बसपा की चाल से विरोधी चित्त, बदलनी होगी रणनीति
नोएडा विधानसभा से बसपा के ब्राह्मण प्रत्याशी देवेंद्र शर्मा की घोषणा से अब दूसरे दलों के लिए ब्राह्मण प्रत्याशी उतारने का रास्ता बंद हो गया है।
वोट न बंटे इसके लिए अन्य दलों को अब दूसरी जाति का प्रत्याशी उतारने के लिए अपनी रणनीति बदलनी होगी। बसपा ने जिले की तीनों विधानसभाओं के प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं जबकि दूसरी पार्टियां प्रत्याशी चयन प्रक्रिया में उलझी हुई हैं।
दरअसल, नोएडा में ब्राह्मण, वैश्य या ठाकुर प्रत्याशी जातिगत आंकड़ों के हिसाब से फिट माने जाते हैं। गौतमबुद्धनगर से बसपा का सबसे नजदीकी नाता है। इसके पीछे दो कारण हैं।
पहला यह है कि पार्टी मुखिया मायावती जिले के बादलपुर की रहने वाली हैं। दूसरा, नया जिला बनाने का काम बसपा ने ही किया था। इन दोनों बातों का लाभ बसपा को शुरू से ही मिलता आ रहा है।
क्या कहता है जाति का समीकरण?
गौतमबुद्ध नगर लोकसभा के लिए पहले सांसद सुरेंद्र सिंह बसपा से ही बने थे। ग्रामीण क्षेत्र में अभी भी बसपा का सिक्का चलता है। 2012 के विधानसभा चुनावों में दादरी से बसपा के सत्यवीर गुर्जर के सामने भाजपा के नवाब सिंह नागर, कांग्रेस के समीर भाटी, सपा के राजकुमार भाटी टिक नहीं पाए थे।
इसी तरह जेवर से बसपा के वेदराम भाटी से कांग्रेस के धीरेंद्र सिंह, भाजपा के सुंदर सिंह राणा व सपा से बिजेंद्र भाटी पीछे रहे।
दादरी गुर्जर बाहुल्य होने के कारण सभी दल गुर्जर प्रत्याशी उतारते हैं जबकि जेवर में गुर्जर और ठाकुर प्रत्याशी मैदान में रहते हैं। दोनों जीते हुए एमएलए बसपा ने 2017 के लिए प्रत्याशी भी घोषित कर दिए हैं।