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मरीजों के लिए बुरी खबर, दिल्ली में नहीं मिलेगा आयुष्मान भारत के लाभार्थी को इलाज, जान लीजिए वजह
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 22 Sep 2018 03:53 AM IST
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अस्पताल में चल रहा इलाज
- फोटो : अमर उजाला
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भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार 23 सितंबर को पूरे देश को दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा योजना आयुष्मान भारत की सौगात देने वाली है, लेकिन उत्तर भारत के करोड़ों लाभार्थियों के लिए ये सुविधा आसान नहीं होगी।
यूपी, बिहार, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल आदि राज्यों से हर दिन हजारों मरीज देश की राजधानी में इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इन राज्यों से आए आयुष्मान भारत लाभार्थियों को दिल्ली के निजी एवं सरकारी अस्पतालों में उपचार नहीं मिल सकेगा।
केंद्र सरकार के एम्स, सफदरजंग और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल को छोड़ दें, तो मैक्स, अपोलो, फोर्टिस, पीएसआरआई, बालाजी एक्शन और वेंकटेश्वर जैसे अस्पतालों में उपचार नहीं मिलेगा।
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इसके पीछे वजह है कि दिल्ली सरकार का आयुष्मान भारत के लिए सरकार से एमओयू साइन नहीं करना, जिसके कारण अभी तक दिल्ली के अस्पताल इस सुविधा के लिए पैनल सूची में शामिल नहीं हुए हैं।
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यूपी, बिहार, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और हिमाचल आदि राज्यों से हर दिन हजारों मरीज देश की राजधानी में इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में इन राज्यों से आए आयुष्मान भारत लाभार्थियों को दिल्ली के निजी एवं सरकारी अस्पतालों में उपचार नहीं मिल सकेगा।
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केंद्र सरकार के एम्स, सफदरजंग और डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल को छोड़ दें, तो मैक्स, अपोलो, फोर्टिस, पीएसआरआई, बालाजी एक्शन और वेंकटेश्वर जैसे अस्पतालों में उपचार नहीं मिलेगा।
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इसके पीछे वजह है कि दिल्ली सरकार का आयुष्मान भारत के लिए सरकार से एमओयू साइन नहीं करना, जिसके कारण अभी तक दिल्ली के अस्पताल इस सुविधा के लिए पैनल सूची में शामिल नहीं हुए हैं।
हालांकि निजी अस्पताल स्पष्ट रूप से इस योजना को लेकर टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन इन्होंने साफ-तौर पर लाभार्थियों के उपचार पर फिलहाल कोई जवाब भी नहीं दिया है। सवाल लाजमी है कि बगैर पैनल में शामिल हुए कोई अस्पताल मरीज का इलाज भी नहीं कर सकता।
मैक्स हेल्थकेयर प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने आयुष्मान भारत के साथ कुछ अस्पतालों को जोड़ने का मूल्यांकन शुरू कर दिया है। हालांकि कुछ विवरणों को लेकर चिंताजनक स्थिति भी व्यक्त की है।
बावजूद इसके योजना पर फिलहाल उनका अध्ययन चल रहा है, जबकि पीएसआरआई और बालाजी एक्शन अस्पताल की ओर से स्पष्ट जवाब दिया गया कि अभी तक दिल्ली में एमओयू साइन न होने की वजह से अस्पतालों का पंजीयन नहीं हुआ है। बगैर पंजीयन अस्पताल मरीजों को सुविधा नहीं दे सकते।
