प्रॉपर्टी खरीद फरोख्त के कारोबार में आई भारी गिरावट
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राजधानी में प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त के कारोबार में जबरदस्त गिरावट आ गई है। इसका तीनों नगर निगम को भारी खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
क्योंकि उनको प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त के दौरान वसूली जाने वाली ट्रांसफर ड्यूटी से सबसे अधिक राजस्व प्राप्त होता है। मगर इस बार उनको गत वर्ष की तुलना में आधी राशि ही प्राप्त हुई है।
राजधानी में वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त का कारोबार पूरी तरह ठप सा हो गया है। इसकी पुष्टि तीनों नगर निगम के आयुक्तों ने हाल ही में बजट प्रस्ताव प्रस्तुत करने के दौरान की है। उन्होंने जमीन की खरीद फरोख्त के दौरान मिलने वाली ट्रांसफर ड्यूटी के मद में प्राप्त राशि नहीं आने के कारण लक्ष्य कम कर दिया है।
पिछले वर्ष सितंबर में सर्कल रेट में 20 प्रतिशत बढ़ोतरी होने के चलते इस वर्ष ट्रांसफर ड्यूटी के तौर पर उनको अधिक राशि प्राप्त होने का अनुमान था।
कैसे मिलती है ट्रांसफर ड्यूटी?
तीनों नगर निगम को वर्तमान वित्तीय वर्ष के दौरान 30 सितंबर तक करीब 311 करोड़ रुपये ट्रांसफर ड्यूटी के तौर पर मिले हैं, पूर्वी दिल्ली नगर निगम के खजाने में तो केवल 15 लाख रुपये ही ट्रांसफर ड्यूटी मद से मिले हैं।
उत्तरी दिल्ली नगर निगम को करीब 104 करोड़ रुपये और दक्षिण दिल्ली नगर निगम को 207 करोड़ रुपये ट्रांसफर ड्यूटी मद में आए। जबकि उन्होंने करीब 13 सौ करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद थी।
तीनों नगर निगम को ट्रांसफर ड्यूटी मिलने का ब्योरा
वर्ष ट्रांसफर ड्यूटी
2013-14 909 करोड़ रुपये
2014-15 1087 करोड़ रुपये
2015-16* 0311 करोड़ रुपये
(*1 अप्रैल से 30 सितंबर तक)
राजधानी में जमीन की खरीद फरोख्त के दौरान के दौरान ट्रांसफर ड्यूटी देने का प्रावधान है। यह मद में दिल्ली सरकार वसूली करती है, जिसमें से उसने आधी राशि तीनों नगर निगम को देनी होती है। पुरुषों के जमीन खरीदने पर छह प्रतिशत और महिलाओं के जमीन खरीदने की स्थिति में चार प्रतिशत ट्रांसफर ड्यूटी देनी पड़ती है।