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नोट पर पाबंदी का असर: 26000 करोड़ रुपये बढ़ेगा 'मोबाइल वॉलेट’ का बाजार

Fri, 11 Nov 2016 12:00 AM IST
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुरुग्राम
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Fri, 11 Nov 2016 12:00 AM IST
सार

-मोबाइल वॉलेट में 40 फीसदी से अधिक का होगा इजाफा 
-नोट बंद होने से छोटे से लेकर बड़े व्यापारी का बढ़ा रूझान
 

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ban on old notes will effect 26000 crore of mobile wallet business in india

विस्तार

बाजार में 500 और 1000 रुपये के नोट पर पाबंदी से अब 'मोबाइल वॉलेट’ का कारोबार बढ़ेगा। एक महीने में 40 फीसदी से अधिक कारोबार में इजाफा होने की संभावना है। बाजार विशेषज्ञों और मोबाइल वॉलेट एक्सपर्ट के मुताबिक 'मोबाइल वॉलेट’ के जरिये देश में 26000 करोड़ रुपये का लेन-देने बढ़ेगा।
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ई-कॉमर्स सेक्टर और बड़े व्यापारी के साथ छोटे व्यापारी भी इसके तरफ तेजी से रूझान बढने लगा है। इसे देखते हुए कंपनियों ने विस्तार नीति के तहत काम करना शुरू कर दिया है। 500 और 1000 रुपये के नोट पर प्रतिबंध का सबसे अधिक असर छोटे और मध्यम वर्ग के कारोबारियों पर पड़ा है।
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बाजार में पैसा नहीं होने के कारण व्यापार ठप हो गया है। इसके विकल्प के तौर पर बाजार में 'मोबाइल वॉलेट’ का बढ़ावा देने का काम शुरू हो गया है। पेटीएम, मोबीक्विक, ऑक्सीजन जैसी 40 कंपनियां अपनी सेवाएं दे रही है।
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जो बैंकों के अलावा अलग-अलग सेक्टरों और छोटे व्यापारियों के साथ समझौता कर मनी ट्रांसफर, रिचार्ज, बिल पेमेंट और फिजिकल रिटेल को टारगेट किया जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक हर जगह वॉलेट नहीं है, इस वजह से कंपनियों के पास नए कस्टमर बनाने का रास्ता है।

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मोबाइल वॉलेट में पैसे डालिए और उसके बाद कहीं पर कुछ भी खरीदिए। दिल्ली-एनसीआर में अब टैक्सी का किराया और कॉफी के लिए भी मोबाइल वॉलेट शुरू कर दिया है। अभी लोगों के पास पैसे होते थे, तो वॉलेट के तरफ ध्यान नहीं जाता था। पाबंदी के बाद वॉलेट के जरिये खर्च करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

गुरुग्राम सेक्टर-32 स्थित ऑक्सीजन सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर सुनील कुलकर्णी कहते हैं कि ई-कॉमर्स में 70 फीसदी काम सीओडी (कैश ऑन डिलीवरी) है। बड़े नोट के बंद होने से यह सीधे मोबाइल वॉलेट की तरफ बढ़ेगा।

करीब 240 करोड़ का रिटेल सेक्टर में इजाफा होगा। तुरंत लेन-देन और मनी ट्रांसफर की वजह से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में भी 50 फीसदी तक इजाफा की संभावना है। मोबाइल वॉलेट एक्सपर्ट एएम सोनी कहते हैं अभी मार्केट में लेन-देन का प्रचलन कम है, लेकिन जरूरत और खपत बरकरार है।

इस तरह के वॉलेट का हो रहा है इस्तेमाल

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कैश बैक ऑफर के जरिये लोगों को इस तरफ मोड़ा जा रहा है। वर्ष 2012-13 में यह बिल्कुल प्रचलन में नहीं था। लेकिन 2015-16 तक यह तेजी से बढ़ा। इस वित्तीय वर्ष में करीब 117 करोड़ बार मोबाइल वॉलेट से लेन-देन किया गया। ऑफर के जरिये कंपनी अपना पैर पसार रही है। पैसे नहीं होने के कारण सीधे बैंक से लिंक कर वॉलेट का प्रचलन यूथ में बढ़ेगा। 

-प्रीपेड वॉलेट में डेबिट कार्ड या बैंक से पैसे डालने होंते है। अगर पैसे का इस्तेमाल नहीं करेंगे तो यह अकाउंट में वापस हो जाता है। 
-पोस्ट पेड वॉलेट में बैंक अकाउंट मोबाइल वॉलेट से जुड़ा होता है और जैसे-जैसे ख़र्च करते जाएंगे, अकाउंट से पैसे घटते जाएंगे।
-ओपन वॉलेट होते हैं, वो बैंक से जुड़े होते हैं। मतलब आप ओपन वॉलेट से पैसे भी निकाल सकते हैं।
-क्लोज्ड़ वॉलेट  बैंक अकाउंट से नहीं जुड़ा होता। अगर उसमें पैसे हैं, तो खर्च कर सकते हैं और नहीं हैं तो खर्च नहीं कर सकते। 

ये कंपनियां देती है मोबाइल वॉलेट की सुविधा
-पेटीएम, ऑक्सीजन वॉलेट, मोबीक्विक, पे-यू मनी, साइटरस, स्टेट बैंक बडी, एचडीएफसी चिल्लर, आईसीआईसीआई पॉकेट
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