मैक्स हेल्थकेयर प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने आयुष्मान भारत के साथ कुछ अस्पतालों को जोड़ने का मूल्यांकन शुरू कर दिया है। हालांकि कुछ विवरणों को लेकर चिंताजनक स्थिति भी व्यक्त की है।
बावजूद इसके योजना पर फिलहाल उनका अध्ययन चल रहा है, जबकि पीएसआरआई और बालाजी एक्शन अस्पताल की ओर से स्पष्ट जवाब दिया गया कि अभी तक दिल्ली में एमओयू साइन न होने की वजह से अस्पतालों का पंजीयन नहीं हुआ है। बगैर पंजीयन अस्पताल मरीजों को सुविधा नहीं दे सकते।
वहीं अपोलो और फोर्टिस अस्पतालों से जवाब नहीं मिला। वेंकटेश्वर अस्पताल के निदेशक डॉ. राजीव मल्होत्रा का कहना है कि हम किसी भी मरीज के उपचार से इनकार नहीं कर सकते। हालांकि हमने अभी तक इस योजना के साथ करार नहीं किया है। आर्थिक और सामाजिक दृष्टिकोण पर हम उपचार करते आए हैं और करेंगे भी।
पंजाब ने भी हाथ नहीं बढ़ाया
पंजाब ने भी अब तक इस सुविधा के लिए केंद्र की ओर हाथ नहीं बढ़ाया है। 2015 में पंजाब में भगत पूरन सिंह सेहत बीमा योजना (बीपीएसएसबीवाई) एवं भाई घनैया सेहत सेवा स्कीम (बीजीएसएसएस) को शुरू किया गया था। इसके तहत पंजाब सरकार 28.96 लाख परिवारों को स्वास्थ्य बीमा सुविधा दे रही है, इसलिए पंजाब ने मोदी केयर में दिलचस्पी नहीं दिखाई है।
पंजाब ने भी हाथ नहीं बढ़ाया
पंजाब ने भी अब तक इस सुविधा के लिए केंद्र की ओर हाथ नहीं बढ़ाया है। 2015 में पंजाब में भगत पूरन सिंह सेहत बीमा योजना (बीपीएसएसबीवाई) एवं भाई घनैया सेहत सेवा स्कीम (बीजीएसएसएस) को शुरू किया गया था। इसके तहत पंजाब सरकार 28.96 लाख परिवारों को स्वास्थ्य बीमा सुविधा दे रही है, इसलिए पंजाब ने मोदी केयर में दिलचस्पी नहीं दिखाई है।
मरीजों से आए दिन भिड़ेंगे अस्पताल
एक निजी अस्पताल के चर्चित हृदय रोग विशेषज्ञ का कहना है कि आयुष्मान भारत का लाभार्थी जब भी यूपी व बिहार जैसे राज्य से दिल्ली आकर अस्पताल पहुंचेगा, तो उसे पैनल या एमओयू से लेना देना नहीं होगा।
वह अस्पताल से तत्काल उपचार मांगेगा, लेकिन नियमों के तहत अस्पताल बंधे हुए हैं। ऐसे में ये कहना गलत नहीं कि आने वाले दिनों में दिल्ली के निजी अस्पतालों और आयुष्मान भारत के लाभार्थियों के बीच विवाद देखने को मिल सकता है।
दिल्ली के प्रस्ताव पर अब तक सहमति नहीं
दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक डॉ. कीर्ति भूषण का कहना है कि कुछ माह पहले केंद्र के समक्ष दिल्ली सरकार की ओर से प्रस्ताव रखा गया था, जिसमें बिजली उपभोक्ता एवं राशन कार्ड धारकों को सुविधा का लाभ मिलना था, लेकिन केंद्र से अब तक इस पर सहमति नहीं बन पाई है। फिलहाल स्थिति जस की तस है। इस बयान के बाद ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि फिलहाल कुछ माह तक हालात विपरीत ही रहने वाले हैं।
वह अस्पताल से तत्काल उपचार मांगेगा, लेकिन नियमों के तहत अस्पताल बंधे हुए हैं। ऐसे में ये कहना गलत नहीं कि आने वाले दिनों में दिल्ली के निजी अस्पतालों और आयुष्मान भारत के लाभार्थियों के बीच विवाद देखने को मिल सकता है।
दिल्ली के प्रस्ताव पर अब तक सहमति नहीं
दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक डॉ. कीर्ति भूषण का कहना है कि कुछ माह पहले केंद्र के समक्ष दिल्ली सरकार की ओर से प्रस्ताव रखा गया था, जिसमें बिजली उपभोक्ता एवं राशन कार्ड धारकों को सुविधा का लाभ मिलना था, लेकिन केंद्र से अब तक इस पर सहमति नहीं बन पाई है। फिलहाल स्थिति जस की तस है। इस बयान के बाद ये कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि फिलहाल कुछ माह तक हालात विपरीत ही रहने वाले हैं।