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Delhi NCR News: मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज में बोन ग्राफ्टिंग की सुविधा शुरू
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- मेक इन इंडिया के तहत इंस्टीट्यूट में सेंट्रल टिश्यू बैंक किया स्थापित
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज के पेरिओडोंटोलॉजी विभाग में मरीजों के लिए सेंट्रल टिश्यू बैंक की सुविधा शुरू हो गई। मरीजों को अब बोन ग्राफ्टिंग के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा। मेक इन इंडिया के तहत इंस्टीट्यूट में बोन ग्राफ्टिंग हो सकेगी। मंगलवार को दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने इस सुविधा का शुभारंभ किया। साथ ही दिल्ली डेंटल काउंसिल के नए अत्याधुनिक कार्यालय का भी उद्घाटन किया।
इंस्टीट्यूट की निदेशक डॉ. अरुणदीप कौर लांबा ने बताया कि हड्डी रोग विभाग से बोन ग्राफ्टिंग के लिए बोन ली जाती है। यह ऐसी बोन होती है जो किसी तरह के रिप्लेसमेंट सर्जरी के दौरान इस्तेमाल नहीं हो पाती है उसको ट्रीट कर फिर ग्राफ्ट तैयार किया जाता है। मरीज में जहां पर बोन की कमी होती है उसे भरकर उपचार करते हैं। अभी मुंबई के एक संस्थान में बोन ग्राफ्ट तैयार होते हैं। अंतरराष्ट्रीय संस्थान से इंपोर्ट करना पड़ता था।
पांच साल तक रख सकते हैं सुरक्षित
उन्होंने कहा कि अब मेक इन इंडिया के तहत इंस्टीट्यूट में बोन ग्राफ्टिंग की जा सकेगी। गामा रेडिएशन से स्टेराइल किया जाता है ताकि किसी को संक्रमण न हो। ग्राफ्ट को पांच साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर सेंट्रल टिश्यू बैंक को तैयार किया गया।
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मलेशिया में मिला बोन ग्राफ्टिंग का प्रशिक्षण
सेंट्रल टिश्यू बैंक की प्रमुख अन्वेषक डॉ. श्रुति टंडन ने बताया कि दांत के आसपास हड्डी की कमी होने, दांत लगाने के लिए पर्याप्त हड्डी न होने, जबड़े को नुकसान पहुंचने की स्थिति में बोन ग्राफ्टिंग की जरूरत पड़ती है। अमेरिका और जर्मनी से इसको इंपोर्ट किया जाता है। अब यह सुविधा इंस्टीट्यूट में ही उपलब्ध हो गई है। बोन ग्राफ्टिंग के लिए मलेशिया में खासतौर पर प्रशिक्षण भी मिला है। इस प्रक्रिया में एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है। दो हफ्ते बाद टांके कटते हैं। इस सुविधा के लिए वर्ष 2016 से काम किया जा रहा था।
डिजिटल हुआ कार्यालय का दफ्तर
वहीं इंस्टीट्यूट में दिल्ली डेंटल काउंसिल के कार्यालय का भी शुभारंभ हो गया है। काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि पहले विकास भवन में काउंसिल का कार्यालय संचालित हो रहा था। अब इंस्टीट्यूट में पंजीकरण, नवीनीकरण सहित कई दूसरी सुविधाएं दंत चिकित्सकों को उपलब्ध हो सकेगी। यह व्यवस्था पूरी तरह से डिजिटल और कैशलेस होगी।
दवा की कमी नहीं करेंगे बर्दाश्त
मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज में पत्रकारों से बातचीत में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षकों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि दवा की कमी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर किसी अस्पताल में दवा की कमी है तो वह मेरे फोन नंबर और ईमेल कर सूचित कर सकता है। अगर कोई चिकित्सा अधीक्षक लापरवाही करेगा तो उस पर कार्रवाई करेंगे। अगर किसी अस्पताल में 95 फीसदी से कम दवा मिलती है तो उस पर भी कार्रवाई होगी। इस दौरान एक डॉक्टर ने मंत्री