केजरीवाल सरकार के PWD दफ्तर पर एसीबी की छापेमारी, केंद्र पर भड़के आप नेता
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भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने बुधवार को दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मुख्यालय में छापेमारी की। एसीबी ने यह कार्रवाई बीते सोमवार को बीजेपी विधायक ओम प्रकाश शर्मा और आरटीआई एक्टिविस्ट विवेक गर्ग की शिकायत पर की।
इसमें सवा छह किलोमीटर लंबे बीआरटी कॉरिडोर को तोड़ने में घोटाले का आरोप लगाया गया था। सूत्रों के अनुसार एसीबी की टीम ने पीडब्ल्यूडी की कुछ फाइलें भी जब्त की हैं।
छापेमारी की एसीबी के अधिकारियों ने पुष्टि की है। एसीबी अधिकारियों ने कहा कि शिकायत के आधार पर जांच को आगे बढ़ाने के लिए एक टीम पीडब्ल्यूडी कार्यालय से कुछ दस्तावेज लेने गई थी।
बीजेपी विधायक ने कॉरिडोर तोड़ने के खर्च पर उठाया था सवाल
हालांकि एसीबी अधिकारियों ने माना कि फिलहाल इस मामले में कोई एफआईआर अभी तक दर्ज नहीं हुई है। जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। बताते चलें कि बीते सोमवार को बीजेपी विधायक ने बीआरटी कॉरिडोर तोड़ने में सरकार की ओर से खर्च किए गए 11 करोड़ रुपये को लेकर सवाल उठाया था।
एसीबी में इसकी शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप है दिल्ली सरकार ने बीआरटी कॉरिडोर तोड़ने में ठेका पाने वाली कंपनी को फायदा पहुंचाया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि बीआरटी कॉरिडोर को तोड़ने के बाद वहां से 11 करोड़ से ज्यादा का स्टील और लोहे का कबाड़ निकला है।
सरकार ने उसे 11 करोड़ रुपये देने के साथ ठेका पाने वाली कंपनी को पूरा कबाड़ भी दे दिया, जबकि कंपनी को उल्टा सरकार को पैसे देना चाहिए था।
‘बिना एफआईआर जल्दबाजी क्यों’
बीआरटी कॉरिडोर तोड़ने को लेकर भाजपा विधायक की शिकायत पर लोक निर्माण विभाग दफ्तर में छापेमारी को लेकर आप सरकार के मंत्री और आप नेताओं ने हमला बोला है।
उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, जलमंत्री कपिल मिश्रा, विधायक सोमनाथ भारती और आप नेता संजय सिंह ने छापेमारी को सीधे तौर पर आप सरकार पर हमला बताया है।
उन्होंने सवाल खड़े किए हैं कि आखिर एक दिन पहले की शिकायत पर बिना एफआईआर के छापेमारी की जल्दबाजी क्यों? उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि हिम्मत है तो हम सबको जेल भेज दीजिए मोदी जी! फिर भी सच को रोक नहीं सकेंगे।
पीडब्ल्यूडी मंत्री सत्येंद्र ने कहा है कि अभी सिर्फ बीआरटी को तोड़ने का टेंडर हुआ है, जो 3.91 करोड़ का है जबकि ओपी शर्मा ने घोटाला 15 करोड़ रुपये का बताया है। आरोप है कि 10.98 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया जबकि अभी सिर्फ 3.1 करोड़ का भुगतान हुआ है।