‘बाबरी विध्वंस असहिष्णुता का सबसे बड़ा उदाहरण’
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आधुनिक भारत में असहिष्णुता का सबसे बड़ा उदाहरण बाबरी मसजिद का विध्वंस है, जिसने हमारी संस्कृति परंपराओं और लोकतंत्र पर दाग लगाया है। यह कहना है कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत का।
वह नोएडा के सेक्टर-6 स्थित इंदिरा गांधी कला केंद्र में आयोजित पाखी महोत्सव में शामिल होने पहुंचे थे। महोत्सव में ‘अभिव्यक्ति की आजादी बनाम असहिष्णुता’ विषय पर चर्चा हुई।
इस मौके पर राज्य सभा सांसद तरुण विजय, स्वामी शिवानंद सरस्वती सहित कई अन्य वरिष्ठ पत्रकार शामिल रहे। रावत ने कहा कि बाबरी विध्वंस में जो शामिल थे उन्होंने कभी भी नहीं कहा कि हमसे भूल हुई है।
उनका कहना है कि लोकतंत्र में असहिष्णुता का पुट होगा तो सत्ता को असहिष्णु होने से भी कोई नहीं रोक पाएगा। यही वजह है कि सामाजिक, धार्मिक के बाद अब राजनैतिक असहिष्णुता चरम पर है।
कहा कि असहिष्णुता के माहौल में जो हत्याएं हुई हैं वह पूरी तरह से योजनागत तरीके से हुई। बहुत चालाकी से काम किया गया है। यदि उसके खिलाफ उठ कर नहीं खड़े होंगे तो यह कमजोरी साबित होगी।
उत्तराखंड पहला राज्य है, जहां अभी भी 70 फीसदी जंगल
रावत ने कहा कि उत्तराखंड के अप्रवासियों को जोड़ने का प्रयास हो रहा है। अप्रवासियों को जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने कई योजनाएं चलाई हैं। इसके अलावा मकर संक्रांति पर सब को आमंत्रित कर रहे हैं।
चैत्र के महीने में आप्रवासी महिलाओं को बुला रहे हैं। उन्होंने कहा कि अर्द्धकुंभ को शानदार बनाया जाएगा। रावत का कहना है कि उत्तराखंड में जलवायु परिवर्तन की वजह से गर्मी बढ़ी है।
देहरादून और मसूरी में भी गर्मी है। इसकी वजह जंगल काटना और अंधाधुंध औद्योगिक विकास के नाम पर कुछ ऐसे कार्य हुए, जो खतरनाक साबित हो रहे हैं। हालांकि उत्तराखंड पहला राज्य है, जहां अभी भी 70 फीसदी जंगल बचे हुए हैं।