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बुलंदशहर गैंगरेप केसः सुप्रीम कोर्ट ने आजम खान का माफीनामा किया नामंजूर

Wed, 07 Dec 2016 02:34 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 07 Dec 2016 02:34 PM IST
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azam khan apology affidavit in bulandshahr gang rape case rejected by supreme court pointing errors
आजम खान - फोटो : amar ujala

बुलंदशहर मां-बेटी गैंगरेप मामले में विवादित बयान देने वाले उत्तर प्रदेश के शहरी विकास मंत्री और समाजवादी पार्टी के बड़े नेता आजम खान के माफीनामे को सुप्रीम कोर्ट ने नामंजूर कर दिया है। अदालत ने बुधवार को सुनवाई के बाद 15 दिसंबर तक एक नया माफीनामा दाखिल करने का आदेश दिया है।

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बुलंदशहर गैंगरेप मामले में चल रही सुनवाई के दौरान आज सुप्रीम कोर्ट ने आजम खान के हलफनामे को मंजूर नहीं किया। अदालत ने आजम खां को दोबारा बिना शर्त माफीनामे का हलफनामा दाखिल करने को कहा है।
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कोर्ट ने उनके पहले हलफनामे में पर सवाल उठाते हुए कहा कि 'इफ' यानी 'यदि मेरे बयान से दुख पहुंचा है...' कोर्ट ने कहा कि अगर कोई हलफनामा 'इफ' से शुरू होता है तो ये बिना शर्त माफी नहीं है।

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‌ब‌िना शर्त हलफनामे में नहीं होता इन दो शब्दों का प्रयोग

azam khan apology affidavit in bulandshahr gang rape case rejected by supreme court pointing errors

गौरतलब है कि अदालत ने ये भी कहा कि बिना शर्त माफीनामा का हलफनामा किस तरह का होना चाहिए, ये भी सुनवाई हो सकती है। बता दें कि इससे पहले, एनएच 91 गैंगरेप मामले में यूपी सरकार के मंत्री आजम खान को अदालत ने नवंबर में हलफनामा दायर कर बिना शर्त माफी मांगने को कहा था।

उस वक्त अदालत ने कहा था कि आपको इस मामले में माफी दी जाए या नहीं ये हलफनामा देखकर तय किया जाएगा। अब हलफनामे के नमूने पर अटॉर्नी जनरल ने सवाल उठाते हुए कहा कि आजम ने बिना शर्त माफी नहीं मांगी है।

हलफ़नामे में कहा गया था कि मीडिया ने उनकी बातों को तोड़मरोड़ कर पेश किया है। इस पर एजी ने एतराज जताते हुए और उनके हलफनामे की गलतियां उजागर करते हुए कहा कि अगर उनके बयान से पीड़ित को तकलीफ पहुंची है तो, बिना शर्त हलफनामे में अगर (इफ) और तब (देन) का इस्तेमाल नहीं हो सकता।

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