नोटबंदीः बैंकों ने बांटे 1006 करोड़, वापस आए महज 90 करोड़
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नोटबंदी के कारण पैदा हुई नकदी का संकट अभी खत्म होने वाला नहीं है। इस संकट के लिए अब सरकार अथवा बैंक नहीं खुद शहरवासी जिम्मेदार हैं। क्योंकि बैंक से मिली नकदी को वह दबाकर बैठ गए हैं।
यही कारण है कि मार्केट में नकदी का जो फ्लो बनना चाहिए वह नहीं बन पा रहा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि शहरवासियों को अब तक विभिन्न बैंकों के जरिए कुल 1006 करोड़ रुपये की नई करेंसी दी जा चुकी है। उसमें से महज 90 करोड़ ही नए नोट दोबारा बैंकों में आ पाए हैं। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि नकदी संकट अभी खत्म होने वाली नहीं है।
बता दें कि केंद्र सरकार के नोटबंदी के आज 48 दिन पूरे हो गए। इन दिनों में शहर की कुल 298 बैंक शाखाओं में लोग 500-1000 रुपये के पुराने 3900 करोड़ रुपये (ये आंकड़ा 22 दिसंबर का है) जमा करा चुके हैं। इसके बदले बैंकों ने अब तक ग्राहकों को कुल 1006 करोड़ रुपये दे चुके हैं।
36 हजार नए खाते खोले गए
यानी जमा राशि की महज 25.7 फीसदी ही नई नकदी लोगों तक पहुंच पाई है। लीड बैंक मैनेजर एलएम शर्मा ने बताया कि जिले में दी गई 1006 करोड़ की नई नकदी में से अभी तक दोबारा बैंकों में केवल 90 करोड़ रुपये ही जमा हो पाए हैं। जिन्हें भी नई नकदी मिली वह उसे दबाकर बैठ गए हैं।
रेलवे रोड स्थित आईडीबीआई बैंक के शाखा प्रबंधक एसपी सिंह का कहना है कि नई नकदी जमा करने से अर्थ व्यवस्था के बिगड़ने का खतरा पैदा हो जाएगा। ग्राहकों को चाहिए वह नकदी को मार्केट में लाएं ताकि नकदी का फ्लो बन सके। नीलम बाटा रोड स्थित सिंडीकेट बैंक के एजीएम रमाकांत शर्मा ने कहा कि नई नकदी का दोबारा बैंकों में न आना चिंता का विषय है।
नोटबंदी के बाद असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले अस्थायी श्रमिकों का खाता खुलवाने के लिए सरकार के निर्देश पर जनधन योजना के तहत नए खाते खोलने की शुरूआत की गई है। 8 नवंबर के बाद से अब तक करीब 36 हजार नए जनधन खाते खोले गए। इनमें ईंट भट्टों व फैैक्ट्री आदि में काम करने वाले अस्थायाी श्रमिक शामिल हैं।
विकसित नहीं होगी अर्थव्यवस्था
मैनेजर एलएम शर्मा ने बताया कि पहले जिले में जनधन खाता धारकों की कुल संख्या 461000 थी जो अब बढ़कर 497000 तक पहुंच गई है। अब किसी भी श्रमिक को नकदी का भुगतान नहीं होगा बल्कि उनके खाते में धनराशि संबंधित संस्थानों द्वारा चेक आदि के जरिए भेजी जाएगी।
नोटबंदी के कारण पुरानी और नई नकदी आउट ऑफ सर्कुलेशन हो चुकी है। नई नकदी जमा करने से अर्थव्यवस्था विकसित नहीं हो पाएगी और इसका मार्केट पर बुरा असर पड़ेगा। साथ ही भ्रष्टाचार भी बढ़ेगा।
निश्चित रूप से कैशलेस व्यवस्था लागू होने से अर्थ व्यवस्था पटरी पर तेजी से जाएगी लेकिन छोटे छोटे कामकाज के लिए नकदी और उसका प्रचलन दोनों जरूरी भी हैं। -प्रोफेसर डीपी वैद्य, डीएवी कॉलेज फरीदाबाद