बड़े बिल्डर्स पर गिर सकती है गाज, NGT ने मांगी आदेश का उल्लंघन करने वालों की सूची
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दिल्ली और नोएडा में 10 हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में निर्माण करने वाले बिल्डर्स और डेवलपर के खिलाफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) की सख्ती कायम है।
एनजीटी ने दिल्ली के सभी निगमों, नोएडा विकास प्राधिकरण, दिल्ली विकास प्राधिकरण और अन्य संबंधित प्राधिकरणों को निर्देश दिया है कि वे अब तक आदेश का उल्लंघन करने वाले बड़े बिल्डर्स की सूची ट्रिब्युनल के समक्ष पेश करें। मामले की अगली सुनवाई 18 जुलाई को होगी।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने वर्धमान कौशिक मामले की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया है। पीठ ने सभी प्राधिकरणों से हलफनामा दाखिल कर धूल या अन्य वायु प्रदूषण फैलाने वालों के बारे में विस्तृत जानकारी देने को कहा है।
शीर्ष अधिकारियों को भी किया गया है तलब
पीठ ने कहा कि हलफनामे में यह जानकारी भी दी जाए कि दोषी पाए जाने वाले किस बिल्डर ने जुर्माना दिया है और किसने नहीं। पीठ ने कहा कि छोटे बिल्डर के बजाए 10 हजार वर्ग मीटर से ज्यादा क्षेत्र में निर्माण करने वाले बिल्डर्स पर प्राधिकरण ज्यादा ध्यान केंद्रित करें और एक हफ्ते में जवाब दाखिल करें।
एनजीटी ने मामले से जुड़े प्राधिकरणों के सभी शीर्ष अधिकारियों को भी तलब किया है। अगली सुनवाई में सभी अधिकारी ट्रिब्युनल के समक्ष पेश हों। वहीं मामले में पीठ ने स्वामी नगर स्कूल सोसाइटी पर 15 हजार रुपये का पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी लगाया है।
पीठ ने सख्ती से कहा कि एक हफ्ते के अंदर यह राशि संबंधित निगम वसूले। यदि पर्यावरण क्षतिपूर्ति की राशि समय से नहीं जमा होती है तो संबंधित निगम इसकी जानकारी ट्रिब्युनल को दें।