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डॉक्टरों ने की मनोवैज्ञानिक शव परीक्षा की वकालत, शवों को ले जाने के लिए बनाया ग्रीन कॉरिडोर

Tue, 03 Jul 2018 11:22 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 03 Jul 2018 11:22 AM IST
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burari 11 deaths mystery- AIIMS Doctors advise for psychological postmortem examination

बुराड़ी के एक घर में मिले 11 शवों पर देश के सबसे बड़े चिकित्सकीय संस्थान ने भी आश्चर्य जताया है। संस्थान के चिकित्सकों का कहना है कि मृतकों का मनोवैज्ञानिक शव परीक्षा होनी चाहिए, ताकि यह घटना समाज को सीख दे सके।

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चिकित्सकों का कहना है कि जितना सुनने और देखने में यह मामला पेचीदा लग रहा है उतनी ही इसकी जांच भी कठिन होगी। चिकित्सकों का कहना है कि इस मिस्ट्री को मनोवैज्ञानिक शव परीक्षा के जरिए सुलझाने का प्रयास किया जा सकता है।
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इस प्रक्रिया के तहत चिकित्सकों की टीम न सिर्फ भाटिया के परिजनों बल्कि पड़ोसियों से पूछताछ कर व्यावहारिक तौर पर एक अनुमान तक पहुंच सकती है। साथ ही घर में मौजूद किताबों और वहां मौजूद वस्तुओं की समीक्षा की जा सकती है।
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चूंकि इस पूरे मामले को तंत्रमंत्र से जोड़कर देखा जा रहा है। साथ ही पुलिस को भी घर से संदिग्ध रजिस्टर मिला है, जिसमें तंत्रमंत्र से जुड़ी बातें लिखीं हैं। एक चिकित्सक ने बताया कि कई बार लोग अंधविश्वास पर इतना भरोसा कर लेते हैं कि उन्हें सही गलत का भान नही रहता।

हालांकि, बुराड़ी के मामले को सामान्य नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। एम्स के डॉक्टरों का यह भी कहना है कि पुलिस के सामने इस थ्योरी के अलावा कुछ और नहीं है। इसलिए फिलहाल इस घटना को आत्महत्या से ही जोड़कर देखा जा सकता है।

मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज से निगम घाट तक रहा पुलिस का पहरा      

burari 11 deaths mystery- AIIMS Doctors advise for psychological postmortem examination

सोमवार शाम बुराड़ी के घर मिले 11 शवों को पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार के लिए निगम बोध घाट तक पहुंचाने के लिए दिल्ली पुलिस ने बाकायदा ग्रीन कॉरिडोर बनाया। करीब 6.7 किलोमीटर लंबे इस ग्रीन कॉरिडोर की मदद से पुलिस ने महज 12 मिनट के भीतर शवों को निगम बोध घाट तक पहुंचाया।

 

सोमवार शाम करीब 4.52 बजे दिल्ली पुलिस की दो गाड़ियां 11 शव एंबुलेंस में लेकर मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज के पोस्टमार्टम हाउस से रवाना हुईं। कोटला रोड से दिल्ली गेट होते हुए राजघाट रिंगरोड के रास्ते सभी 13 वाहन निगम बोध घाट तक शाम पांच बजकर 04 मिनट पर पहुंचे।

 

हालांकि पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि नहीं की, लेकिन बताया जा रहा है कि पुलिस भी जल्द से जल्द शवों को अंतिम संस्कार के लिए घाट तक पहुंचाना चाहती थी। जानकारी के अनुसार ग्रीन कॉरिडोर अक्सर दिल्ली ट्रैफिक पुलिस अंग प्रत्यारोपण के लिए इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे से संबंधित अस्पताल तक बनाती है।

 

चूंकि अंग प्रत्यारोपण के लिए समय तय रहता है। इसलिए इसका नाम ग्रीन कॉरिडोर रखा गया। हालांकि अभी तक शवों को घाट तक ले जाने के लिए कभी इस तरह का कॉरिडोर नहीं बनाया, जिसके बारे में जानकारी लेने के लिए जब ट्रैफिक पुलिस से बात की गई तो गोलमोल जवाब देकर संबंधित थाना पुलिस से जानकारी लेने का हवाला देती रही।
 

लेकिन पोस्टमार्टम हाऊस से निकलने और निगम बोध घाट तक पहुंचने के समय ने इसका खुलासा कर दिया, जबकि आमतौर पर मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज से निगम बोध घाट तक की दूरी तय करने में 20 मिनट से ज्यादा का वक्त लगता है।

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