ऐसे यादव सिंह की काली कमाई हो जाती थी सफेद
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सीबीआई की जांच का दायरा अब यादव सिंह के नाम पर दर्ज खेती की जमीन तक पहुंच गया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने यादव सिंह के साथ ही परिजनों के नाम पर दर्ज खेती की जमीन का भी ब्योरा मांगा है।
सीबीआई की तरफ से रजिस्ट्री विभाग को पत्र मिला है। इसमें यादव सिंह, उनकी पत्नी कुसुमलता, बेटा सनी यादव व दोनों बेटियों सहित अन्य परिजनों के नाम दर्ज जमीनों का ब्योरा शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा गया है।
पत्र में पर्थला खंजरपुर की जमीन का खासतौर पर जिक्र किया गया है। उसके कुछ खसरा नंबर और गाटा संख्या की जमीन के बारे में जिक्र है। सूत्र बताते हैं कि यादव सिंह और उनके परिजनों के नाम पर प्रापर्टी के कागजात में जो भी गवाह मिल रहे हैं, सीबीआई उनसे भी पूछताछ कर रही है। उनकी संपत्ति का भी ब्योरा लिया जा रहा है।
सीबीआई की रडार पर हैं संपत्ति खरीदने बेचने वाले
इसके अलावा यादव सिंह ने जिन लोगों से संपत्ति खरीदी है और जिन लोगों को बेची है, दोनों ही सीबीआई के रडार पर हैं। पत्र मिलने के बाद रजिस्ट्री विभाग इसका पूरा ब्योरा तैयार करने में जुट गया है।
मालूम हो कि सीबीआई इससे पहले यादव सिंह, उनकी पत्नी और परिजनों के नाम पर दर्ज आवासीय, व्यावसायिक और औद्योगिक प्रापर्टी का ब्योरा ले चुकी है।
इसके जरिये कई लोग जांच के दायरे में आ चुके हैं। अब खेती की जमीन का ब्योरा मिलते ही प्रापर्टी कारोबार से जुड़े करीबियों की मुश्किल बढ़ जाएगी। सूत्र बताते हैं कि यादव सिंह गांवों में कौड़ियों के दाम जमीन खरीदते थे।
उसे प्राधिकरण अधिग्रहीत करता था। इसके बदले भारी-भरकम मुआवजा और पांच फीसदी आवासीय भूखंड मिल जाता था। इससे दो नंबर की कमाई एक नंबर में बदल जाती थी।
मिलते थे बेहतरीन लोकेशन पर पांच फीसदी आवासीय भूखंड
साथ ही, बेहतरीन लोकेशन पर पांच फीसदी आवासीय भूखंड मिल जाते थे। एक्सप्रेसवे के आसपास स्थित कई गांवों में भी यही खेल हुआ है। यादव सिंह के वेतन का ब्योरा भी सीबीआई को सीबीआई ने यादव सिंह के अवर अभियंता के पद से लेकर इंजीनियर इन चीफ तक दिए गए वेतन का ब्योरा मांगा था, जिसे प्राधिकरण ने भेज दिया है।
इससे सीबीआई एक तो यादव सिंह की आय का सटीक आकलन लगा सकेगी। दूसरे, इस आय से कितनी संपत्ति खरीदी जा सकती है और वास्तव में कितनी खरीदी गई है, यह आकलन भी लगा सकेगी।
सीबीआई ने अब पांच लाख रुपये तक के टेंडरों का ब्योरा भी प्राधिकरण से मांगा है। इस वजह से अब सैकड़ों फाइलें फिर सीबीआई को भेजी जाएंगी। इससे पहले दो करोड़ रुपये से अधिक कीमत वाले टेंडरों का ब्योरा ही मांगा गया था। करीब 700 फाइलें सीबीआई को पहले ही जा चुकी हैं। सूत्र बताते हैं कि सीबीआई आने वाले दिनों में पांच लाख रुपये से कम कीमत वाले टेंडरों का ब्योरा भी मांग सकती है।