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Budget : जेटली का बजट देगा 'मेक इन इंडिया' को बढ़ावा, इन बड़ी कंपनियों को मिली राहत

Fri, 02 Feb 2018 09:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Fri, 02 Feb 2018 09:56 AM IST
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budget: will help 'make in india' to grow in the country
प्रतीकात्मक तस्वीर

कृषि और लघु उद्योग सेक्टर के लिए सरकार के इस बजट में खास प्राथमिकता रही है। 50 करोड़ टर्न ओवर को बढ़ाकर 250 करोड़ तक टर्नओवर वाले उद्योगों को अब 25 फीसदी टैक्स देना होगा।

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सरकार का यह फैसला मेक इन इंडिया को बढ़ावा देगा। उद्यमियों का मानना है कि मोदी सरकार की यह एक अच्छी शुरुआत है। फरीदाबाद लघु एवं माध्यम उद्योगों का गढ़ माना जाता है।

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turnover

लखानी, एस्कोर्ट्स, जेसीबी, यामाहा जैसी नामचीन बड़ी कंपनियों के साथ ही यहां 25 हजार से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं। ऐसी इकाइयों की संख्या भी काफी है, जिनका टर्नओवर एक साल में 100 से 250 करोड़ तक है। इन औद्योगिक इकाइयों को बजट में राहत दी गई है।


फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री के लिए 100 फीसदी छूट से खाद्य संस्करण उद्योग क्षेत्र में ज्यादा निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। 

"बजट बहुत ही अच्छा है। सरकार ने छोटे उद्योगों का पूरा ध्यान रखा है। इस बजट से एमएसएमई को निश्चित तौर पर बढ़ावा मिलेगा। हमें भी अपनी सोच बदलनी होगी कि जब तक देश सुखी नहीं होगा, तब तक उद्योग धंधों की हालत भी नहीं सुधरेगी।" - श्रीराम अग्रवाल, अध्यक्ष न्यू डीएलएफ औद्योगिक क्षेत्र

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budget

"पहले 50 करोड़ तक टर्नओवर वाली कंपनियों को 25 फीसदी टैक्स देना पड़ता था। इससे ऊपर टर्नओवर वाली कंपनियों को 30 फीसदी टैक्स चुकाना पड़ता था। बजट के अनुसार, अब 250 करोड़ सालाना टर्नओवर वाली इकाइयों को 25 फीसदी टैक्स ही देना होगा। यह अच्छी शुरुआत है।" - विवेक सूद, उद्यमी

"मोदी सरकार का यह बहुत ही अच्छा बजट है। इसे अगर अंक दिए जाएं तो मैं दस में से आठ अंक दूंगा। स्मॉल सेक्टर के लिए यह बजट संजीवनी का काम करने वाला है। बजट के दूरगामी परिणाम अब देखने को मिलेंगे। नए उद्योग शुरू होंगे और लोगों को रोजगार मिलेंगे।" - संजीव खेमका, अध्यक्ष एफआईए

"औद्योगिक क्षेत्र के लिए बजट कोई खास नहीं रहा है। जो हम चाह रहे थे, वह हमें नहीं मिला। इंडस्ट्रीज के लिए गैस-डीजल की आवश्यकता होती है। इन्हें जीएसटी के दायरे में लाना चाहिए था, मगर ऐसा नहीं हो सका। उद्योगों के हालात पुराने जैसे ही रहने वाले हैं।"
- एमपी रुंगटा, अध्यक्ष लघु उद्योग भारती

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