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नोएडा उपचुनाव: प्रचार के आड़े नहीं आती उम्र
सोमदत्त शर्मा/अमर उजाला, नोएडा
Updated Fri, 05 Sep 2014 02:20 AM IST
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नोएडा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी विमला बाथम 62 की उम्र में भी 17 घंटे काम कर रही हैं। महज पांच घंटे की नींद के बाद तड़के ही उनके कमरतोड़ चुनावी अभियान की शुरुआत हो जाती है।
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विमला बाथम की चुनावी दिनचर्या का हाल लेने के लिए अमर उजाला संवाददाता ने भी पूरा दिन प्रत्याशी के साथ बिताया। विमला बाथम के दिन की शुरूआत तड़के पांच बजे योग के साथ होती है। स्नान-ध्यान के बाद सात बजे से ही चुनावी रणनीति बनाने में व्यस्त हो जाती हैं।
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इसी दौरान हल्का नाश्ता भी हो जाता है, लेकिन काम नहीं रुकता। आठ बजे कार्यालय पहुंचा और उसके बाद कार्यकर्ताओं को चुनाव संबंधी दिशा-निर्देश देने के बाद वह नौ बजे जनसंपर्क पर निकल जाती हैं। उम्र इजाजत नहीं देती, लेकिन मामला चुनाव का है।
लिहाजा, गाड़ी से प्रचार के बजाय विमला बाथम हर शख्स से खुद मिलने को ज्यादा तरजीह देती हैं। इसी दौरान सभाओं और क्षेत्र की समस्याओं पर भी नजर डालना होता है। दोपहर ढाई बजे घर वापसी होती है और साथ ही भोजन भी। इस दौरान भी आराम का कोई जिक्र नहीं होता। इसके बाद कार्यालय वापसी होती है।
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जरूरी काम निपटाने के बाद चार बजे वापस चुनाव मैदान में डट जाती हैं। करीब नौ बजे तक कार्यालय वापसी होती है और दस बजे तक कार्यकर्ताओं से मुलाकात का सिलसिला चलता है। घर पहुंचती हैं तो भी चुनावी चर्चाओं का दौर थमता नहीं है। रात 12 बजे भोजन के बाद भाजपा प्रत्याशी का चुनावी दिन खत्म होता है।
जब सवाल किया गया कि आम दिनों में दिन किस तरह गुजरता है तो जवाब मिलता है कि दिनचर्चा बचपन से ही कठिन है। आम दिनों में भी 5 से 6 बजे के बीच उठ जाती हैं और इसका फायदा उपचुनाव में भी मिल रहा है। उम्र के इस मोड़ पर भी ज्यादातर चुनावी क्षेत्र में विमला बाथम ने खुद ही चुनाव प्रचार किया है।