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सिर के आर-पार निकली गोली फिर भी डॉक्टर्स ने बचाई जान

Thu, 26 Mar 2015 03:43 PM IST
Updated Thu, 26 Mar 2015 03:43 PM IST
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Bullet crosses the head, doctors saves life

श्रीमद्भागवत कथा वाचन के दौरान श्रीकृष्ण का जन्म होने की बात जैसे ही वाचक ने कही। किसी ने गोली चला दी। गोली वाचक के सिर के आर-पार निकल गई।

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गोली लगने से मरीज के सिर में हड्डी के कई टुकड़े फंसे रह गए। दिल्ली के निजी अस्पताल के डॉक्टरों ने सफल सर्जरी कर मरीज को नई जिंदगी दी है। मरीज के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है।
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अपोलो अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग के सीनियर कंसलटेंट डॉ. प्रणव कुमार ने बताया कि मरीज का जख्म सुपीरियर सैगिटल साइनस में था जो मस्तिष्क का मुख्य ड्रेनेज चैनल होता है। इसकी वजह से काफी खून बह गया था।

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सिर की हड्डी के कई टूकड़े मस्तिष्क में फंस गए थे

Bullet crosses the head, doctors saves life

यही नहीं मस्तिष्क में डीप्रेस्ड फ्रैक्चर की वजह से हड्डी के कई टुकड़े होकर मस्तिष्क में रह गए थे। न्यूरोसर्जरी काफी मुश्किल होती है, इस मामले में और भी ज्यादा थी क्योंकि मस्तिष्क का बीच का हिस्सा पूरी तरह से डैमेज हो गया था।

डॉ. कुमार ने बताया कि मस्तिष्क की खून की नसें जो हृदय तक तक पहुंचती है, क्षतिग्रस्त हो गए था। लिहाजा मस्तिष्क को काट करके नसों की मरम्मत की गई और हड्डी के टुकड़ों को बाहर निकाला गया। सर्जरी और सर्जरी के बाद मरीज को चार यूनिट खून चढ़ाया गया।

मरीज को अगले दो वर्ष तक काफी सावधानी बरतनी होगी और उसे बोलने में भी दिक्कत होगी। डॉ. कुमार ने बताया कि मरीज को दो वर्ष तक वाहन चलाने, अकेले रहने, शराब और धूम्रपान करने, भारी मशीन से दूर रहने की सलाह दी गई है।

दाएं ओर से होती हुई बाएं ओर से निकल गई थी गोली

Bullet crosses the head, doctors saves life

उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात स्थित हसनपुर गांव में रहने वाले हाकीम सिंह के श्रीमद्भागवत कथा का वाचन करते हैं। इसी साल जनवरी में झांसी में कथा वाचन के दौरान खुशी में गोली चली जो उनके सिर के दाएं हिस्से से होते हुए बाएं हिस्से ने निकल गई थी।

इसके बाद उन्हें जिला अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया, इसके बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए दिल्ली लाया गया। पीड़ित के पुत्र अभय प्रताप सिंह ने कहा कि इलाज पर करीब 15 लाख रुपये खर्च हुए हैं। करीब दो बीघा जमीन गिरवी रखी गई और रिश्तेदारों से पैसा उधार लेकर इलाज कराया गया।

ट्रॉमा सेंटर ने भर्ती से किया था इनकार
पीड़ित के पुत्र शिवम ने बताया कि पहले एम्स ट्रॉमा सेंटर इलाज के लिए ले जाया गया, लेकिन वहां के डॉक्टरों ने कहा कि बिस्तर खाली नहीं है लिहाजा दूसरे अस्पताल ले जाएं। इसके बाद एंबुलेंस वाले ने 11 जनवरी को अपोलो पहुंचा दिया।

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