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डिजिटल युग में भी किताबें हैं सच्ची दोस्त : रेखा गुप्ता
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मुख्यमंत्री ने दिल्ली पुस्तक मेले का किया उद्घाटन किया
भारत मंडपम में 6 से 10 अगस्त तक चलेगा, प्रवेश निःशुल्क
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
भारत मंडपम में 29वें दिल्ली पुस्तक मेले का आगाज हो गया है। बुधवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसका उद्घाटन किया और किताबों को जीवन की सच्ची दोस्त बताया। यह मेला 6 से 10 अगस्त तक चलेगा। प्रवेश निशुल्क है और मेला रोज सुबह 10 से शाम 7 बजे तक खुला रहेगा। इसमें किताबों के साथ स्टेशनरी और कॉर्पोरेट गिफ्ट मेला भी लगा है।
प्रगति मैदान के हॉल नंबर 12 और 12ए में फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स, इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन (आईटीपीओ) और दिल्ली सरकार के सहयोग से मेले का आयोजन जा रहा है। सीएम ने कहा कि डिजिटल युग में भी युवाओं का किताबों से लगाव कम नहीं हुआ जो भारत को विश्वगुरु बनाने की राह में बड़ा कदम है। किताबें निस्वार्थ दोस्त होती हैं, ये बिना शर्त साथ देती हैं। ये न सिर्फ ज्ञान देती हैं बल्कि हमें खुद से जोड़ती हैं। उन्होंने द अल्केमिस्ट की पंक्ति का जिक्र किया जिसमें लिखा है कि अगर आप कुछ शिद्दत से चाहें तो पूरी कायनात उसे पूरा करने में जुट जाती है। उन्होंने गोदान और परिणीता जैसी किताबों का उदाहरण देते हुए पाठकों से इनके पात्रों को अपने जावन में उतारने की अपील की।
अगले साल साहित्यिक महोत्सव होगा : कपिल मिश्रा
कला, संस्कृति और भाषा मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि दिल्ली सरकार ने कला और संस्कृति के लिए ऐतिहासिक बजट स्वीकृत किया है। अगले साल मेले को साहित्यिक महोत्सव के रूप में आयोजित किया जाएगा। आईटीपीओ चेयरमैन प्रदीप सिंह खरौला, एफआईपी अध्यक्ष नवीन गुप्ता भी उद्घाटन कार्यक्रम में मौजूद रहे।
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स्टेशनरी मेले में छात्रों के लिए अनगिनत सामग्री
मेले में कई प्रकाशक, लेखक, छात्र, शोधकर्ता और आम लोग शामिल हैं। किताबों के अलावा स्टेशनरी, शिक्षण सामग्री और कॉर्पोरेट गिफ्ट्स की प्रदर्शनी भी लगी है। छात्रों के लिए मेला बेहद महत्वपूर्ण है। मेले में स्टेशनरी की नई और अनगिनत सामग्री उपलब्ध है। इसमें सेमिनार, लेखक भेंट, पेंटिंग प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हो रहे हैं।
भाषा अकादमी और म्यूजियम ऑफ इल्यूजन भी आकर्षण
दिल्ली सरकार की पांच भाषा अकादमियों हिंदी, उर्दू, संस्कृत, पंजाबी और सिंधी का एकीकृत स्टॉल मेले में लगाया है। यहां पुराने साहित्य से लेकर आधुनिक किताबें आसानी से मिल रही हैं। सिंधी अकादमी में द सिंध स्टोरी, सिंधी कल्चर और शाह जो रसालो जैसी किताबें हैं, साथ ही युवाओं के लिए टेल्स ऑफ ओल्ड इंड जैसे अंग्रेजी अनुवाद भी उपलब्ध हैं। उर्दू अकादमी में दीवाने गालिब के हिंदी-उर्दू संस्करण, हिंदी अकादमी में मेट्रो, जिक्रे मीर, मैला आंचल और यशपाल: क्रांति से कलम तक जैसी किताबें हैं। मैथिली-भोजपुरी अकादमी में भोजपुरी लोकगीत, भिखारी ठाकुर और कैथी लिपि पर किताबें हैं, जबकि संस्कृत अकादमी में शंकरग्रंथावली, अथर्ववेदसंहिता और सामवेदसंहिता उपलब्ध हैं। किताबों के साथ म्यूजिक सीडी भी मौजूद हैं। मेले में म्यूजियम ऑफ इल्यूजन भी बनाया गया है, जो आगंतुकों के लिए खास आकर्षण है।
