दिल्ली के मेयर चुनाव में बीजेपी का राज
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भाजपा के वरिष्ठ पार्षद योगेंद्र चंदोलिया सोमवार को उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर बनेंगे। जबकि भाजपा के ही पार्षद रविंद्र गुप्ता डिप्टी मेयर चुने जाएंगे। दोनों पार्षदों का निगम के सदन की बैठक में सर्वसम्मति से निर्वाचन होगा।
इन पदों के लिए कांग्रेस समेत किसी भी विपक्षी दल के पार्षद ने नामांकन नहीं किया है। चंदोलिया वार्ड नंबर 92 और गुप्ता वार्ड नंबर 91 के पार्षद हैं। ये दोनों वार्ड करोल बाग क्षेत्र के तहत हैं।
मेयर पद पर भाजपा ने स्थायी समिति के पूर्व अध्यक्ष योगेंद्र चंदोलिया का नामांकन पत्र दाखिल कराया है, वहीं डिप्टी मेयर पद के लिए रविंद्र गुप्ता ने नामांकन किया है।
नहीं उतरा कोई और उम्मीदवार
वर्तमान वित्तीय वर्ष में उत्तरी दिल्ली नगर निगम के सदन की सोमवार को पहली बैठक होगी। डीएमसी एक्ट के तहत वित्तीय वर्ष की पहली बैठक में मेयर एवं डिप्टी मेयर के चुनाव की अनिवार्यता है।
इसके चलते सोमवार को मेयर एवं डिप्टी मेयर का चुनाव होगा। इसके अलावा सदन से स्थायी समिति के चुने जाने वाले तीन सदस्यों का भी चुनाव होगा। इन पदों के लिए अन्य किसी भी पार्षद नामांकन नहीं करने से भाजपा के ये दोनों पार्षदों निर्विरोध निर्वाचित होंगे। उत्तरी दिल्ली नगर निगम में भाजपा को पूर्ण बहुमत है।
सदन से स्थायी समिति के तीन सदस्यों का चुनाव भी निर्विरोध होगा। इसके लिए भी केवल तीन पार्षदों ने ही नामांकन भरा है। भाजपा के संजीव नैय्यर और रेखा गुप्ता और कांग्रेस की ओर से पार्षद पृथ्वी सिंह राठौर ने नामांकन दाखिल कर रखा है।
समर्थकों को होना पड़ सकता निराश
उत्तरी दिल्ली नगर निगम के सदन की कार्रवाई केवल 75 दर्शक ही देख सकेंगे। यानि जो पहले आ जाएगा वहीं दर्शक दीर्घा में प्रवेश कर पाएगा।
मेयर पद के उम्मीदवार योगेंद्र चंदोलिया के बड़ी संख्या में समर्थक आने की उम्मीद है।
उनका नामांकन दाखिल करने के लिए भी बड़ी संख्या में समर्थक आए थे। उन सभी को दर्शक दीर्घा में प्रवेश मिलना मुश्किल है।
जीत के लिए पार्टी लाइन दरकिनार
दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के मेयर, डिप्टी मेयर एवं स्थायी समिति के सदस्यों के चुनाव में भाजपा, कांग्रेस और बसपा के पार्षद जबरदस्त जोड़तोड़ में लगे हैं।
मंगलवार को प्रस्तावित चुनाव में जीत हासिल करने को तीनों दलों के उम्मीदवार पार्टी लाइन से हटकर दूसरे दलों में अपनी बिरादरी के पार्षदों से समझौते कर रहे हैं। इसके चलते भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस भी परेशान है।
दक्षिणी दिल्ली नगर निगम में किसी भी दल के पास बहुमत नहीं है। बीएसपी ने वर्षों तक कांग्रेस के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का साथ दिया और उसका भाजपा से छत्तीस का आंकड़ा रहा। मगर, नगर निगम में ऐसा नहीं है। बीएसपी ने एक बार फिर डिप्टी मेयर पद की उम्मीदवारी को लेकर भाजपा के साथ गठजोड़ कर लिया है।