तिहाड: जेल की वैन में खूनी खेल, दो कैदियों की मौत
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एक-दूसरे के खून के प्यासे नीरज बवाना व नीतू दाबोदा गिरोह एक समय में एक ही गिरोह हुआ करता था। गिरोह के एक सदस्य की हत्या के बाद दोनों अलग हो गए।
इसके बाद मौका लगने पर एक-दूसरे गिरोह के सदस्यों की जान ले रहे हैं। पुलिस की मानें तो गैंगवार में एक दर्जन से ज्यादा जानें जा चुकी हैं।
स्पेशल सेल के एक अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2012 की शुरुआत नीतू दाबोदा और नीरज बवाना एक ही गिरोह हुआ करता था। गिरोह का सरगना नीतू दाबोदा था। अप्रैल 2012 में नीतू दाबोदा ने गिरोह के सदस्य सोनू की हत्या कर दी थी।
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बताया जा रहा है कि नीतू ने किसी विरोधी गैंग से पैसे लेकर सोनू की हत्या की थी। सोनू की हत्या के कारण गिरोह दो गुटों में बंट गया। नीतू दाबोदा गिरोह से अलग होकर नीरज बवाना ने अपना अलग गिरोह बना लिया था।
इसके बाद ये दोनों गिरोह एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए। पिछले साल नीरज बवाना गिरोह ने नीतू दाबोदा गिरोह के सदस्य प्रदीप दहिया व एक अन्य की पीतमपुरा में हत्या कर दी थी।
स्पेशल सेल ने वर्ष 2014 में गिरोह सरगना नीतू दाबोदा को दो साथियों के साथ मुठभेड़ में मार गिराया था। इसके बाद गिरोह की कमान पारस गोल्डी ने संभाल ली थी। स्पेशल सेल ने पारस व नीरज बवाना को गिरफ्तार कर लिया था।