बवाना उपचुनाव : आंकड़ो में BJP भारी, मगर कांग्रेस व AAP के प्रदर्शन पर है सबकी नजर
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बवाना उपचुनाव को लेकर तीनों प्रमुख पार्टियों ने जीत के दावे किए है। आंकड़ो में भाजपा का पलड़ा भारी नजर आता है। वर्ष 2013 के आम चुनाव व वर्ष 2017 में निगम चुनावों में भाजपा ने बाजी मारी है।
बावजूद इससे नजर कांग्रेस व आप के प्रदर्शन पर लगी है। क्या कांग्रेस अपने प्रत्याशी के बल पर अपना खाता खोल पाती है या फिर आप अपनी सीट बचा पाती है।
वर्ष 2013 के आम चुनावों में भाजपा ने 41.10 प्रतिशत वोट हासिल किए थे और उसका प्रत्याशी बाजी मारने में सफल रहा था। वहीं 25.69 प्रतिशत वोट लेकर आप दूसरे व कांग्रेस 25.26 प्रतिशत वोट लेकर तीसरे नंबर पर रही थी।
जाने वोटों का गणित
वर्ष 2015 को हुए आम चुनावों में भाजपा का वोट प्रतिशत 10 प्रतिशत गिरकर 31.16 रह गया तो आप ने करीब 23 प्रतिशत वोट का उछाल लेकर 58.14 प्रतिशत वोट हासिल कर सभी को चौंका दिया था। वहीं कांग्रेस 7.87 वोट पर ही सिमट गई थी।
यदि वर्ष 2017 में हुए एमसीडी चुनावों के आंकडो पर जाए तो एक बार फिर भाजपा का पलड़ा भारी रहा। भाजपा ने इस विस क्षेत्र के छह वार्डों में से तीन पर कब्जा कर अपना बहुमत दिखाया।
भाजपा ने तीन वार्डो पर कब्जा किया तो आप, बीएसपी व निर्दलीय के खाते में एक-एक वार्ड आया। भाजपा ने 2015 के चुनावों से कुछ ही ज्यादा यानि 32.47 प्रतिशत वोट हासिल किए, तो कांग्रेस ने भी दोगुने वोट हासिल कर 15.41 प्रतिशत मत हासिल कर लिए।
वहीं सभी को चौंकाने वाली आप को करीब 36 प्रतिशत वोटो का नुकसान हुआ और वह 22.25 प्रतिशत तक ही सिमट गई।
आप रूठे हुए मतदाताओं को लुभाने में कामयाब रहती है तो वह बाजी मार सकती है
अब इन चुनावों में तीनों ही पार्टियों ने दिन रात एक कर दिया है। कांग्रेस व आप ने सीट पर कब्जा करने के लिए पूरा जोर लगा रखा है।
विशलेषकों का मानना है कि पूरा दामोदार कांग्रेस व आप के प्रदर्शन पर निर्भर है। यदि कांग्रेस किसी तरह अपने खोए हुए जनाधार को वापस पा लेती है तो सीट पर उठापटक हो सकती है। वहीं यदि आप रूठे हुए 10 प्रतिशत मतदाताओं को लुभाने में कामयाब रहती है तो वह बाजी मार सकती है, वरना बाजी भाजपा के हक में भी जा सकती है।
उधर भाजपा को भी भीतरघात का खतरा बना हुआ है दरअसल आप से भाजपा में गए प्रत्याशी को कार्यकर्ता व पुराने भाजपाई अपने ऊपर थोपा हुआ नेता मान रहे है।