दांव पर है इन दिग्गजों की साख
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महीनों से चल रहे चुनाव प्रचार, आरोप-प्रत्यारोप और कवायदों के नतीजों का दिन है। आज पता चल जाएगा कि जनता ने किसके दावों को सच माना और किसे नकार दिया।
आज जनता के फैसले का दिन है और नई दिल्ली की सात सीटों पर कांग्रेस, भाजपा और आम आदमी पार्टी के दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है। चुनावी मैदान में कांग्रेस के तीन पूर्व केंद्रीय मंत्री, एक पूर्वांचल के अगुवा, एक पूर्व प्रदेश अध्यक्ष, एक पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे व एक कांग्रेस के कद्दावर नेता के भाई हैं।
वहीं, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष, एक पूर्व मुख्यमंत्री के बेटे, एक भोजपुरी गायक के अलावा एक सामाजिक व धार्मिक क्षेत्र से राजनीति में प्रवेश की तैयारी में हैं।
जीते तो बल्ले-बल्ले और हारे तो भी...
चांदनी चौक से कांग्रेस प्रत्याशी कपिल सिब्बल केंद्रीय मंत्री रहे और बड़ा नाम है। जीते तो बल्ले-बल्ले और हारे तो भी पार्टी की जरूरत रहेंगे, राज्यसभा से संसद तक पहुंच बन सकती है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. हर्षवर्धन की प्रतिष्ठा सीधे पार्टी से जुड़ी है।
जीतने पर केंद्र की राजनीति और हारे तो विधायक कायम, लेकिन हार-जीत से पार्टी की नैतिक हार-जीत जुड़ी है। आप प्रत्याशी आशुतोष के राजनीतिक कैरियर की शुरुआत है, लेकिन पार्टी के लिए बड़ा नाम हैं।
उत्तर पूर्वी दिल्ली से कांग्रेस प्रत्याशी जयप्रकाश अग्रवाल इस चुनाव के सबसे अनुभवी, रिकार्ड दिन तक प्रदेश अध्यक्ष, राज्यसभा सांसद भी रहे हैं। जबकि भाजपा प्रत्याशी मनोज तिवारी संसद की दहलीज के लिए दूसरी बार चुनावी रेल में बैठे हैं। आप के प्रो. आनंद कुमार राजनीतिक विज्ञान के प्रैक्टिकल के मौके की तलाश में हैं।
क्या मां बिना जीत पाएंगे संदीप दीक्षित
पूर्वी दिल्ली से कांग्रेस प्रत्याशी संदीप दीक्षित मां के बिना पहला चुनाव लड़े हैं। हार-जीत से आगे का कैरियर तय होगा। भाजपा प्रत्याशी सामाजिक क्षेत्र से राजनीति में उतरे हैं तो आप नेता व महात्मा गांधी के पौत्र राजमोहन गांधी का दूसरा चुनाव है। जीते तो नाव आगे बढ़ेगी।
नई दिल्ली से कांग्रेस प्रत्याशी अजय माकन ने अभी तक अच्छे दिन देखे हैं। विधानसभा में जीते तो विस अध्यक्ष व मंत्री रहे। लोकसभा में जीते तो केन्द्रीय मंत्री रहे। अब पार्टी में मीडिया हेड हैं। खोने को बहुत कुछ है, क्योंकि शीला दीक्षित के जाने के बाद मुख्यमंत्री प्रत्याशी की दौड़ में सबसे पहला नाम हैं। यहां भाजपा व आप प्रत्याशी का कोई बड़ा नाम नहीं है।
पश्चिम दिल्ली के कांग्रेस प्रत्याशी महाबल मिश्रा कोई चुनाव नहीं हारे। इनके सामने भाजपा प्रत्याशी प्रवेश साहिब सिंह वर्मा को पिता पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा का नाम बढ़ाने की चुनौती है। यहां आप प्रत्याशी की पहचान गृहमंत्री पर जूता फेंकने को लेकर है।
क्या आप का खाता खोल पाएंगी राखी बिड़लान
उत्तर पश्चिम दिल्ली से कांग्रेस प्रत्याशी कृष्णा तीरथ केंद्रीय मंत्री रही हैं। विरोध के बीच हार राजनीतिक कैरियर को काफी पीछे धकेल सकती है।
आप प्रत्याशी राखी बिड़लान पहली बार विस चुनाव जीतकर कम उम्र की मंत्री बनीं, अब संसद पहुंचीं तो रिकार्ड बनेगा। वहीं, भाजपा ने यहां से दलित नेता उदित राज को मौका दिया है जो जीतते हैं तो मोदी लहर और हारे तो टिकट का गलत फैसला माना जाएगा।
दक्षिण दिल्ली में कांग्रेस के प्रत्याशी रमेश कुमार की हार व जीत के साथ बड़े भाई सज्जन कुमार का कैरियर भी जुड़ा है। भाजपा प्रत्याशी रमेश बिधूड़ी का दूसरा लोस चुनाव है। पिछला चुनाव हारे थे। राज्य से केन्द्र की राजनीति तय होगी। आप प्रत्याशी की कोई बड़ी पहचान नहीं है।