राजनीती के मद्देनजर बनाया गया है Budget, GST से हुए डैमेज को करेगा ऐसे कंट्रोल
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वित्त मंत्री अरुण जेटली की बजट से देश को तत्काल कोई फायदा नहीं होने वाला है। जीएसटी के बाद डैमेज कंट्रोल से अधिक यह बजट नहीं है। पूरी तरह से राजनीति को ध्यान में रखते हुए बजट तैयार किया गया है।
भले ही सरकार अपनी पीठ थपथपा रही हो, लेकिन आम लोगों खासकर मध्यम तबके को इससे अधिक फायदा नहीं होना है। सरकार ने पिछले तीन साल में व्यक्तिगत आयकर दरों में कई सकारात्मक बदलाव किए हैं। इससे उम्मीद थी कि इस बार भी सरकार कुछ देगी।
मगर, वेतनभोगी कर्मचारियों को टैक्स दरों में कोई राहत नहीं दी गई। ट्रांसपोर्ट और मेडिकल खर्चों के रिअम्बर्समेंट के तहत 40 हजार रुपये के स्टैंडर्ड डिडक्शन के अभी तक ट्रांसपोर्ट की मद में मिलने वाले 19200 रुपये और मेडिकल खर्च के 15000 रुपये की सहूलियत को खत्म कर दिया गया।
असंगठित क्षेत्र के लोग बहुत अधिक बेरोजगार हुए है
5800 रुपये पर लगने वाले टैक्स का केवल फायदा हुआ। अगर आप 5 प्रतिशत के आयकर के दायरे में आते हैं तो इस कदम से 290 रुपये बचेगा। 10 फीसदी दायरे वाले को 1160 रुपये और 30 फीसदी वाले का 1740 रुपये बचा सकेंगे।
बजट को ध्यान से देंखे तो लगता है असंगठित क्षेत्र के लोग बहुत अधिक बेरोजगार हुए है। इस बजट के जरिये अर्थव्यवस्था के नकारात्मक असर को कम करने की कोशिश की गई है।
असंगठित क्षेत्र में बेरोजगारी बढने के कारण कृषि और ग्रामीण क्षेत्र पर इस बजट में अधिक फोकस किया गया है। ताकि जो बेरोजगार हुए है, उसे कुछ रोजगार मिल सके।
स्वास्थ्य स्कीम सभी गरीब और असंगठित क्षेत्र को ध्यान में रखकर बनाया गया है। मध्यम तबके के नाम पर बजट दिया जा रहा है, लेकिन इस बजट में कुछ नहीं है। (इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरी ऑफ इंडिया के गुरुग्राम चैप्टर के अध्यक्ष विनय शुक्ला से बातचीत पर आधारित)