क्या NCR का एक और टोल प्लाजा होगा फ्री?
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बदरपुर टोल प्लॉजा हटाने की मांग को लेकर सेक्टरों के लोगों ने लामबंदी शुरू कर दी है। जिसे लेकर सेक्टर वासियों ने जन प्रतिनिधियों को घेरने की तैयारी शुरू की है।
सेक्टर-37 में सोमवार को आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों की एक बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें सराय ख्वाजा बाजार के प्रतिनिधि और आसपास कॉलोनियों के लोग शामिल हुए। इसमें बदरपुर टोल प्लाजा की वजह से बंद हुए सेक्टर, बाजार व कॉलोनियों के कटों को लेकर चर्चा की गई।
जिसमें सभी कटों को खुलवाने और टोल प्लाजा को बार्डर से हटावाने के लिए आंदोलन चलाने पर सर्व सम्मति से फैसला लिया गया। इसके बाद सेक्टर की आरडब्ल्यूए अध्यक्ष आशा शर्मा के नेतृत्व में व्यापारी एवं अन्य लोग राजस्व मंत्री महेंद्र प्रताप से मिलने उनके आवास पहुंचे। जहां पर ज्ञापन सौंपकर बदरपुर टोल प्लाजा के पास की स्थिति से अवगत कराया गया। उन्होंने बदरपुर टोल प्लॉजा हटाने की मांग की।
टोल प्लाजा के कारण लगाना पड़ता है चक्कर
आरडब्ल्यूए अध्यक्ष आशा शर्मा ने बताया कि टोल प्लाजा बनने से लोगों को कई किलोमीटर चक्कर लगाकर अपने अपने घरों को आना जाना पड़ता है। यहीं नहीं दिन भर घर व बाजार के आस पास की स्थिति जाम जैसी बनी रहती है।
लोगों को अपने ही क्षेत्र में आने-जाने के लिए रकम देनी पड़ रही है। ऐसे में यहां से टोल प्लाजा हटना ही इन समस्याओं का विकल्प है। जिस पर मंत्री ने सरकार व अन्य संबंधित अधिकारियों से बातचीत करने का आश्वासन दिया।
गुड़गांव टोल प्लाजा हो गया है टोल फ्री
दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे के सरहौल टोल को हटाने में सबसे बड़ा कारण यहां लगने वाला भीषण जाम रहा था। इसके खिलाफ लगातार आवाजें उठती रहीं, लेकिन इससे संबंधित कंपनी ने कभी कोई ठोस प्रयास नहीं किया।
इसको लेकर सरकारी महकमे से जो निर्देश मिले, उस पर अमल करने की बजाय कंपनी अपना टालू रवैया अपनाए रखा। नतीजा यह हुआ कि कंपनी को 2023 तक टोल वसूलने की जगह नौ साल पहले ही इससे छोड़ना पड़ा।
2008 से शुरू हुए 42 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर डीएस कंस्ट्रक्शन को 2023 तक शुल्क वसूलने का अधिकार दिया गया था। इसके बाद टोल शुरू होते ही जाम लगने का ऐसा सिलसिला ऐसा शुरू हुआ कि ट्रैफिक पुलिस से लेकर जिला प्रशासन तक की नींद उड़ा दी थी।
नोएडा डीएनडी को लेकर भी होता रहा है विरोध
दिल्ली को नोएडा से जोड़ने वाले डीएनडी टोल प्लाजा को लेकर भी विरोध होता रहा है। किसानों और स्थानीय लोगों ने समय-समय पर विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं।
इसको चलाने वाली कंपनी, नोएडा टोल ब्रिज भी इसको लेकर इंकार नहीं करती है। कई बार कंपनी को बढ़ी कीमतों को वापस लेना पड़ा है।