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Delhi : हवा साफ करने के लिए 1644 करोड़ रुपये का बजट नहीं हुआ खर्च, एनजीटी ने जताई चिंता
Mon, 26 Feb 2024 06:41 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अतुल भारद्वाज, नई दिल्ली
अतुल भारद्वाज, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 26 Feb 2024 06:41 AM IST
सार
अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने बजट की रिपोर्ट देने का आदेश किया है। इसमें कहां कितना खर्च किया की जानकारी मांगी गई है। एनजीटी का कहना है कि यूपी, बिहार, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, पंजाब सहित नौ राज्यों की रिपोर्ट में यह साफ दिख रहा है कि बजट का इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
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विस्तार
दिल्ली-एनसीआर सहित देश के सबसे प्रदूषित 53 शहरों में हवा की सेहत ठीक करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से 1644.40 करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया था, लेकिन राज्य सरकारों ने इसका इस्तेमाल नहीं किया। अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने बजट की रिपोर्ट देने का आदेश किया है। इसमें कहां कितना खर्च किया की जानकारी मांगी गई है। एनजीटी का कहना है कि यूपी, बिहार, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, पंजाब सहित नौ राज्यों की रिपोर्ट में यह साफ दिख रहा है कि बजट का इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
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एनजीटी के चेयरमैन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव, सदस्य सुधीर अग्रवाल, डॉ. ए सेंथिल वेल के आदेश के मुताबिक 53 में 19 शहर ऐसे हैं जो नॉन अटेंटमेंट सिटी में शामिल हैं। नॉन अटेंटमेंट सिटी उन शहरों को कहा जाता है जहां पांच साल से अधिक समय से हवा प्रदूषित बनी हुई है। एनजीटी का कहना है कि हवा में प्रदूषण कम करने के लिए केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को यह सुनिश्चित करना होगा कि आवंटित बजट का इस्तेमाल हो और जरूरी संसाधन विकसित किए जाएं।
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इसके लिए राज्य सरकारें बहुत ज्यादा जरूरी बजट के लिए निर्भर न रहें। इसे अपने खुद के स्राेत से राज्य सरकार या संबंधित शहर कराएं। एनजीटी ने कहा कि बजट खर्च के अलावा सभी 53 शहर यह भी बताएं कि उनके यहां प्रदूषण को सबसे बड़ा स्रोत क्या है और इसे कम करने के लिए क्या कार्रवाई की गई। इसे भी रिपोर्ट में शामिल करना होगा। तीन मई को इस मामले में अब एनजीटी सुनवाई करेगा। इससे एक सप्ताह पहले बजट खर्च पर अपनी रिपोर्ट सभी राज्य सरकारों को देनी है।
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जताई चिंता
वायु प्रदूषण से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम और 15वें वित्त आयोग में राज्य सरकारों को बजट दिया हुआ है। इस बजट का उपयोग स्थानीय स्तर पर नहीं किया जा रहा है। एनजीटी ने इसे लेकर पांच दिसंबर, 23 को चिंता जताई थी। इसके बाद नौ राज्यों की सरकारों ने अपनी रिपोर्ट दी जिसमें उन्हें मिले पूरे फंड का उपयोग नहीं होने की हकीकत सामने आई है।