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भारत मंडपम में 6 से 10 अगस्त तक चलेगा, प्रवेश निःशुल्क
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
भारत मंडपम में 29वें दिल्ली पुस्तक मेले का आगाज हो गया है। बुधवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसका उद्घाटन किया और किताबों को जीवन की सच्ची दोस्त बताया। यह मेला 6 से 10 अगस्त तक चलेगा। प्रवेश निशुल्क है और मेला रोज सुबह 10 से शाम 7 बजे तक खुला रहेगा। इसमें किताबों के साथ स्टेशनरी और कॉर्पोरेट गिफ्ट मेला भी लगा है।
प्रगति मैदान के हॉल नंबर 12 और 12ए में फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स, इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन (आईटीपीओ) और दिल्ली सरकार के सहयोग से मेले का आयोजन जा रहा है। सीएम ने कहा कि डिजिटल युग में भी युवाओं का किताबों से लगाव कम नहीं हुआ जो भारत को विश्वगुरु बनाने की राह में बड़ा कदम है। किताबें निस्वार्थ दोस्त होती हैं, ये बिना शर्त साथ देती हैं। ये न सिर्फ ज्ञान देती हैं बल्कि हमें खुद से जोड़ती हैं। उन्होंने द अल्केमिस्ट की पंक्ति का जिक्र किया जिसमें लिखा है कि अगर आप कुछ शिद्दत से चाहें तो पूरी कायनात उसे पूरा करने में जुट जाती है। उन्होंने गोदान और परिणीता जैसी किताबों का उदाहरण देते हुए पाठकों से इनके पात्रों को अपने जावन में उतारने की अपील की।
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अगले साल साहित्यिक महोत्सव होगा : कपिल मिश्रा
कला, संस्कृति और भाषा मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि दिल्ली सरकार ने कला और संस्कृति के लिए ऐतिहासिक बजट स्वीकृत किया है। अगले साल मेले को साहित्यिक महोत्सव के रूप में आयोजित किया जाएगा। आईटीपीओ चेयरमैन प्रदीप सिंह खरौला, एफआईपी अध्यक्ष नवीन गुप्ता भी उद्घाटन कार्यक्रम में मौजूद रहे।
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स्टेशनरी मेले में छात्रों के लिए अनगिनत सामग्री
मेले में कई प्रकाशक, लेखक, छात्र, शोधकर्ता और आम लोग शामिल हैं। किताबों के अलावा स्टेशनरी, शिक्षण सामग्री और कॉर्पोरेट गिफ्ट्स की प्रदर्शनी भी लगी है। छात्रों के लिए मेला बेहद महत्वपूर्ण है। मेले में स्टेशनरी की नई और अनगिनत सामग्री उपलब्ध है। इसमें सेमिनार, लेखक भेंट, पेंटिंग प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हो रहे हैं।
भाषा अकादमी और म्यूजियम ऑफ इल्यूजन भी आकर्षण
दिल्ली सरकार की पांच भाषा अकादमियों हिंदी, उर्दू, संस्कृत, पंजाबी और सिंधी का एकीकृत स्टॉल मेले में लगाया है। यहां पुराने साहित्य से लेकर आधुनिक किताबें आसानी से मिल रही हैं। सिंधी अकादमी में द सिंध स्टोरी, सिंधी कल्चर और शाह जो रसालो जैसी किताबें हैं, साथ ही युवाओं के लिए टेल्स ऑफ ओल्ड इंड जैसे अंग्रेजी अनुवाद भी उपलब्ध हैं। उर्दू अकादमी में दीवाने गालिब के हिंदी-उर्दू संस्करण, हिंदी अकादमी में मेट्रो, जिक्रे मीर, मैला आंचल और यशपाल: क्रांति से कलम तक जैसी किताबें हैं। मैथिली-भोजपुरी अकादमी में भोजपुरी लोकगीत, भिखारी ठाकुर और कैथी लिपि पर किताबें हैं, जबकि संस्कृत अकादमी में शंकरग्रंथावली, अथर्ववेदसंहिता और सामवेदसंहिता उपलब्ध हैं। किताबों के साथ म्यूजिक सीडी भी मौजूद हैं। मेले में म्यूजियम ऑफ इल्यूजन भी बनाया गया है, जो आगंतुकों के लिए खास आकर्षण है।