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11 घंटे की मैराथन सर्जरी के बाद हुई, फोर्थ स्टेज में अंडाशय के कैंसर की सफल सर्जरी

Mon, 26 Dec 2016 10:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 26 Dec 2016 10:58 AM IST
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bl kapoor specialist did successful surgery of carcinoma in fourth stage
डेमो पिक

नई दिल्ली के बीएल कपूर अस्पताल ने उच्च रक्तचाप से पीड़ित महिला(65) के अंडाशय (ओवरी) में फैले कैंसर का उपचार करने में सफलता हासिल की है।  जबकि कैंसर चौथी स्टेज में था।

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कैंसर पीड़ित महिला का अंडाशय गंभीर रूप से कार्सिनोमा (एक तरह का कैंसर) की चपेट में आ चुका था। जबकि उसके उपचार के लिए तीन बार कीमोथेरेपी के अलावा साइटोरिडक्टिव सर्जरी (सीआरएस) और हाइपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी भी करवा चुकी थी।

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कैंसर सेंटर के सर्जिकल ओंकोलॉजी विभाग के प्रमुख निदेशक डॉ. कपिल कुमार ने बताया कि जांच में पता चला कि कार्सिनोमा पेरिटोनियम तक फैल चुका था। वह अपेंडिक्स, मलाशय, आमाशय और पेट के अलग-अलग हिस्सों में फैलता जा रहा था।

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कीमोथेरेपी कराने के बावजूद महिला की तबीयत में कोई सुधार नहीं

bl kapoor specialist did successful surgery of carcinoma in fourth stage
कर्क राशि

कीमोथेरेपी कराने के बावजूद महिला की तबीयत में कोई सुधार नहीं हो रहा था। उसके पेट में  असामन्य तरीके से करीब दो लीटर फ्लूड (तरल पदार्थ) इकट्ठा हो चुका था। साथ ही पेट के अंदरूनी हिस्सों, बड़ी आंत और अन्य अंगों को कवर करने वाली फैटी लाइनिंग ओमेंटम और पेरिटोनिअम की मोटाई भी काफी बढ़ गई थी।

मरीज की पूरी हिस्ट्री देखने के बाद डॉक्टरों की टीम ने इलाज की इनोवेटिव तकनीक सीआरएस और उसके साथ एचआईपीईसी के जरिये मल्टीपल सर्जरी करने का निर्णय लिया।


सीआरएस एक मल्टीपल सर्जिकल प्रक्रिया है, जिसमें कैंसर से प्रभावित कुछ अंगों और प्रभावित ऊतक को विभाजित कर दिया जाता है। चूंकि कीमोथेरेपी ट्यूमर से ग्रसित टिश्यू के अंदर एक सीमित दूरी तक ही की जा सकती है, इसलिए एचआईपीईसी करने से पहले सभी दिखाई देने वाले और छूने लायक ट्यूमर को निकालना अनिवार्य है।


डॉ. कपिल ने बताया कि मरीज अंडाशय के कैंसर की चौथी स्टेज पर थी, जिसकी वजह से कैंसर सेल्स पेट के खाली हिस्से में फैल चुकी थीं। मरीज की साइटोरिडक्टिव सर्जरी करनी जरूरी थी।

11 घंटे की मैराथन सर्जरी के बाद मरीज को एचआईपीईसी दिया गया

bl kapoor specialist did successful surgery of carcinoma in fourth stage
cancer

इसके तहत मरीज का गर्भाशय और गर्भाशय की ग्रीवा, दोनों अंडाशय, फलोपियन ट्यूब, ओमेंटम, पेल्विक और पैरा ओरटिक लिंफ नोड्स को विभाजित कर उन्हें बाहर निकाला गया।


11 घंटे की मैराथन सर्जरी के बाद मरीज को एचआईपीईसी दिया गया, जिसे मशीन के जरिये इंस्टाल किया गया था। करीब 90 मिनट तक 42 डिग्री सेल्सियस तापमान पर स्टेरली कीमोथेरेपी सॉल्यूशन को पेरिटोनिअल केविटी में पूरी तरह सर्कुलेट किया गया।
 

सीआरएस और उसके साथ एचआईपीईसी मिलकर उन माइक्रोस्कोपिक सेल्स की ग्रोथ को रोकते हैं, जो छूट जाती हैं। एचआईपीईसी की प्रक्रिया दवा के अवशोषण को भी सुधारती है और शरीर के बाकी हिस्से पर उसका प्रभाव बहुत कम पड़ता है।
 

इस तरीके से कीमोथेरेपी के सामान्य दुष्प्रभावों से भी बचा जा सकता है। सर्जरी के बाद महिला की हालत में तेजी से सुधार हुआ और दो हफ्ते बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी भी मिल गई।

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