इकलाख के गांव बिसाहड़ा में नहीं दी गई कुर्बानी, लोगों ने मनाई मीठी ईद
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जिले भर में मंगलवार को जहां कुर्बानी देकर बकरीद मनाई गई, वहीं बिसाहड़ा में मीठी ईद मनाई गई। गांव में बकरे की कुर्बानी नहीं दी गई। यहां लोगों ने सेवई और उबले हुए नमकीन चने से बकरीद मनाई। हालांकि इस बार बकरीद की मुबारकबाद देने वालों की कमी रही।
इकलाख की हत्या के बाद यह पहली बकरीद थी। मंगलवार को बिसाहड़ा में राजतपुर गांव के नजदीक बनी ईदगाह पर मस्जिद के मौलाना दाउद ने नमाज अदा कराई। सुबह 8:30 बजे शुरू हुई नमाज नौ बजे खत्म हुई।
इस दौरान चौकी प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर मौजूद रहे। ग्रामीणों ने बताया कि नमाज अदा करने के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने हिंदू परिवारों को फोन कर दावत के लिए बुलाया, लेकिन हिंदू समाज के कम लोग ही बकरीद की मुबारकबाद देने पहुंचे।
ग्राम प्रधान पति हरिओम ने मुस्लिम परिवारों के घरों पर जाकर ईद की बधाई दी। 70 वर्षीय अब्दुल सत्तार ने बताया कि हर साल 100 से 150 लोग बकरीद की मुबारकबाद देने घर आते थे। इस बार गांव के हिंदू मुबारकबाद देने नहीं आए। वहीं, शब्बीर का कहना है कि गांव में पिछले वर्षों के मुकाबले इस वर्ष बकरीद पर वो खुशी नहीं रही।
नमाज अदा करने के बाद घर आने पर गांव के लोगों का जमावड़ा रहता था, जो इस बार नहीं रहा। बिसाहड़ा के सगीर ने बताया कि शांति व्यवस्था कायम रहे, इसलिए गांव में बकरे की कुर्बानी नहीं दी गई। सिर्फ सेवई व उबले हुए नमकीन चने से ईद मनाई गई।
नहीं पहुंचे अधिकारी
इकलाख हत्याकांड के बाद मंगलवार को बकरीद पर कोई भी समाजसेवी गांव में ईद की मुबारकबाद देने नहीं पहुंचा। ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन के आलाधिकारी घटना के बाद दिन-रात गांव में रहते थे, लेकिन मंगलवार को कोई अधिकारी गांव में लोगों बकरीद की मुबारकबाद देने नहीं पहुंचा।