बवाना कांड पर सियासत शुरू, भाजपा मेयर के बयान के बाद केजरीवाल के मंत्री ने दी सफाई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वायरल हुए वीडियो में प्रीति अग्रवाल कहते सुनाई दे रही हैं कि 'फैक्ट्री की लाइसेंसिंग हमारे पास है इसलिए हम कुछ नहीं बोल सकते।' इधर दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाती मालीवाल ने आरोप लागाया है कि अवैध फैक्ट्रियां सिस्टम की मिलीभगत से चल रही थी और वह नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर रहे थे।
दरअसल जिस इलाके में आग लगी है उस इलाके की नगर निगम पर बीजेपी का कब्जा है। यही वजह है कि आप और बीजेपी के बीच खींचतान शुरू हो गई है। आप के इस आरोप पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी ने कहा कि, यह दिल्ली सरकार का औधोगिक क्षेत्र है और यहां की फैक्ट्रियां उन्हीं के अधिकार क्षेत्र में आती हैं। ऐसे में यहां जो भी काम हो रहा है उसकी जवाबदेही भी दिल्ली सरकार की है।
#WATCH: In the aftermath of Bawana factory fire, BJP leader & North Delhi Municipal Corporation Mayor Preeti Aggarwal caught on cam telling her aide, 'iss factory ki licensing hamare paas hai isliye hum kuch nahi bol sakte.' The incident has claimed 17 lives. #Delhi pic.twitter.com/zXfVjNADl2
— ANI (@ANI) January 21, 2018
वहीं इस मामले में अपने बचाव में उत्तर दिल्ली की मेयर प्रीती अग्रवाल भी उतर गई हैं। उन्होंने कहा कि, यह औद्योगिक क्षेत्र डीएसआईडीसी के अंतर्गत है और भूमि आवंटन दिल्ली सरकार द्वारा किया गया है। उन्हें देखा जाना चाहिए कि वहां क्या काम हो रहा है। उन्होंने कहा कि एक नकली वीडियो को वायरल कर पब्लिक को गुमराह किया जा रहा है। यह सही नहीं है, मैं इसकी निंदा करती हूं। मैं उम्मीद करती हूं कि अरविंद केजरीवाल को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए।
प्रीती अग्रवाल ने कहा कि, सोशल मीडिया पर मेरा एक वीडियो का वायरल हो रहा है जिसपर मुख्यमंत्री केजरीवाल ने रीट्वीट किया है। मैं केवल अपने सहकर्मियों से इस जगह के बारे में कुछ पूछताछ कर रही थी और मैंने कहा था कि इस समय इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बारे में हमें कुछ नहीं कहना चाहिए।
This industrial area is under DSIDC & land allotment has been done by Delhi government. They should at least see what work is being done there. Is making a fake video viral & confusing public is fair? It's condemnable & I expect Arvind Kejriwal Ji to apologise: Preeti Aggarwal pic.twitter.com/IYhcNsr9Nu
— ANI (@ANI) January 21, 2018
बता दें कि मुख्यमंत्री केजरीवाल द्वारा वायरल वीडियो के रीट्वीट किए जाने के बाद से सोशल मीडिया पर प्रीती अग्रवाल ट्रोल हो रही हैं।
बड़ी सादगी से झूठ बोलते हुए सारी जिम्मेदारी से हाथ छुड़ाने की कोशिश। शहरों में इमारत का नक्शा पास करने से लेकर दुकान या फैक्ट्री को लाइसेंस देने तक का अधिकार सिर्फ निगम/ प्राधिकरण का है। दिल्ली मुंबई जैसे शहरों में राज्य सरकार से ज्यादा अधिकार निगम के पास हैं। https://t.co/oIUA2sYSLC
— ASHUTOSH MISHRA (@ashu3page) January 21, 2018
ये राजनीति का कौन सा चेहरा है, बेहद शर्मनाक...'हम कुछ नहीं बोल सकते'.. इनके लिए राजनीति के आगे किसी की जान की कोई कीमत नहीं https://t.co/cC9UXHX5zL
— Poonam Pandey (@pandeypoonam20) January 21, 2018
50,000 अवैध फैक्ट्री?
बवाना में हुए हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है इसे लेकर बीजेपी और आम आदमी पार्टी में चल रहे विवाद में आप के असंतुष्ट विधायक कपिल मिश्रा भी कूद गए हैं। कपिल मिश्रा ने स्वाती मालीवाल के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए कहा कि 50,000 अवैध फैक्ट्री? ये तो दिल्ली सरकार के डीएसआईआईडीसी का औधोगिक क्षेत्र है। ये तो अरबों का घोटाला है। जिंदगियों से खिलवाड़ भी।
इस बीच दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा है कि जांच कमेटी गठित कर दी गई है। रिपोर्ट के आधार पर दोषी लोगों के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें नहीं लगता कि दिल्ली में पटाखा फैक्ट्री लगाने के लिए लाइसेंस दिया गया था। इसके बावजूद अगर पटाखा फैक्ट्री चलाई जा रही थी तो यह गैरकानूनी है।
पटाखा फैक्ट्री के गिरफ्तार मालिक मनोज जैन ने पुलिस पूछताछ में बताया है कि वह होली और स्टेज पर इस्तेमाल होने वाले पटाखे पैक करवाता था जिसके लिए किसी लाइसेंस की जरूरत नहीं होती। हालांकि पुलिस उसके इस दावे की जांच कर रही है।
फायर सर्विस के निदेशक ने जताई आग की आशंका
दिल्ली फायर सर्विस के निदेशक जीसी मिश्रा ने बताया है कि दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इमारत में बेतरतीब ढंग से बिजली के तार बिखरे हुए थे। मुझे आशंका है कि वहां पहले आग लगी होगी। हालांकि इसकी पुष्टि जांच के बाद ही संभव है।
निदेशक का कहना है कि ऐसी संभावना लगती है कि इस इमारत का निर्माण हाल ही में हुआ था। जबकि यह इलाका केवल प्लास्टिक फैक्ट्री के लिए बनाया गया है। जांच में ही इस बात का खुलासा हो सकता है कि फैक्ट्री चलाने के लिए एनओसी सर्टिफिकेट लिया गया था या नहीं।
इस तरह की फैक्ट्री लगाने के लिए लाइसेंस लिया गया था या नहीं इसकी सही जानकारी लाइसेंस देने वाली एजेंसियां ही दे सकती हैं। हालांकि हम इस बात की जांच कर रहे हैं कि इसे किस तरह के व्यापार के लिए लाइसेंस दिया गया था।