ब्रेन डेड युवक ने बचाई 4 लोगों की जिंदगी, 12 मिनट में दिल्ली से गुड़गांव पहुंचा धड़कता दिल
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ब्रेन डेड युवक के अंगों से चार लोगों को नई जिंदगी मिली। युवक का हृदय, दोनों किडनी और लिवर दूसरे मरीज में प्रत्यारोपित किए गए। इसके अलावा युवक की दोनों आंखों से भी किसी को रोशनी मिलेगी।
ब्रेन डेड मरीज मूल रूप से उत्तर प्रदेश के लखनऊ का रहने वाला था, जबकि वह वर्तमान में दिल्ली के छतरपुर में रहता था। दिल्ली के वसंतकुंज स्थित फोर्टिस अस्पताल से गुड़गांव के मेदांता अस्पताल में हृदय को लाया गया।
इस दौरान 20 किलोमीटर की दूरी महज 12 मिनट में तय कर एंबुलेंस गुड़गांव पहुंची। यहां एक व्यक्ति में हृदय प्रत्यारोपण किया गया। छतरपुर निवासी विनोद (45) को शनिवार तड़के ब्रेन डेड घोषित किया गया और इसकी सूचना नेशनल ऑर्गन टिश्यू और ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (नोटो) को दी गई।
इसके बाद प्रत्यारोपण कराने के लिए तैयार मरीजों और अस्पतालों की तलाश शुरू की गई। प्रत्यारोपण के लिए मरीज और अस्पताल की तलाश पूरी होने के बाद शनिवार सुबह साढ़े छह बजे दिल्ली के वसंत कुंज अस्पताल से हृदय लेकर प्रत्यारोपण के लिए गुड़गांव के मेदांता अस्पताल ले जाया गया।
हृदय कोलकाता के 49 वर्षीय एक पुरुष को प्रत्यारोपित किया गया। धड़कते हृदय को लेकर जब एंबुलेंस दौड़ी तो दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और गुड़गांव पुलिस की मदद से यातायात कुछ समय के लिए रोक दिया गया।
हृदय, दोनों किडनी और लिवर का प्रत्यारोपण
ब्रेन डेड युवक की एक किडनी का प्रत्यारोपण दिल्ली के ओखला स्थित फोर्टिस अस्पताल में दिल्ली के 45 वर्षीय पुरुष को जबकि दूसरी किडनी दिल्ली का प्रत्यारोपण सफदरजंग अस्पताल में एक महिला को किया गया।
किडनी प्रत्यारोपित करने वाले चिकित्सक डॉ.अनूप कुमार ने बताया कि सफदरजंग में पहली बार किसी ब्रेन डेड से निकाली गई किडनी को किसी मरीज में प्रत्यारोपित किया गया है।
दोनों कॉर्निया भी सफदरजंग में ही सुरक्षित रखे गए हैं। जबकि लिवर गुड़गांव के फोर्टिस अस्पताल में देहरादून के एक 45 वर्षीय व्यक्ति को प्रत्यारोपित किया गया। मालूम हो कि बुधवार को सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल विनोद को पुलिस ने फोर्टिज अस्पताल पहुंचाया था। हादसा फतेहपुर बेरी इलाके के पास हुआ था।
विनोद के सिर में गंभीर चोट लगी थी। चिकित्सकों ने विनोद के बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन जब सफलता नहीं मिली तो ब्रेन डेड घोषित करने की प्रक्रिया अपनाई और परिजनों को अंगदान के लिए मनाया।