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कोरोना काल में होम ट्यूशन पर लगा ब्रेक, बे-पटरी हुई शिक्षकों की जिंदगी
Sat, 19 Sep 2020 04:44 AM IST
दुष्यंत शर्मा
रश्मि शर्मा, नई दिल्ली
रश्मि शर्मा, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 19 Sep 2020 04:44 AM IST
सार
- संक्रमण के डर और आर्थिक तंगी के कारण बच्चों को ट्यूशन नहीं दिला रहे हैं अभिभावक
- मुखर्जी नगर समेत कई इलाकों में हजारों ट्यूटर बेरोजगार, घर चलाना भी हुआ मुश्किल
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सांकेतिक तस्वीर...
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मार्च से पहले तक मुखर्जी नगर में रहने वाली अपराजिता अपने घर में 10-12 बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर औसतन 30 से 35 हजार रुपये कमा लेती थीं। पति प्राइवेट नौकरी करते हैं। इसलिए ट्यूशन से अतिरिक्त कमाई कर घर खर्च आसानी से चल रहा था। जब से लॉकडाउन हुआ, तब से उनकी जिदंगी बदल गई। अभिभावकों ने बच्चों को ट्यूशन भेजना बंद कर दिया है। नतीजतन, कमाई शून्य हो गई।
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इसी तरह यूपी के गाजीपुर से मुखर्जी नगर में यूपीएससी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उपेंद्र नाथ पढ़ाई करने के साथ हफ्ते में आठ से 10 घंटे होम ट्यूशन भी कराते थे। इससे उन्हें महीने में 20 से 25 हजार रुपये मिल जाते थे। परिवार की माली हालत ठीक न होने के बावजूद पढ़ाई में पैसा बड़ी अड़चन नहीं बन सका था। लॉकडाउन में तो वह घर चले गए, लेकिन अनलॉक में वापस लौटने के बाद दोबारा ट्यूशन नहीं मिला। सवाल करने पर बड़ी मायूसी से उनका जवाब रहा कि अब तो बोरिया-बिस्तर बांधकर वापस लौटने की सोच रहा हूं।
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ये पीड़ा सिर्फ अपराजिता और उपेंद्र नाथ की ही नहीं, उन हजारों लोगों की है जिनकी जिंदगी का पहिया होम ट्यूशन के सहारे पटरी पर दौड़ रहा था। इसमें कॉलेज छात्रों से लेकर सेवानिवृत्त शिक्षक तक शामिल हैं। कोरोना काल से छिन्न-भिन्न हुए सामाजिक और आर्थिक हालात ने इन सबको बे-पटरी कर दिया है। अब वह अपने भविष्य पर नए सिरे से सोचने को मजबूर हैं। नाउम्मीदी इसलिए भी है, क्योंकि उन्हें यह भी नहीं पता है कि कोरोना का संकट अभी कितना लंबा खिंचने वाला है।
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अशोक विहार में रहने वाली उर्मिल डोगरा 40 साल से पढ़ा रही हैं। पहले दिल्ली के कई स्कूलों में पढ़ाती थीं। 70 वर्षीय उर्मिल बताती हैं कि मार्च के बाद से अभिभावक कोरोना के डर से बच्चों को ट्यूशन भेजने में कतरा रहे हैं। वरिष्ठ नागरिक होने के कारण वह भी बच्चों को बुलाने से परहेज कर रही हैं। वह प्रति छात्र औसतन दो से तीन हजार रुपये लेती थीं, लेकिन अब यह कमाई पूरी तरह से बंद हैं। ना केवल पैसे पर असर पड़ा है बल्कि दिनचर्या भी बिगड़ गई है।
बंद करने पड़ रहे ट्यूशन सेंटर
कोरोना के कारण बीते पांच माह से स्कूल बंद हैं। इसका बड़ा असर ट्यूशन व्यावसाय पर भी पड़ा है। मुखर्जी नगर, शक्ति नगर, अशोक विहार, लक्ष्मी नगर, आदर्श नगर, जहांगीरपुरी, शास्त्री नगर, सुभाष नगर समेत दिल्ली की तकरीबन हर कालोनी में छोटे-छोटे कोचिंग सेंटर चलते हैं। शक्ति नगर में एक कोचिंग सेंटर चलाने वाले संचालक कहते हैं कि 10 हजार रुपये पर एक कमरा किराए पर ले रखा है, जिसमें आठवीं से 12वीं तक के बच्चों को पढ़ाते थे, परंतु अब किराया सिर पर चढ़ गया और पता नहीं कब ट्यूशन का धंधा फिर से शुरू होगा। इसलिए कुछ समय के लिए उन्होंने इसे बंद कर दिया है।
छात्रों का नहीं चल रहा खर्च
डीयू से बीकॉम कर रहे पंकज कुमार अपना हाथ खर्च ट्यूशन से ही निकालते थे। वह एक माह में पांच से 10 हजार रुपये तक कमा लेते थे। लॉकडाउन के बाद से उन्हें अपना खर्च निकालना मुश्किल हो रहा है। उनके जैसे ही कई छात्र ट्यूशन पढ़ाकर ही कमाई करते हैं।
ये भी हैं वजह
मध्यम वर्गीय परिवारों के नौकरीपेशा लोगों के सामने कोरोना ही नहीं, आर्थिक वजह भी है। ज्यादातर लोगों की तनख्वाह आधी हो गई है तो किसी की नौकरी चली गई। पैसे नहीं होने के अभाव में भी वह बच्चों को ट्यूशन नहीं करा पा रहे हैं।