बसपा और सपा नेता ने की कारोबारी की हत्या
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ग्रेटर नोएडा में दनकौर कोतवाली क्षेत्र के जुनैदपुर गांव निवासी एक कपड़ा कारोबारी की कुछ लोगों ने हत्या कर दी। हत्या के विरोध में परिजनों और ग्रामीणों ने खरेली मोड़ तिराहे पर शव रखकर करीब साढे़ तीन घंटे तक जाम लगाए रखा। पुलिस अफसरों ने काफी मशक्कत के बाद ग्रामीणों को शांत किया और चार लोगों को नामजद करते हुए नौ लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया। इनमें एक बसपा और दूसरा सपा नेता है। परिजनों का आरोप है कि युवक को जहर देकर तथा गला दबाकर हत्या की गई है।
जानकारी के मुताबिक, दनकौर कोतवाली क्षेत्र के जुनैदपुर गांव निवासी शील कुमार (40) पुत्र इंद्रकुमार की बिलासपुर में मार्केट हैं और वहीं पर कपड़ा का भी कारोबार है। रोज की तरह वे शुक्रवार शाम करीब आठ बजे अपनी कार से घर के लिए मार्केट से चले थे, लेकिन वह रात में घर नहीं पहुंचे।
परिजनों को चिंता हुई तो आसपास क्षेत्र में तलाश किया गया लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली। शनिवार सुबह अमरपुर गांव के लोग जब टहलने के लिए निकले तो उन्होंने गांव के जंगल में एक व्यक्ति का शव देखा और पुलिस को जानकारी दी। पुलिस मौके पर पहुंची और शव की पहचान जुनैदपुर गांव के शीलकुमार के रूप में हुई। जानकारी मिलते ही गांव के लोग वहां पहुंचे और हत्या के विरोध में सुबह 11 बजे खेरली नहर तिराहे पर जाम लगा दिया।
पुलिस अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाया कि उनकी मांग को पूरा किया जाएगा। इसके बाद ग्रामीणों ने पहले से दर्ज एक मामले की जांच कर रहे दारोगा को सस्पेंड करने की मांग की जिस पर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया। करीब साढे़ तीन घंटे बाद जाम खुला और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका। पीड़ित परिजनों की ओर से पुलिस ने जुनैदपुर गांव निवासी चरण सिंह, करतार सिंह, अंकित और जीतू समेत नौ लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। करतार बसपा सरकार में सहकारी समिति के चेयरमैन रह चुके हैं जबकि एक आरोपी सपा नेता है। परिजनों का आरोप है कि हत्यारोपियों ने शील को पहले तो जहरीला पाउडर खिलाया था और जब वह जिंदा रहा तो उसकी गला दबाकर हत्या कर दी थी।
सही जांच होती तो जीवित रहता शील
ग्रामीणों की मानें तो करीब तीन माह पहले शील के घर के पास प्राधिकरण द्वारा सड़क बनाई जा रही थी। जिसे बनाने को लेकर करतार के बेटे ने विरोध किया था और मारपीट तक हो गई थी। इसी मामले में करतार के बेटे ने दनकौर थाने में उनके परिवार पर जानलेवा हमले की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
उसी दिन शाम को चरण समेत करीब 20 लोगों ने शील के घर पर धावा बोला जिसमें दनकौर पुलिस ने जानलेवा हमले/307 के तहत एक और रिपोर्ट दर्ज की थी। लेकिन शील के परिजनों का आरोप है कि दनकौर पुलिस ने उन्हीं के लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था और चरण आदि को गिरफ्तार करना तो दूर उन पर आईपीसी की धारा-307 को ही हटा दिया था।
शील के परिजनों ने कहा कि करीब तीन माह पहले जो मामले दर्ज हुए थे और पुलिस उनको गंभीरता से लेकर जांच करती तो चरण और उसके परिवार के लोग दोषी पाए जाते।
इसमें उनकी गिरफ्तारी होती और जेल चले जाते तो उनका मनोबल नहीं बढ़ता, लेकिन पुलिस की द्वेषपूर्ण कार्रवाई के चलते उन सभी आरोपियों को पुलिस ने क्लीनचिट दे दी और उन पर वह मुकदमा आज तक चल रहा है। पीड़ितों का आरोप है कि अगर आरोपियों को सजा मिल जाती तो आज शील उनके बीच में होता।