बदलने वाले हैं दिल्ली के उपराज्यपाल और सीपी?
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दिल्ली के कानून व्यवस्था को लेकर प्रदेश भाजपा लगातार पुलिस प्रशासन और दिल्ली के उपराज्यपाल पर दबाव बना रही है। कई बार पुलिस आयुक्त और दिल्ली के उपराज्यपाल के साथ बैठकें भी हुई।
बुधवार को पार्टी विधायक जितेंद्र सिंह शंटी पर हमले के बाद तो यह मुहिम और भी तेज हो गई। क्योंकि एक मंच पर प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय, विधायक प्रो. जगदीश मुखी, सरदार आरपी सिंह, कुलवंत राणा, डॉ. नंदकिशोर गर्ग, सुभाष सचदेवा, जितेंद्र सिंह शंटी, मोहन सिंह बिष्ट जुटे और एक स्वर में लचर कानून व्यवस्था को लेकर दिल्ली के उपराज्यपाल और पुलिस कमिश्नर को कटघरे में खड़ा किया।
एक साथ नेताओं का मंच पर आकर खुले तौर पर यह कहना कि दिल्ली के उपराज्यपाल और पुलिस आयुक्त को यह बताना होगा कि दिल्ली के हालात क्यों बिगड़ रहे है। इस बयान के कई मतलब निकाले जा रहे है।
कोई इसे दिल्ली में सरकार की मुहिम को जोड़कर देख रहा है तो कोई दोनों को पद से हटाने की कवायद। जानकारों का मानना है कि दिल्ली पुलिस जब पूरे तरीके से केंद्रीय गृह मंत्री के दिशा-निर्देश पर चलती है और उपराज्यपाल भी कहीं न कहीं केंद्र के इशारे पर ही काम करते है तो फिर प्रदेश भाजपा इकाई इतनी तीखी प्रतिक्रिया क्यों दे रही है।
बिगड़े हालात के बहाने किनारे लगाने की कोशिश?
माना यह जा रहा है कि इस कवायद से ऐसी भूमिका तैयार की जा रही है कि अगर वक्त आने पर दिल्ली के उपराज्यपाल और पुलिस कमिश्नर को हटाने की आवश्यकता पड़ी तो किसी तरह का आरोप भाजपा को नहीं झेलना पड़े। लचर कानून व्यवस्था का आरोप लगाकर और कुशल प्रशासक के नाम पर पूरे मामले से पल्ला झाड़ लिया जाए।
बता दें कि केंद्र में सरकार बदलने के बाद उपराज्यपाल या राज्यपाल का बदलना आम बात है। दूसरी तरफ यह भी माना जा रहा इस तरह की कवायद से भाजपा यह भी बताना चाहती है कि दिल्ली की हालत तभी सुधरेगी जब एक चुनी हुई सरकार होगी।
यह समझाने का प्रयास है कि दिल्ली के उपराज्यपाल ठीक से दिल्ली के विकास को रफ्तार नहीं दे पा रहे है। लिहाजा पूरा बहुमत नहीं होने के बावजूद आम जनता के लिए भाजपा ने सरकार बनाई है।
बुधवार को प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय व भाजपा विधायकों ने साफ तौर पर कहा है कि पिछले दिनों दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग और दिल्ली के पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी के साथ हुई बैठक में भाजपा विधायकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की गई थी। यह चिंता सही साबित हो गई है।
बैठक में शंटी ने स्पष्ट कहा था कि उन पर पहले भी हमला हुआ है और उन्हें लगातार अवैध कब्जे करने वाले लोगों से धमकियां मिल रही हैं। इसके बावजूद हमला हुआ।