से पूछा कि अस्पताल की बीमारियों को इंश्योरेंस में क्यों नहीं रखा जाता तो उन्होंने कहा कि यह कानूनी प्रक्रिया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज के पेरिओडोंटोलॉजी विभाग में मरीजों के लिए सेंट्रल टिश्यू बैंक की सुविधा शुरू हो गई। मरीजों को अब बोन ग्राफ्टिंग के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़ेगा। मेक इन इंडिया के तहत इंस्टीट्यूट में बोन ग्राफ्टिंग हो सकेगी। मंगलवार को दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने इस सुविधा का शुभारंभ किया। साथ ही दिल्ली डेंटल काउंसिल के नए अत्याधुनिक कार्यालय का भी उद्घाटन किया।
इंस्टीट्यूट की निदेशक डॉ. अरुणदीप कौर लांबा ने बताया कि हड्डी रोग विभाग से बोन ग्राफ्टिंग के लिए बोन ली जाती है। यह ऐसी बोन होती है जो किसी तरह के रिप्लेसमेंट सर्जरी के दौरान इस्तेमाल नहीं हो पाती है उसको ट्रीट कर फिर ग्राफ्ट तैयार किया जाता है। मरीज में जहां पर बोन की कमी होती है उसे भरकर उपचार करते हैं। अभी मुंबई के एक संस्थान में बोन ग्राफ्ट तैयार होते हैं। अंतरराष्ट्रीय संस्थान से इंपोर्ट करना पड़ता था।
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पांच साल तक रख सकते हैं सुरक्षित
उन्होंने कहा कि अब मेक इन इंडिया के तहत इंस्टीट्यूट में बोन ग्राफ्टिंग की जा सकेगी। गामा रेडिएशन से स्टेराइल किया जाता है ताकि किसी को संक्रमण न हो। ग्राफ्ट को पांच साल तक सुरक्षित रखा जा सकता है। अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर सेंट्रल टिश्यू बैंक को तैयार किया गया।
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मलेशिया में मिला बोन ग्राफ्टिंग का प्रशिक्षण
सेंट्रल टिश्यू बैंक की प्रमुख अन्वेषक डॉ. श्रुति टंडन ने बताया कि दांत के आसपास हड्डी की कमी होने, दांत लगाने के लिए पर्याप्त हड्डी न होने, जबड़े को नुकसान पहुंचने की स्थिति में बोन ग्राफ्टिंग की जरूरत पड़ती है। अमेरिका और जर्मनी से इसको इंपोर्ट किया जाता है। अब यह सुविधा इंस्टीट्यूट में ही उपलब्ध हो गई है। बोन ग्राफ्टिंग के लिए मलेशिया में खासतौर पर प्रशिक्षण भी मिला है। इस प्रक्रिया में एक से डेढ़ घंटे का समय लगता है। दो हफ्ते बाद टांके कटते हैं। इस सुविधा के लिए वर्ष 2016 से काम किया जा रहा था।
डिजिटल हुआ कार्यालय का दफ्तर
वहीं इंस्टीट्यूट में दिल्ली डेंटल काउंसिल के कार्यालय का भी शुभारंभ हो गया है। काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि पहले विकास भवन में काउंसिल का कार्यालय संचालित हो रहा था। अब इंस्टीट्यूट में पंजीकरण, नवीनीकरण सहित कई दूसरी सुविधाएं दंत चिकित्सकों को उपलब्ध हो सकेगी। यह व्यवस्था पूरी तरह से डिजिटल और कैशलेस होगी।
दवा की कमी नहीं करेंगे बर्दाश्त
मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज में पत्रकारों से बातचीत में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षकों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि दवा की कमी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर किसी अस्पताल में दवा की कमी है तो वह मेरे फोन नंबर और ईमेल कर सूचित कर सकता है। अगर कोई चिकित्सा अधीक्षक लापरवाही करेगा तो उस पर कार्रवाई करेंगे। अगर किसी अस्पताल में 95 फीसदी से कम दवा मिलती है तो उस पर भी कार्रवाई होगी। इस दौरान एक डॉक्टर ने मंत्री से पूछा कि अस्पताल की बीमारियों को इंश्योरेंस में क्यों नहीं रखा जाता तो उन्होंने कहा कि यह कानूनी प्रक्रिया है।