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चांद के दीदार से मुकद्दस रमजान की शुरुआत, पहला रोजा आज

Tue, 07 Jun 2016 01:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 07 Jun 2016 01:41 AM IST
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beginning of the holy Ramadan, first Rosa Today
रमजान की शुरुआत - फोटो : अमर उजाला

चांद दिखने के साथ ही सोमवार को मुकद्दस रमजान की शुरुआत हो गई। दिल्ली, बिहार, असम, कोलकाता, बंगलूरू समेत देश कई हिस्सों में सोमवार शाम को चांद देखा गया। फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मुफ्ती मुकर्रम ने चांद दिखने की तसदीक की।

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30 दिन चलने वाले मुकद्दस रमजान को लेकर मस्जिदों में सभी तैयारियां पहले से ही पूरी कर ली गई थी। सभी मस्जिदों को दुल्हन की तरह सजाया-संवारा गया है। इस दौरान लोगों ने जमकर खरीदारी की।
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सोमवार शाम जैसे ही रमजान का चांद दिखा लोगों ने एक दूसरे को चांद की बधाई देनी शुरू कर दी। मैसेज और फोन का सिलसिला शुरू हो गया। फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमाम मौलाना मुफ्ती मुकर्रम ने मुल्क के लोगों को रमजान की मुबारकबाद दी। उन्होंने कहा कि रमजान हमारे मुल्क के लिए रहमतें लेकर आया है। मौलाना ने बताया कि साल के 12 महीनों में रमजान सबसे खास महीना है।

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अल्लाह का जिक्र करें, जकात और अन्य दान दें

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रमजान

पूरे महीने रोजे रखकर अल्लाह की इबादत की जाती है। अन्य दिनों के मुकाबले एक नेकी पर सवाब (पुण्य) भी बहुत ज्यादा मिलता है। मौलाना ने लोगों को नसीहत देते हुए कहा कि वह ज्यादा से ज्यादा अल्लाह का जिक्र करें, जकात और अन्य दान दें।

आम दिनों के मुकाबले लोगों से नर्म दिल से पेश आएं। खासकर गरीबों और अपने नौकरों से नर्म दिली से पेश आएं। रमजान का एक महीना एक तरह से पूरे साल की ट्रेनिंग का महीना है। इस महीने में लोग रोजे रखते हैं। रोजा रखने का मतलब भूखे रहना ही नहीं है, बल्कि इसका एक खास उद्देश्य है।

रोजा रखकर रोजेदार को उस व्यक्ति का एहसास होगा जो दो वक्त की रोटी भी नही जुटा पाता। लोगों में ऐसे लोगों का ख्याल रखने का जज्बा पैदा होगा। अल्लाह ने इसीलिए सभी मुसलमानों पर रोजे फर्ज किए हैं। इधर, चांद देखने के बाद ही सभी मस्जिदों में तरावीह की नमाज शुरू हो गई। रमजान का चांद देखने के साथ ही तरावीह शुरू हो जाती है और ईद का चांद देखते ही समाप्त हो जाती है। तरावीह नमाज में हाफिज (इमाम) कुरान की तिलावत करता है और लोग पीछे खड़े होकर सुनते हैं।

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