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बर्फीले पहाड़ों की ऊंचाई नापने वाली बाइकर पल्लवी को मिलेगा नारी शक्ति नेशनल अवार्ड पुरस्कार

Fri, 03 Mar 2017 01:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा Updated Fri, 03 Mar 2017 01:39 PM IST
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Biker in measuring the icy heights of the mountains
pallavi fauzdar - फोटो : अमर उजाला

वे ऐसी बाइकर हैं, जिन्होंने हिमालय के बर्फीले पहाड़ों की 5000 मीटर की ऊंचाई को अपनी बाइक से फतह किया है। यही नहीं नोएडा वासी पल्लवी फौजदार कई बार बाइक से लद्दाख भी जा चुकी हैं। साथ ही 5000 मीटर से ऊंचे आठ दर्रों को भी उन्होंने 16 दिन के भीतर छुआ है।

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इनमें से तीन दर्रे ऐसे थे, जहां तक कोई भी बाइकर पहले नहीं पहुंचा था। वे अपनी बाइक से विश्व की सबसे ऊंची झील में से एक देवताल (17950 फुट) तक भी पहुंच चुकी हैं। वे 6502 मीटर ऊंचे साताटोला दर्रे  पर भी बाइक से जा चुकी है।
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उनका नाम लिम्का बुक आफ रिकार्ड में भी दर्ज है। दो बच्चों की मां पल्लवी की सबसे बड़ी ताकत उनका परिवार है, पति परीक्षित सेना में अधिकारी हैं। पल्लवी सिर्फ बाइकर ही नहीं हैं बल्कि फैशन डिजाइनर, समाजसेवी और रेकी विशेषज्ञ भी हैं।
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लेह के दुर्गम इलाकों में उन्होंने 500 रुपये लीटर पेट्रोल खरीदा

Biker in measuring the icy heights of the mountains
pallavi fauzdar - फोटो : अमर उजाला
​मुश्किलों के बारे में पल्लवी बताती हैं कि लेह के दुर्गम इलाकों में उन्होंने 500 रुपये लीटर पेट्रोल खरीदा है। वे अपने साथ जीपीएस और कैमरा जरूर      रखती हैं।


इस साल महिला दिवस के मौके  पर उन्हें केंद्र सरकार द्वारा नारी शक्ति नेशनल अवार्ड पुरस्कार 2016 से नवाजा जाएगा। यह पुरस्कार महिला दिवस पर 8 मार्च को राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि यह उनके लिए गर्व की बात है। पल्लवी फौजदार को पिछले साल प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा आउट स्टेंडिंग वुमेन ऑफ यूपी का खिताब भी दिया गया था।

महिलाएं अपने को कमजोर न समझें

Biker in measuring the icy heights of the mountains
mahila diwas - फोटो : अमर उजाला
पल्लवी कहती हैं महिलाओं को कभी स्वयं कमजोर नहीं समझना चाहिए। अब हर क्षेत्र में महिलाएं काम कर रही हैं। लेकिन यह जरूरी है कि जो भी काम शुरू करो, उसको अंजाम तक जरूर पहुंचाओ।

बताया कि जब वह 18 साल की थीं, उस वक्त शादी नहीं हुई थी तब भी बुलेट व एवेंजर बाइक चलाने का शौक था। अकेले ही घर से निकल जाती थीं। आगरा में जब शादी हुई तो पति समेत परिवार के सदस्यों ने भी पूरा सहयोग किया।

दो बच्चे होने के बाद भी उन्होंने अपना काम नहीं रोका और जब भी रोमांचकारी यात्राओं पर रवाना होती थीं तो बच्चों को ससुराल छोड़ जाती थीं। 
 
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