मुकेश की हालत अब ठीक है: रक्षाबंधन से पहले बहन ने लीवर दान कर बचाई भाई की जान, मरीज के अंग हो गए थे फेल
दक्षिणी दिल्ली स्थिति निजी अस्पताल में 43 वर्षीय भाई मुकेश अत्याधिक कमजोरी, पेट में सूजन और बार-बार इंटरनल ब्लीडिंग से परेशान होकर आया था। मरीज की हालत काफी खराब थी। वह चलने में असमर्थ था। शरीर में कमजोरी बढ़ गई थी।
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रक्षाबंधन से पहले बहन ने अपने भाई को लीवर देकर उनकी जान बचाई। भाई लंबे समय से सिरोसिस से पीड़ित था। समस्या बढ़ने के बाद रोगी की जान बचाने के लिए अंग प्रत्यारोपण के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा। ऐसे में अंग देने में बहन आगे आई। प्रत्यारोपण के बाद मरीज और उनकी बहन स्वस्थ हैं।
दक्षिणी दिल्ली स्थिति निजी अस्पताल में 43 वर्षीय भाई मुकेश अत्याधिक कमजोरी, पेट में सूजन और बार-बार इंटरनल ब्लीडिंग से परेशान होकर आया था। मरीज की हालत काफी खराब थी। वह चलने में असमर्थ था। शरीर में कमजोरी बढ़ गई थी। पैरों में सूजन के साथ मरीज को पीलिया हो गया था। यहां जांच के बाद मरीज में सिरोसिस का पता चला।
अस्पताल के सर्जन डॉ. मनोज गुप्ता ने बताया कि मरीज की स्थिति खराब थी। उसकी जान बचाने के लिए अंग प्रत्यारोपण ही एक विकल्प था। परिवार को अंगदान के लिए कहा गया। मरीज के परिवार में उनकी वृद्ध मां और उनकी बड़ी बहन थी। अंगदान करने के लिए देहरादून निवासी उनकी बहन ने कोई हिचकिचाहट नहीं की। जब डॉक्टरों ने उपचार योजना को लेकर बहन से चर्चा की तो उन्होंने कहा कि वह अपने भाई को बचाना चाहती हैं।
उन्होंने खुद दाता बनने के लिए आवश्यक परीक्षण कराने पर जोर दिया। पूरी जांच के बाद अंगदान की तैयारी की गई। लीवर प्रत्यारोपण के बाद मरीज और उसकी बहन स्वस्थ है। मरीज की स्थिति तेजी से सुधरी और उन्हें सर्जरी के दो सप्ताह बाद छुट्टी दे दी गई। उनकी बहन, जिन्हें सात दिनों के बाद छुट्टी दे दी गई।
डॉ. मनोज ने कहा कि रक्षा बंधन में भाई अपने बहन की रक्षा का वचन देता है, लेकिन इस केस में बड़ी बहन ने अपने भाई को लीवर का हिस्सा देकर उसकी जिंदगी बचाई। मुकेश की हालत पहले से काफी बेहतर है। उसे विशेष ध्यान रखने की सलाह दी गई है। ताकि भविष्य में फिर से कोई समस्या न हो।