बिसाहड़ा बवाल : प्रयोगशाला में नहीं अंदाजे से कर दिया था मांस का परीक्षण
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इकलाख के घर के फ्रिज से मिले मांस का परीक्षण जिला पशु चिकित्सालय में अंदाज से ही कर दिया गया था। दादरी स्थित पशु चिकित्सालय में परीक्षण के लिए प्रयोगशाला न होने के कारण अंदाज से ही पशु चिकित्सक ने इसकी रिपोर्ट दे दी थी।
पिछले साल 28 सितंबर को बिसाहड़ा गांव में इकलाख और उसके बेटे दानिश की कुछ युवकों ने पिटाई कर दी थी। इकलाख की मौत हो गई और दानिश गंभीर रूप से घायल हुआ था।
फ्रिज से मिले मांस को अगले दिन दादरी स्थित पशु चिकित्सालय के पशु चिकित्सक से जांच कराई गई। जिले में मांस की जांच के लिए प्रयोगशाला नहीं है।
रिपोर्ट लीक हो गई थी और सैंपल को बकरे का मीट बताया गया था
बताया जा रहा है कि ऐसे में चिकित्सक ने अंदाज लगाकर और समझ से अवलोकन कर जांच रिपोर्ट बनाई थी। दिसंबर में यह रिपोर्ट लीक हो गई थी और सैंपल को बकरे का मीट बताया गया था।
हालांकि, पशु चिकित्सक ने सैंपल में केवल मांस होने और खाल न होने के कारण इसमें बदलाव की गुंजाइश बताकर मथुरा स्थित पशु चिकित्सालय के फॉरेंसिक जांच केंद्र भेजने की अनुशंसा की थी। प्रदेश में मथुरा ही एकमात्र पशु जांच की फॉरेंसिक जांच केंद्र है।
जिले में फॉरेंसिक जांच केंद्र न होने के कारण प्रेक्टिस के आधार पर जांच कर पशु चिकित्सक रिपोर्ट भेजते हैं। वहीं, पशु की खाल या सींग न मिलने की स्थिति में किसी भी मामले में सैंपल को फॉरेंसिक जांच के लिए मथुरा भेजने की अनुशंसा की जाती है।
- संतोष द्विवेदी, जिला पशु चिकित्साधिकारी
इकलाख की मेडिकल रिपोर्ट की नकल पर कोर्ट ने मांगी आपत्ति
बिसाहड़ा कांड मामले में मांस की फॉरेंसिक रिपोर्ट और इकलाख व दानिश की मेडिकल रिपोर्ट की नकल उपलब्ध कराने संबंधी चार आवेदन पर कोर्ट ने आपत्तियां मांगी हैं। इस पर सुनवाई 13 अप्रैल को होगी।
सरकारी वकील ने मांस की रिपोर्ट केस का हिस्सा नहीं होने के चलते नकल जारी करने पर आपत्ति जताई है। बुधवार को कई आरोपियों के वकीलों ने इकलाख और दानिश की मेडिकल रिपोर्ट लेने के लिए भी अर्जी डाली।
जिला न्यायालय में बृहस्पतिवार को बिसाहड़ा मामले की सुनवाई थी लेकिन किसी कारणवश सुनवाई नहीं हो सकी। अभियुक्त अरुण, संदीप, विनय, सौरभ, गौरव, भीम, हरीओम, रोविन, विवेक, हरिओम, विशाल, शिवम को कोर्ट में पेश किया गया। जांच अधिकारी ने मांस की फॉरेंसिक रिपोर्ट का सील बंद लिफाफा दो दिन पहले कोर्ट में दाखिल किया था। मांस की जांच रिपोर्ट की नकल लेने के लिए अधिवक्ता बीआर शर्मा और रामशरण नागर ने प्रार्थना पत्र दिए थे।
मांस की फॉरेंसिक रिपोर्ट की नकल जारी नहीं की जा सकती
उधर, एडीजीसी फौजदारी ने बताया कि मांस की फॉरेंसिक रिपोर्ट की नकल जारी नहीं की जा सकती। यह रिपोर्ट केस डायरी और विवेचना का भाग नहीं है। अन्य आवेदन की नकल जारी करने के लिए भी आपत्तियों के लिए समय मांगा है।
अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि अभियोजन की तरह से बताया कि पत्रावली पर सील बंद विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट उसकी केस डायरी का हिस्सा नहीं है, जबकि बचाव पक्ष की ओर से धारा 207 दंड प्रक्रिया संहिता का हवाला देते हुए उसकी भी नकल चाही है।
इसके लिए अब तक चार प्रार्थना-पत्र दाखिल हुए। ऐसी दशा में इन प्रार्थना पत्रों पर आपत्ति मांगी है। वहीं पत्रावली सुनवाई और अग्रिम आदेश के लिए 13 अप्रैल की तिथि लगाई है।
इकलाख और दानिश की मेडिकल रिपोर्ट मांगी
फौजदारी लिपिक मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विजय कुमार चौरसिया की लिखित रिपोर्ट 17 (ख) कोर्ट में आई है। उनके द्वारा कहा गया कि अभियुक्तों को 9 फरवरी 2016 को समस्त नकल प्रदान कर दी गई थी। फिर भी पुन: नकल तैयार कर संलग्न की गई है। कोर्ट के समक्ष अभियुक्तों और उनके वकीलों को नकल दी है।
अरुण, संदीप और विनय की ओर से अधिवक्ता चौधरी हरी सिंह एडवोकेट ने इकलाख की मेडिकल रिपोर्ट, घायल दानिश की मेडिकल रिपोर्ट और इलाज से संबंधित रिपोर्ट तथा मीट की परीक्षण एफएसएल वेटेनरी कॉलेज की रिपोर्ट की नकल उपलब्ध कराने के लिए प्रस्तुत किया।
आरोपी अरुण, विनय और संदीप की ओर से भी मेडिकल रिपोर्ट, एफएसएल रिपोर्ट का उल्लेखन करते हुए प्रार्थना पत्र पेश किया। उनका कहना है कि मृतक का इलाज कैलाश अस्पताल नोएडा में हुआ है जिसका कोई कागज कोर्ट में दाखिल नहीं किया गया।