सस्ते मकानों का ऑफर दे रहे हैं बिल्डर तो इसे जरूर पढ़ें, फायदा होगा
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आजकल सस्ते मकानों की झड़ी लगा रहे बिल्डरों की बात पर भरोसा करने से पहले अपनी निवेश पूंजी के बारे में भी सोचें मगर इससे इतर कुछ और महत्वपूर्ण बाते हैं जो आपको फायदा देंगी, इसके लिए इसे जरूर पढ़ें...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से जैसे ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2022 तक सबको सस्ता घर देने की बात कही गई। बिल्डरों ने सस्ते मकान के आकर्षक ऑफरों की झड़ी लगा दी। एक से एक ऑफर दिए जा रहे हैं।
दस लाख में वन बीएचके, 15 लाख में टू बीएचके और 20 लाख रुपये तक में थ्री बीएचके फ्लैट ऑफर किए जा रहे हैं, लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो इन प्रोजेक्टों में पैसा निवेश करने से पहले एक बार जरूर जांच और परख लेना चाहिए।
फूंक-फूंक कर कदम रखना पड़ रहा है
नेफोमा के चेयरमैन अन्नू खान का कहना है कि सस्ते मकान का ऑफर खराब नहीं है, लेकिन नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बिल्डर प्रोजेक्टों में लोगों का इतना पैसा फंस चुका है कि अब फूंक-फूंक कर कदम रखना पड़ रहा है।
अगर कोई बिल्डर ऐसी किसी योजना के तहत सस्ते मकान का ऑफर दे रहा है तो उसमें पैसा लगाने से पहले यह जांच लें कि वह जिस जमीन पर फ्लैट देने की बात कह रहा है वह जमीन प्राधिकरण की है या नहीं या उस जमीन पर फ्लैट बनाने का अप्रूवल प्राधिकरण से मिल चुका है या नहीं।
जमीन के अप्रुवल की जांच जरूर करें
यही नहीं इसके बदले में बिल्डर की ओर से प्राधिकरण को पैसे चुकाए गए या नहीं इसकी भी जांच कर लें।
इस बाबत नेफोवा के अध्यक्ष अभिषेक का कहना है कि अगर इस योजना के अंतर्गत रेडी टू मूव फ्लैट खरीदना है तो सबसे पहले यह देख लेना चाहिए कि पेपर पूरे हैं या नहीं। यही नहीं प्रोजेक्ट का कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिला है या नहीं।
सभी कमरों में फ्री वार्डरोब, फ्री आरओ और मोडयुलर किचन, अनुकूलित पेमेंट प्लान, फ्री होम लोन प्रोसेसिंग, पहला ट्रांसफर फीस फ्री, घर के बेस प्राइस के 5 फीसदी के बराबर सोना, पजेशन के समय एग्जिट ऑप्शन, कोई स्टांप ड्यूटी नही, फ्री कवर्ड कार पार्किंग, पजेशन के समय प्राइस की गारंटी, रेरा के नियमों के जुर्माने का प्रावधान, फ्री ट्रांसफर फीस, 2 साल तक फ्री मेंटेनेंस, पजेशन में देरी पर पेनाल्टी चार्ज, फ्री क्लब सदस्यता, एक केवीए तक फ्री पावर बैकअप।
कई बिल्डर दे रहे यह ऑफर्स
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत क्या नियम बनाए गए हैं। कहां-कहां इस पर निगरानी रखनी है। यह सब कुछ गाइडलाइंस देखने पर ही पता चल पाएगा। जिस पर चुनावी आचार संहिता खत्म होने के बाद ही कुछ हो सकेगा। यही वजह है कि इस बारे में प्रशासन की ओर से कुछ भी कहने से इंकार कर दिया गया।
डीएम की निगरानी में होगा सब कुछ
बीते दिनों नोएडा में एक बैठक में बिल्डरों के कई प्रोजेक्टों में बायर्स के फंसे होने के सवाल पर केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा था कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के सब्सिडी या लाभ का पैसा डीएम के माध्यम से मिलेगा।
क्या कहते हैं बिल्डर
बैंकों की ब्याज दरों में कटौती का लाभ अफोर्डेबल हाउसिंग के साथ ही अन्य सेगमेंट को भी मिल रहा है। साथ ही, डेवलपर्स लक्जरी सेगमेंट में ऑफर्स के जरिये खरीदारों को राहत दे रहें हैं।- विकास भसीन, साया ग्रुप के एमडी
बैंकों की ब्याज दरों में कटौती करने के बाद से ही आम जनता के साथ अधिकतम क्षेत्रों को लाभ मिला है जिससे न केवल खरीदारों को फायदा मिल रहा है। साथ ही, डेवलपर्स के लिए भी यह अच्छा समय है।- धीरज जैन, महागुन के डायरेक्टर
सस्ते मकानों का हमारा प्रोजेक्ट लोगों के सपने को साकार करेगा। हमारी कोशिश होगी कि सस्ते मकानों के प्रोजेक्ट में कम पैसों में बायर्स को ज्यादा से ज्यादा सुविधा मिल सके।- मुनीष मिश्रा, वेव सिटी के सेल्स हेड
ये बातें सुरक्षित रखेगी आपके निवेश की मनी को
- प्रोजेक्ट को डेवलपर बना रहा है या उसने किसी अन्य को-डेवलपर को काम दे रखा है।
- डेवलपर और प्राधिकरण का एस्क्रो अकाउंट खुला है या नहीं।
- प्राधिकरण के साथ अनुबंध हुआ है या नहीं।
- प्रोजेक्ट में रेरा का पालन हो रहा है या नहीं।
- जिस प्रोजेक्ट का प्रचार किया जा रहा है उसका विवरण प्राधिकरण के वेबसाइट पर दिया गया है या नहीं।
- बिल्डर की इमेज क्या है।
- जिस जमीन पर प्रोजेक्ट तैयार होगा उस जमीन पर बैंक का कितना कर्ज है।
- बिल्डर के 2 या 3 बीएचके के दावे सही है या नहीं।
- कहीं 2 बीएचके के नाम पर केवल दो रूम तो नहीं दे रहे हैं।
- कहीं कम एरिया का फ्लैट तो नहीं दे रहे हैं।
- कहीं बुकिंग के बाद भविष्य में कुछ और अमाउंट की मांग तो नहीं होगी।