआईएस के अनुसार हॉलमार्किंग फीस वजन के आधार पर नहीं, बल्कि प्रति आर्टिकल ली जाती है। यानी आभूषण एक ग्राम का हो या ज्यादा वजन का, हॉलमार्किंग शुल्क का आधार आर्टिकल है। इसका मतलब है कि कम वजन के आभूषण में हॉलमार्किंग शुल्क प्रति ग्राम के हिसाब से अपेक्षाकृत ज्यादा पड़ सकता है। त्योहारी सीजन में कम वजन की अंगूठी, नोज पिन, चेन या अन्य हल्के आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों के लिए यह लागत ज्यादा पड़ेगी।
हॉलमार्क अनिवार्य होने के बाद दायरा भी बढ़ा
अनिवार्य हॉलमार्किंग की शुरुआत जून 2021 में 256 जिलों से हुई थी। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से इसका दायरा बढ़ता गया। मार्च 2026 में छठे चरण के तहत सात और जिले जोड़े गए और अनिवार्य हॉलमार्किंग के दायरे वाले जिलों की संख्या 380 हो गई। यानी हॉलमार्किंग व्यवस्था का दायरा लगातार बढ़ा है और अब इसके प्रति आर्टिकल शुल्क में भी बड़ा इजाफा हुआ है।
2022 में 45 रुपये, अब 75 रुपये
बीआईएस के 2022 के संशोधन में सोने की हॉलमार्किंग फीस 45 रुपये प्रति आर्टिकल तय की गई थी। न्यूनतम कंसाइनमेंट फीस 200 रुपये थी और इसके ऊपर लागू टैक्स अलग से लेने का प्रावधान था। अब 2026 के संशोधन में यही फीस बढ़ाकर 75 रुपये कर दी गई है। चार साल में प्रति आभूषण 30 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।